233 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को प्रदान की गईं उपाधियां, उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदक से किया सम्मानित
दमोह। एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह का प्रथम दीक्षांत समारोह 5 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय एवं भव्य वातावरण में आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के लिए यह अवसर ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण रहा, जब विभिन्न संकायों के शोधार्थियों, स्नातकोत्तर एवं स्नातक विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए उपाधियां एवं पदक प्रदान किए गए। समारोह में विभिन्न राज्यों से आए उपाधि प्राप्तकर्ताओं, उनके अभिभावकों, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, विभागाध्यक्षों, विद्यार्थियों, गणमान्य नागरिकों एवं मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व वित्त मंत्री मध्यप्रदेश शासन एवं दमोह विधायक जयंत मलैया उपस्थित रहे। मुख्य संरक्षक के रूप में संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मस्व विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेंद्र सिंह लोधी तथा आनंद विभाग के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार मौजूद रहे। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति प्रोफेसर खेम सिंह डेहरिया, एकलव्य विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया, प्रति कुलाधिपति पूजा मलैया, रति मलैया, आरुष महाराज, ओजस्विनी समदर्शी न्यास के उपाध्यक्ष विवेक शैंडेय, कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार जैन, कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा, मुख्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. प्रकाश खंपरिया, अधिष्ठाता अकादमिक डॉ. शमा जे.पी. खानम तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. शैलेन्द्र जैन सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
शैक्षणिक शोभायात्रा से हुआ समारोह का शुभारंभ
प्रथम दीक्षांत समारोह का शुभारंभ भव्य शैक्षणिक शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा के पश्चात राष्ट्रगीत वंदेमातरम् से सभागार गुंजायमान हो उठा। अतिथियों का स्वागत साल, श्रीफल, तुलसी का पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।स्वागत उद्बोधन के साथ विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पवन कुमार जैन ने प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एकलव्य विश्वविद्यालय में वर्तमान में 134 शैक्षणिक विधाओं में डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
शिक्षा के साथ संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व पर जोर
कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया ने अपने प्रबोधन में प्रथम दीक्षांत समारोह को विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह नहीं है, बल्कि उस संकल्प और स्वप्न के साकार होने का अवसर है, जिसमें ज्ञान के साथ संस्कार, शिक्षा के साथ कौशल तथा प्रतिभा के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने वाले विद्यार्थियों को तैयार करने की कल्पना की गई थी।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास रहा है कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थी व्यावहारिक एवं प्रायोगिक शिक्षा प्राप्त करें और अपने ज्ञान का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के विकास में करें।इसके बाद कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा ने दीक्षांत समारोह प्रारंभ करने का अनुरोध किया। कुलाधिपति ने औपचारिक रूप से समारोह प्रारंभ करने की घोषणा की।
उपाधि प्राप्तकर्ताओं को दिलाई गई शपथ
दीक्षांत समारोह के दौरान सभी स्नातकों को मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र सिंह लोधी ने शपथ दिलाई। विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान, शिक्षा एवं अर्जित कौशल का उपयोग राष्ट्र और समाज के हित में करने का संकल्प लिया।इसके बाद राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान के सम्मानस्वरूप दो मानद उपाधियां प्रदान की गईं। मुनिश्री आदित्य सागर महाराज एवं ब्रह्मचारी संदीप सरल को मानद पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदक
समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों एवं संकायों के पात्र विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर स्वर्ण एवं रजत पदक प्रदान किए गए। विज्ञान संकाय में विजय कुमार मलैया सर्वश्रेष्ठ स्वर्ण पदक मोनिका ठाकुर को प्रदान किया गया, जबकि कला संकाय में जयंत कुमार मलैया सर्वश्रेष्ठ स्वर्ण पदक नानगा राम को प्रदान किया गया।सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर डॉ. सुधा मलैया बहुमुखी उत्कृष्टता की रनिंग शील्ड सतेंद्र यादव को प्रदान की गई। कुलाधिपति स्वर्ण पदक सुप्रिया कुमारी को प्रदान किया गया। इसके साथ ही विभिन्न संकायों में अकादमिक उत्कृष्टता के आधार पर विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदकों से सम्मानित किया गया।
233 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
दीक्षांत समारोह का सबसे महत्वपूर्ण चरण विभिन्न संकायों में पीएचडी, स्नातकोत्तर एवं स्नातक पाठ्यक्रम पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने का रहा। समारोह में कुल 233 शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। जो विद्यार्थी समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, उन्हें उनकी अनुपस्थिति में उपाधि प्रदान किए जाने की घोषणा की गई।उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्साह और गौरव का भाव दिखाई दिया। अभिभावकों ने भी इस अवसर को अपने बच्चों की शैक्षणिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा।
राष्ट्रहित में शोध को बढ़ावा देने पर जोर
ओजस्विनी समदर्शी न्यास के उपाध्यक्ष विवेक शैंडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र को केंद्र में रखकर शोध के क्षेत्र में और अधिक सक्रियता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि देश और समाज के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान में भी उसकी भूमिका होनी चाहिए।मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति प्रोफेसर खेम सिंह डेहरिया ने प्रथम दीक्षांत समारोह को अत्यंत गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि सत्य, प्रेम और करुणा को जीवन में अपनाने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर नवाचार की आवश्यकता है।आरुष महाराज ने अपने प्रबोधन में कहा कि भारत की परंपरा में शिक्षांत नहीं बल्कि दीक्षांत होता है। दीक्षांत की अवधारणा व्यक्ति को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे अपने संस्कार, संस्कृति और सामाजिक दायित्व से जोड़ती है।
शिक्षा के साथ संस्कार भारतीय समाज की पहचान : जयंत मलैया
मुख्य अतिथि जयंत मलैया ने अपने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कारों को जीवन में उतारने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, लेकिन संस्कार उसके व्यक्तित्व को दिशा देते हैं। भारतीय समाज की पहचान उसकी संस्कृति और संस्कारों से रही है, इसलिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए।उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करेंगे।
कुलाधिपति ने बताया गौरव का क्षण
कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया ने कहा कि प्रथम दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा और कौशल का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के विकास में करेंगे।प्रति कुलाधिपति पूजा मलैया एवं रति मलैया ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।
आभार के साथ हुआ समारोह का समापन
समारोह के अंत में कुलसचिव डॉ. प्रफुल्ल शर्मा ने सभी अतिथियों, उपाधि प्राप्तकर्ताओं, अभिभावकों, विश्वविद्यालय परिवार एवं आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इसके बाद कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया ने प्रथम दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की। समारोह के समापन अवसर पर सभी उपस्थितजन अपने स्थान पर खड़े हुए और सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
समारोह का मंच संचालन लेफ्टिनेंट डॉ. हृदय नारायण तिवारी ने किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर विभिन्न राज्यों से आए उपाधि प्राप्तकर्ता एवं उनके अभिभावक, गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्रमुख, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।एकलव्य विश्वविद्यालय का यह प्रथम दीक्षांत समारोह केवल विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान करने का अवसर नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, संस्कार, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध, कौशल और राष्ट्र के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ जोड़ने वाले विश्वविद्यालय के संकल्प का भी सार्वजनिक रूप से उद्घोष बना।
