सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बड़ी राहत: पीएम राहत योजना पर दमोह में पत्रकार वार्ता
डेढ़ लाख रुपए तक कैशलेस इलाज, मदद करने वाले को ‘राहवीर योजना’ में 25 हजार का इनाम
(डॉ एल एन वैष्णव)
दमोह/ जिला मुख्यालय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों के लिए शुरू की गई पीएम राहत योजना (PM RAHAT) के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान और सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने योजना के प्रावधानों और लाभों से पत्रकारों को अवगत कराया तथा उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
अधिकारियों ने बताया कि पीएम राहत योजना फरवरी 2026 में शुरू की गई एक नई केंद्रीय योजना है, जिसके तहत सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को देशभर में ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना दुर्घटना के बाद 7 दिनों तक अस्पताल में भर्ती और उपचार का खर्च कवर करती है, ताकि घायल व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके और उसकी जान बचाई जा सके।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को मोटर से चलने वाले वाहन—चाहे वह दोपहिया, चारपहिया या अन्य मोटर वाहन हो—से दुर्घटना में चोट लगती है, तो उसे नजदीकी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम या पंजीकृत क्लीनिक में तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के तहत दवाइयां, जांच, ऑपरेशन सहित डेढ़ लाख रुपए तक का इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाएगा और इस सीमा तक मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि दुर्घटना की स्थिति में कोई भी नागरिक 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दे सकता है या घायल को सीधे नजदीकी अस्पताल पहुंचा सकता है, जहां उसका तत्काल इलाज शुरू किया जाएगा। अस्पतालों को उपचार का भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष से किया जाएगा और क्लेम प्रक्रिया पुलिस प्रमाणीकरण के साथ डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जाएगी।पत्रकार वार्ता में यह भी बताया गया कि ‘राहवीर योजना’ के तहत जो व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है या उसकी सूचना देता है, उसे सरकार की ओर से ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि इनाम के रूप में दी जाती है। इसका उद्देश्य लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है। यदि कोई विदेशी नागरिक भी भारत में किसी काम से आया हुआ है और यहां सड़क दुर्घटना में घायल हो जाता है, तो उसे भी इस योजना के तहत समान रूप से कैशलेस इलाज का लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही यह योजना केवल राष्ट्रीय या मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि मोहल्लों की छोटी गलियों और आंतरिक सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाएं भी इसके दायरे में शामिल हैं।
सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने बताया कि यदि कोई नर्सिंग होम, पंजीकृत अस्पताल या क्लीनिक दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से मना करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उस पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।उन्होंने बताया कि इस योजना की शुरुआत हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की गई है, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन ऑवर में तत्काल उपचार उपलब्ध कराना और समय पर इलाज के अभाव में होने वाली मौतों को कम करना है।पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य संबंधित लोग भी उपस्थित रहे।
