घंटाघर से बस स्टैंड, बड़ापुल, कचौरा बाजार, अस्पताल मार्ग और कलेक्ट्रेट रोड तक अतिक्रमण का जाल, हर कदम पर हादसे का खतरा
दमोह / शहर की सड़कें अब केवल वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी चुनौती बनती जा रही हैं। शहर में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए फुटपाथ आज अपने मूल उद्देश्य से भटक चुके हैं। जिन फुटपाथों का निर्माण पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए किया गया था, वे अब दुकानों, हाथ ठेलों, अस्थायी व्यवसायों, पार्किंग और अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। नतीजा यह है कि बुजुर्ग, महिलाएं, स्कूली बच्चे और दिव्यांगजन तक सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जहां हर पल दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है।
शहर के हृदय स्थल घंटाघर से लेकर बस स्टैंड, कचौरा बाजार, बड़ापुल, एवरेस्ट तिराहा, जिला अस्पताल मार्ग, पलंदी चौराहा, बैंक चौराहा, स्टेशन मार्ग और कलेक्ट्रेट मार्ग तक शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो, जहां फुटपाथ अपने वास्तविक स्वरूप में दिखाई देता हो। अधिकांश स्थानों पर दुकानदारों ने अपना सामान फुटपाथ तक फैला रखा है, जबकि कई जगह फल-सब्जी, चाट-फुल्की और अन्य हाथ ठेले स्थायी रूप से खड़े हैं।
फुटपाथ गायब, सड़क बनी पैदल यात्रियों का रास्ता

शुक्रवार दोपहर शहर के प्रमुख मार्गों का जायजा लेने पर स्थिति चिंताजनक दिखाई दी। घंटाघर से निकलने वाले लगभग सभी मार्गों पर फुटपाथ पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं। पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान पर कहीं दुकानें हैं तो कहीं हाथ ठेले, कहीं दोपहिया वाहन खड़े हैं तो कहीं व्यापारियों ने अपना सामान सड़क तक फैला रखा है।
ऐसी स्थिति में लोगों के सामने सड़क पर चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यही कारण है कि कई बार वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के बीच टकराव की स्थिति बन जाती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
बड़ापुल मार्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
घंटाघर से बड़ापुल जाने वाला मार्ग सबसे अधिक प्रभावित नजर आया। सड़क के दोनों किनारों पर अतिक्रमण के कारण लगभग 8 से 10 फीट तक का हिस्सा कब्जे में है। इससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। दो वाहन आमने-सामने आने पर जाम लग जाता है और पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बचती।
कचौरा बाजार और घंटाघर में हर दिन बनते हैं जाम के हालात
घंटाघर से कचौरा बाजार तक का मार्ग पूरे दिन व्यस्त रहता है। यहां दुकानदारों द्वारा सामान बाहर तक रखने और हाथ ठेलों की कतार लगने से फुटपाथ पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। शाम के समय खरीदारी के दौरान यहां पैदल चलना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार लोगों को वाहनों के बीच से निकलना पड़ता है।
एवरेस्ट तिराहा से केप्टन लॉज तक भी कब्जा
एवरेस्ट तिराहा से केप्टन लॉज तक अधिकांश दुकानों ने अपनी सामग्री सड़क तक फैला रखी है। सड़क का उपयोग व्यापारिक गतिविधियों के लिए होने लगा है, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। यहां भी पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं है।
जिला अस्पताल मार्ग पर मरीजों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
जिला अस्पताल से पलंदी चौराहा मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज, परिजन और बुजुर्ग आते-जाते हैं। लेकिन यहां भी फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं। मरीजों और वृद्धजनों को वाहनों के बीच चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
एचडीएफसी बैंक के सामने आधी सड़क पर पार्किंग
टंडन बगीचा स्थित एचडीएफसी बैंक के सामने स्थिति और भी गंभीर है। यहां आधी सड़क पर वाहनों की पार्किंग रहती है, जबकि इसी मार्ग से बसों का भी आवागमन होता है। सड़क संकरी होने के कारण बस, कार, बाइक और पैदल यात्री एक साथ गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
कलेक्ट्रेट मार्ग भी अतिक्रमण से अछूता नहीं
कलेक्ट्रेट से जबलपुर नाका पुलिस चौकी तक भी फुटपाथ लगभग गायब हो चुके हैं। सड़क किनारे हाथ ठेलों और अस्थायी दुकानों का कब्जा है। शाम के समय यहां पैदल चलना बेहद कठिन हो जाता है।
रोजगार भी जरूरी, लेकिन शहर की व्यवस्था भी

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि फुटपाथों पर व्यवसाय करने वाले लोगों का रोजगार भी महत्वपूर्ण है। हजारों परिवार हाथ ठेलों और छोटे व्यवसायों से अपनी आजीविका चलाते हैं। इसलिए केवल अतिक्रमण हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
लोगों का सुझाव है कि नगर पालिका शहर में स्थायी वेंडिंग जोन विकसित करे, जहां फुटकर व्यापारी और हाथ ठेला संचालक व्यवस्थित रूप से अपना व्यवसाय कर सकें। इससे एक ओर उनका रोजगार सुरक्षित रहेगा, वहीं दूसरी ओर फुटपाथ आम नागरिकों के लिए मुक्त हो जाएंगे और यातायात व्यवस्था भी सुधरेगी।
अभियान चलता है, लेकिन अतिक्रमण फिर लौट आता है
कुछ दिन पहले नगर पालिका ने घंटाघर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। प्रशासन ने फुटकर दुकानदारों और हाथ ठेलों को हटाया भी, लेकिन अगले ही दिन अधिकांश अतिक्रमण फिर से उसी स्थान पर दिखाई देने लगे। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल औपचारिक कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव है, या इसके लिए स्थायी रणनीति और नियमित निगरानी की आवश्यकता है।
जनता पूछ रही है—फुटपाथ नहीं तो चलें कहां?
शहरवासियों का कहना है कि यदि फुटपाथ ही अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाएंगे तो पैदल यात्री आखिर कहां चलेंगे? सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को होती है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि शहर के सभी प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कर फुटपाथों को उनके मूल उद्देश्य के लिए बहाल किया जाए।
सीएमओ ने दिया कार्रवाई का भरोसा
नगर पालिका परिषद दमोह के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि शहर में अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। हाल ही में घंटाघर क्षेत्र में भी कार्रवाई की गई थी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विशेष अभियान चलाकर शहर के फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल
दमोह शहर विकास की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यदि पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथ ही अतिक्रमण में खो जाएं, तो यह केवल यातायात की समस्या नहीं बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा का भी गंभीर विषय है। अब निगाहें जिला प्रशासन और नगर पालिका की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या शहर के फुटपाथ वास्तव में आम जनता को वापस मिल पाएंगे या फिर वे अतिक्रमण के साये में ही दबे रहेंगे।
