बांदकपुर मंदिर की जमीन पर पेट्रोल पंप का विवाद गहराया, कमेटी के पत्र से लेकर कथित प्रवक्ता की भूमिका तक उठे कई सवाल
कलेक्टर को सौंपे गए बताए जा रहे पत्र की प्रति सार्वजनिक नहीं, मंदिर परिसर में ‘ज्योतिष आचार्य’ के बोर्ड की भी चर्चा; पेट्रोल पंप संचालक एवं वर्तमान सरपंच से जुड़े कथित आपराधिक प्रकरणों की सूची वाला पत्र वायरल होने की जानकारी
लीज समाप्ति के बाद भूमि खाली कराने की मांग, लेकिन अनुबंध, कमेटी के अधिकृत निर्णय और संबंधित पक्षों के दावों की पुष्टि जरूरी; जागेश्वरनाथ धाम के विकास के बीच पारदर्शिता का प्रश्न
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह, गुरुवार 15 अक्टूबर 2026/बुंदेलखंड की आस्था के प्रमुख केंद्र बांदकपुर स्थित भगवान जागेश्वरनाथ मंदिर की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप को लेकर उठे विवाद ने अब कई नए सवालों को जन्म दे दिया है। मामला केवल पेट्रोल पंप की लीज समाप्त होने और भूमि खाली कराने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर कमेटी के पत्राचार, उसके अधिकृत प्रतिनिधित्व, मंदिर परिसर में कक्षों के उपयोग और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक कथित आपराधिक प्रकरणों की सूची वाले पत्र को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एक समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार मंदिर न्यास की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप की लीज अवधि 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके बाद भी भूमि खाली नहीं किए जाने का दावा करते हुए कलेक्टर दमोह से हस्तक्षेप की मांग की गई है। हालांकि इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मंदिर कमेटी द्वारा हाल ही में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को सौंपे गए बताए जा रहे पत्र की प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि पत्र में किन तथ्यों, दस्तावेजों और मांगों का उल्लेख किया गया है तथा कमेटी की ओर से यह पत्र किस अधिकृत निर्णय के आधार पर भेजा गया है।
20 वर्ष की लीज समाप्त होने का दावा, भूमि पर पेट्रोल पंप का संचालन बना विवाद का केंद्र
प्रकाशित जानकारी के अनुसार बांदकपुर स्थित मंदिर न्यास के स्वामित्व वाली खसरा क्रमांक 16/1 की भूमि पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से संबंधित पेट्रोल पंप संचालित किया जा रहा है। बताया गया है कि उक्त भूमि लगभग 20 वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराई गई थी, जिसकी अवधि 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई।मंदिर प्रबंधन की ओर से सामने आई जानकारी में कहा गया है कि संबंधित पेट्रोल पंप संचालक और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के जबलपुर कार्यालय को जनवरी 2026 में ही अनुबंध समाप्त होने की सूचना दे दी गई थी। इसके बाद सितंबर में भी पंजीकृत डाक के माध्यम से पत्राचार किए जाने का उल्लेख सामने आया है।
यह भी बताया गया है कि पेट्रोल पंप संचालक की ओर से लीज अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन मंदिर न्यास ने भूमि की भविष्य में आवश्यकता बताते हुए इसे स्वीकार नहीं किया।हालांकि मूल अनुबंध, लीज नवीनीकरण की शर्तें, कमेटी के प्रस्ताव और संबंधित पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां सामने आने के बाद ही विवाद की वास्तविक कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।लीज समाप्त होने का दावा अपने आप में किसी व्यक्ति के कब्जे को अवैध प्रमाणित नहीं करता। इसके लिए अनुबंध की शर्तों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
कलेक्टर को पत्र देने की बात सामने आई, लेकिन सार्वजनिक क्यों नहीं हुई प्रति?
इस पूरे मामले में मंदिर कमेटी के पत्राचार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे जाने और पेट्रोल पंप की मशीनरी हटाने की मांग का उल्लेख किया गया है। लेकिन उक्त पत्र की प्रति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होने के कारण उसमें दर्ज वास्तविक मांगों और संलग्न दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या मंदिर कमेटी ने इस संबंध में विधिवत बैठक आयोजित कर प्रस्ताव पारित किया था? क्या पत्र पर अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं? क्या पूर्व में भेजे गए नोटिस और लीज अनुबंध की प्रतियां भी प्रशासन को उपलब्ध कराई गई हैं?ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर संबंधित दस्तावेजों से ही मिल सकता है।हालांकि किसी संस्था द्वारा प्रशासन को दिया गया प्रत्येक पत्र सार्वजनिक करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होता, लेकिन मंदिर जैसी सार्वजनिक आस्था से जुड़ी संस्था के महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना आवश्यक माना जा रहा है।
मंदिर कमेटी का प्रवक्ता कौन? परिसर में ‘ज्योतिष आचार्य’ के बोर्ड को लेकर भी चर्चा
इस विवाद के बीच मंदिर कमेटी के प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं सामने आ रही हैं।एक समाचार पत्र में जिस व्यक्ति का नाम मंदिर कमेटी के प्रवक्ता के रूप में प्रकाशित हुआ है, उसके संबंध में सूत्रों का कहना है कि मंदिर परिसर में ही एक कक्ष पर ‘ज्योतिष आचार्य’ का बोर्ड लगा हुआ है।हालांकि संबंधित कक्ष का आवंटन किस आधार पर हुआ, उसका वास्तविक उपयोग क्या है और उक्त व्यक्ति को मंदिर कमेटी की ओर से प्रवक्ता के रूप में क्या अधिकार दिए गए हैं, इसकी अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित व्यक्ति को कमेटी ने विधिवत प्रवक्ता नियुक्त किया है? यदि हां, तो क्या इसका कोई लिखित प्रस्ताव अथवा अधिकृत आदेश है? मंदिर परिसर में जिस कक्ष पर ज्योतिष आचार्य का बोर्ड होने की चर्चा है, उसके उपयोग के लिए क्या कोई निर्धारित व्यवस्था है?यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मंदिर परिसर में ज्योतिष संबंधी कार्य करना अथवा किसी कक्ष पर इस प्रकार का बोर्ड लगा होना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसी प्रकार किसी नियुक्ति का दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होने से संबंधित व्यक्ति को अनधिकृत भी नहीं माना जा सकता।
लेकिन जब मंदिर की संपत्ति, उसके उपयोग और कमेटी के निर्णयों को लेकर सार्वजनिक विवाद सामने आ रहा हो, तब संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका और अधिकृत स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।अब यह मंदिर कमेटी को स्पष्ट करना है कि वास्तविक स्थिति क्या है और चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।
पेट्रोल पंप संचालक एवं वर्तमान सरपंच से जुड़े कथित आपराधिक मामलों की सूची वाला पत्र भी चर्चा में
भूमि विवाद के बीच एक अन्य संवेदनशील विषय सामने आया है। स्थानीय स्तर पर एक पत्र वायरल होने की जानकारी मिल रही है, जिसमें पेट्रोल पंप संचालक एवं वर्तमान सरपंच से संबंधित एक दर्जन से अधिक कथित गंभीर आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख बताया जा रहा है।हालांकि इस पत्र की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज प्रकरणों के वास्तविक विवरण, संबंधित पुलिस थानों, न्यायालयों और मामलों की वर्तमान कानूनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी अधिकृत अभिलेखों से स्पष्ट होना आवश्यक है कि वायरल पत्र में उल्लिखित व्यक्ति और पेट्रोल पंप संचालन से संबंधित व्यक्ति की पहचान एवं भूमिका क्या है।सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कथित सूची में दर्ज मामले केवल शिकायतों से संबंधित हैं, पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी हैं, न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण हैं अथवा किसी मामले में दोषसिद्धि हुई है?
किसी व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत अथवा आपराधिक प्रकरण दर्ज होना उसे दोषी सिद्ध नहीं करता। न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि होने तक संबंधित व्यक्ति को कानून के अनुसार निर्दोष माना जाता है।इसलिए वायरल पत्र में उल्लिखित आरोपों को बिना आधिकारिक पुष्टि के तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि उक्त पत्र किसने तैयार किया, किस उद्देश्य से प्रसारित किया गया और उसका वर्तमान भूमि विवाद से कोई प्रत्यक्ष संबंध है भी अथवा नहीं।
कॉरिडोर निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार में भूमि की आवश्यकता
बांदकपुर स्थित भगवान जागेश्वरनाथ धाम बुंदेलखंड के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन होता है, जबकि सावन और विशेष धार्मिक पर्वों के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।मंदिर परिसर के आसपास पार्किंग, धर्मशाला, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालुओं के विश्राम और अन्य सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
मंदिर प्रबंधन की ओर से संबंधित भूमि को भविष्य के विकास कार्यों के लिए आवश्यक बताए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रस्तावित कार्यों के लिए कौन-सी योजना तैयार की गई है और क्या संबंधित विभागों से कोई स्वीकृति प्राप्त हुई है।यदि मंदिर न्यास की भूमि का उपयोग सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रस्तावित है, तो इसकी अधिकृत कार्ययोजना सामने आने से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को वास्तविक स्थिति समझने में सहायता मिलेगी।
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी अधूरी, प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण
बांदकपुर मंदिर के आसपास अतिक्रमण को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। प्रकाशित जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग द्वारा पूर्व में कुछ स्थानों पर नोटिस जारी किए जाने और अतिक्रमण चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है।इसके बावजूद संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।क्या सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है? क्या संबंधित पक्षों ने किसी न्यायालय में चुनौती दी है? क्या कोई स्थगन आदेश प्रभावी है? और यदि अतिक्रमण विधिवत प्रमाणित हो चुका है, तो उसे हटाने में विलंब का कारण क्या है?
इन प्रश्नों का समाधान प्रशासनिक अभिलेखों और संबंधित विभागों के अधिकृत जवाब से ही संभव है।
मंदिर कमेटी, पेट्रोल पंप संचालक और कंपनी का पक्ष सामने आना जरूरी
इस पूरे प्रकरण में एकतरफा जानकारी के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।मंदिर कमेटी से अपेक्षा है कि वह लीज अनुबंध, पत्राचार, संबंधित प्रस्ताव और प्रवक्ता की अधिकृत स्थिति स्पष्ट करे। वहीं पेट्रोल पंप संचालक तथा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।क्या कंपनी को अनुबंध समाप्ति की सूचना प्राप्त हुई थी? क्या नवीनीकरण के लिए कोई वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई? क्या भूमि खाली करने के संबंध में कोई विवाद न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित है?
इन सवालों के उत्तर महत्वपूर्ण हैं।
इसी प्रकार कथित आपराधिक प्रकरणों की सूची वाले वायरल पत्र की सत्यता भी पुलिस एवं न्यायालय के अधिकृत अभिलेखों से जांची जानी चाहिए, ताकि अपुष्ट आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित न हो।
आस्था के केंद्र में पारदर्शिता की अपेक्षा, अब जवाब किसके पास?
बांदकपुर स्थित भगवान जागेश्वरनाथ धाम की पहचान लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ी है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के प्रबंधन, संपत्ति और विकास कार्यों को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया से होना चाहिए।एक ओर मंदिर कमेटी के नाम से पेट्रोल पंप की भूमि खाली कराने की मांग सामने आई है, दूसरी ओर कलेक्टर को दिए गए बताए जा रहे पत्र की प्रति सार्वजनिक नहीं है। इसी बीच कमेटी के कथित प्रवक्ता की भूमिका, मंदिर परिसर में ‘ज्योतिष आचार्य’ के बोर्ड की चर्चा और एक कथित आपराधिक प्रकरणों की सूची वाला वायरल पत्र भी स्थानीय चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
इन सभी विषयों की प्रकृति अलग-अलग है। इसलिए किसी एक विवाद के आधार पर दूसरे विषय में अनियमितता या अपराध का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।लेकिन इतना अवश्य है कि मंदिर कमेटी, संबंधित कंपनी, पेट्रोल पंप संचालक और जिला प्रशासन की ओर से अधिकृत जानकारी सामने आने पर अनेक प्रश्नों का समाधान हो सकता है।अब देखना यह होगा कि मंदिर कमेटी अपने पत्राचार और प्रतिनिधित्व की स्थिति कब स्पष्ट करती है, पेट्रोल पंप संचालक तथा संबंधित कंपनी क्या पक्ष रखते हैं और जिला प्रशासन भूमि विवाद के विधिसम्मत समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है।बांदकपुर धाम के विकास की राह में वास्तविक बाधाएं क्या हैं और उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी किसकी है, इसका उत्तर आरोपों या चर्चाओं से नहीं, बल्कि प्रमाणित दस्तावेजों और निष्पक्ष कार्रवाई से ही मिल सकेगा।
