(डॉ. एल.एन.वैष्णव)

दमोह, आज 13 अप्रैल (सोमवार)जिले के नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने पदभार ग्रहण करने के बाद संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के सभाकक्ष में आयोजित पत्रकार वार्ता में जिले के विकास को लेकर अपना स्पष्ट विजन सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब प्रशासनिक कामकाज केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव सीधे जनता के जीवन में दिखाई देना चाहिए।पत्रकारों से संवाद करते हुए कलेक्टर यादव ने कहा कि दमोह जिले को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अब जवाबदेही तय होगी और परिणाम आधारित कार्यशैली को प्राथमिकता दी जाएगी।
बुंदेलखंड से जुड़ाव, सेवा का भाव
कलेक्टर यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उनका बुंदेलखंड की माटी से गहरा भावनात्मक संबंध है। उन्होंने कहा कि दमोह में सेवा का अवसर उनके लिए केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देने का अवसर है। उन्होंने खुद को “जिम्मेदार सहयोगी” बताते हुए कहा कि वे जनता और प्रशासन के बीच सेतु बनकर कार्य करेंगे।
आस्था से की शुरुआत, विकास का लिया संकल्प
पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने बांदकपुर मंदिर में भगवान जागेश्वरनाथ एवं कुंडलपुर जैन तीर्थ में भगवान ऋषभदेव के दर्शन कर जिले की सुख-समृद्धि और विकास के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और संकल्प के साथ कार्य करने से ही बदलाव संभव है।
अधिकारियों को सख्त संदेश: “फील्ड में उतरना ही होगा”
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अब जिले में काम करने का तरीका बदलेगा। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केवल दफ्तरों में बैठकर योजनाओं की समीक्षा न करें, बल्कि गांव-गांव जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी सीधे जनता से संवाद स्थापित करें और समस्याओं का समाधान मौके पर ही करें।उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी लापरवाही बरतता है या योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय और जवाबदेह बनाने की बात उन्होंने दोहराई।
सिस्टम की खामियों पर खुलकर बोले
पत्रकार वार्ता के दौरान कलेक्टर यादव ने जिले की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार के परिणाम अपेक्षित थे, वैसा कार्य नहीं हुआ है। उन्होंने संकेत दिए कि कई विभागों में कार्यप्रणाली सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दमोह जिला कई मामलों में पीछे रह गया है, जिसे अब तेजी से सुधारना होगा।
उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार उनकी नाराजगी किन व्यवस्थाओं और विभागों को लेकर है।
जनहित योजनाओं की प्रभावशीलता पर जोर
कलेक्टर यादव ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण अभियान, बीपीएल कार्ड, राशन वितरण व्यवस्था और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र हितग्राही को उसका अधिकार नहीं मिल रहा है, तो यह प्रशासन की विफलता मानी जाएगी। इसलिए सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि योजनाएं केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में दिखाई दें।
“बॉटम से टॉप-10” में लाने की चुनौती
कलेक्टर यादव ने स्वीकार किया कि वर्तमान में दमोह जिला कई विकास सूचकांकों—जैसे मातृ मृत्यु दर, टीकाकरण और सीएम हेल्पलाइन—में प्रदेश के निचले पायदान पर है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है, लेकिन इसे अवसर के रूप में लेकर सुधार की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।
उन्होंने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि आने वाले समय में दमोह को प्रदेश के “टॉप-10” जिलों में शामिल करना उनकी प्राथमिकता होगी और इसके लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
जन्मभूमि के पास सेवा का अवसर, बताया गर्व
जब उनसे पूछा गया कि जन्मभूमि के समीप कार्य करने का अनुभव कैसा है, तो उन्होंने भावुकता के साथ कहा कि यह उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि जिले के लोगों को समय पर सेवाएं मिलें, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और विकास की गति तेज हो।उल्लेखनीय है कि कलेक्टर प्रताप नारायण यादव का संबंध टीकमगढ़ जिले से है, जो दमोह से सटा हुआ क्षेत्र है।
जनभागीदारी से ही संभव होगा विकास
कलेक्टर ने अंत में कहा कि प्रशासन अकेले विकास नहीं कर सकता, इसके लिए जनता, जनप्रतिनिधियों और मीडिया का सहयोग जरूरी है। उन्होंने सभी से सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की और कहा कि यदि सभी मिलकर प्रयास करेंगे, तो दमोह को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया जा सकता है।
