320 चिकित्सक एकजुट, IMA भी समर्थन में उतरा; 24 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
(डॉ. एल.एन.वैष्णव)
दमोह/हटा, 15 सितंबर। हटा सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के साथ हुई कथित मारपीट और अभद्रता की घटना अब पूरे जिले के चिकित्सा जगत में आक्रोश का कारण बन गई है। घटना के विरोध में मंगलवार 15 सितंबर को दमोह जिले के शासकीय चिकित्सक काली पट्टी बांधकर अपनी सेवाएं देते नजर आए। चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों के उपचार और अपनी जिम्मेदारी से वे पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों के साथ होने वाली हिंसा को किसी भी स्थिति में सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
घटना को लेकर शासकीय चिकित्सकों ने SDOP हटा को ज्ञापन सौंपकर आरोपी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है। इसके साथ ही मामले की जानकारी दमोह कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा मध्यप्रदेश शासकीय चिकित्सक संघ भोपाल को भी भेजी गई है।
सवाल—अस्पताल में डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं तो व्यवस्था कैसे सुरक्षित?
चिकित्सकों का आक्रोश इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि अस्पताल वह स्थान है जहां डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी गंभीर परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाने का काम करते हैं। दिन-रात ड्यूटी करने वाले चिकित्सकों के साथ यदि अस्पताल परिसर में ही अभद्रता या मारपीट की स्थिति बनती है तो अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।चिकित्सकों का कहना है कि मरीज और उनके परिजन किसी भी परेशानी की स्थिति में अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन कानून हाथ में लेने और चिकित्सक के साथ हिंसा करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
170 शासकीय चिकित्सक काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध

मामले की जानकारी देते हुए डॉ. विशाल शुक्ला एवं डॉ. दिवाकर पटेल ने बताया कि दमोह जिले के शासकीय चिकित्सालयों में लगभग 170 चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। घटना के विरोध में सभी चिकित्सक काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध मरीजों के उपचार को प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं है। चिकित्सक अपनी नियमित सेवाएं देते हुए शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि यह काली पट्टी प्रशासन और समाज को यह संदेश देने का माध्यम है कि चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर अब गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है।
IMA भी आया समर्थन में, निजी चिकित्सक भी मैदान में
हटा की घटना का असर शासकीय अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भी चिकित्सकों के समर्थन में आगे आया है। जिले के लगभग डेढ़ सौ निजी चिकित्सक भी अपने-अपने निजी चिकित्सालयों और क्लीनिकों में काली पट्टी बांधकर मरीजों का उपचार करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं।इस तरह शासकीय और निजी क्षेत्र को मिलाकर दमोह जिले में करीब 320 चिकित्सकों के इस विरोध से जुड़ने की बात सामने आ रही है। यह संख्या बताती है कि घटना को लेकर चिकित्सा समुदाय में नाराजगी कितनी व्यापक है।
ज्ञापन के साथ प्रशासन को साफ संदेश
चिकित्सक संघ द्वारा SDOP हटा को ज्ञापन सौंपने के साथ ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दमोह तथा मध्यप्रदेश शासकीय चिकित्सक संघ भोपाल को भी घटना की जानकारी भेजी गई है। चिकित्सकों ने कार्रवाई की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि मामले को केवल सामान्य विवाद मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा।चिकित्सकों का कहना है कि यदि ड्यूटी के दौरान किसी चिकित्सक के साथ हिंसा होती है और उसके बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो इससे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के मनोबल पर सीधा असर पड़ता है।
24 घंटे का अल्टीमेटम, अब प्रशासन की परीक्षा
चिकित्सक संघ ने आरोपी के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई के लिए 24 घंटे की समय-सीमा तय की है। यदि इस अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।चिकित्सकों की चेतावनी के बाद अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। फिलहाल डॉक्टर काली पट्टी बांधकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं, लेकिन यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध का दायरा बढ़ सकता है।
एक घटना ने खड़े किए कई बड़े सवाल
हटा की घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अस्पतालों में चिकित्सकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है? क्या रात और आपातकालीन ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं? और सबसे बड़ा सवाल—यदि किसी चिकित्सक के साथ ड्यूटी के दौरान हिंसा होती है तो उस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?फिलहाल चिकित्सकों का विरोध शांतिपूर्ण है और मरीजों का उपचार जारी है। लेकिन काली पट्टी के पीछे छिपा आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। 24 घंटे की समय-सीमा के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह आने वाला समय तय करेगा। यदि कार्रवाई नहीं हुई तो हटा की घटना से शुरू हुआ विरोध पूरे जिले में बड़ा आंदोलन बन सकता है।
