इंदौर में जघन्य एवं चिन्हित प्रकरण में न्यायालय का फैसला, चाकू से हमला कर की गई थी हत्या
इंदौर, 27 अक्टूबर 2026। इंदौर में पुरानी रंजिश के चलते निखिल खलसे की हत्या के मामले में न्यायालय ने पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की अदालत ने थाना हीरानगर से संबंधित सत्र प्रकरण क्रमांक एसटी 663/2023 में फैसला सुनाते हुए आरोपियों को भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं तथा आयुध अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जघन्य एवं चिन्हित प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था।
उपनिदेशक अभियोजन आशीष खरे के अनुसार, न्यायालय ने हर्ष उर्फ सीनू चौधरी (23), शिव सिंह उर्फ लालू भदौरिया (29), चिराग कटारिया (25), विशाल उर्फ विस्सू पवार (23) और रोहित धनगर (22), सभी निवासी इंदौर, को भारतीय दंड विधान की धारा 302 सहपठित धारा 149 के तहत आजीवन कारावास से दंडित किया है। इसके अतिरिक्त धारा 148 के तहत तीन वर्ष का सश्रम कारावास तथा धारा 147 और आयुध अधिनियम की धारा 25(1-बी)(बी) के तहत दो-दो वर्ष का सश्रम कारावास सुनाया गया है। सभी आरोपियों पर 9,000-9,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
मोटरसाइकिलों से पहुंचे आरोपियों ने किया था हमला
अभियोजन के अनुसार, घटना 9 मई 2023 की शाम करीब सात बजे की है। फरियादी मोहित शिंदे ने थाना हीरानगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह भंडारी अस्पताल के मेडिक्लेम विभाग में कार्यरत है। घटना के समय वह अपने घर के नीचे निखिल खलसे के साथ खड़ा था। इसी दौरान मोटरसाइकिलों से कुछ लोग वहां पहुंचे और निखिल पर अर्पित खटे की हत्या के आरोपियों की मदद करने का आरोप लगाते हुए उसे जान से मारने की धमकी दी।
आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने चाकू निकालकर निखिल खलसे पर हमला कर दिया। हमले में निखिल के कंधे और पीठ पर चोटें आईं। जान बचाने के लिए निखिल वहां से भागा, लेकिन हमलावर उसका पीछा करते हुए दीवाने ऑटो पार्ट्स नामक दुकान तक पहुंच गए।अभियोजन के मुताबिक, दुकान के भीतर निखिल पर चाकू से सिर पर वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। बाद में उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
विवेचना के बाद न्यायालय में पेश किया गया चालान
घटना की रिपोर्ट के आधार पर थाना हीरानगर में अपराध क्रमांक 347/2023 के तहत हत्या सहित अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। जांच के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया, साक्षियों के कथन दर्ज किए गए और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। घटना में प्रयुक्त चाकू भी जब्त किए गए। विवेचना के दौरान भारतीय दंड विधान की धारा 120-बी तथा आयुध अधिनियम की धाराएं 25 और 27 भी जोड़ी गईं। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया, जबकि दो बाल अपचारियों के विरुद्ध पृथक प्रकरण किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन के 13 साक्षियों के बयान कराए गए
अभियोजन के अनुसार, प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी नियमित समीक्षा की गई। मामले के विभिन्न पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया तथा अभियोजन की ओर से कुल 13 साक्षियों के बयान कराए गए। अभियोजन के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेन्द्र सिंह वास्केल ने पैरवी की।
