देवर्षि नारद जयंती पर इंदौर में चिंतन, बोले—स्वबोध के अभाव ने राष्ट्र को बार-बार किया कमजोर
रिपोर्ट : आचार्य नारायण वैष्णव
इन्दौर, 3 मई/राष्ट्र जीवन के समक्ष खड़ी वैचारिक चुनौतियों, सांस्कृतिक आत्मविस्मृति और समाज में बढ़ती मानसिक पराजय की प्रवृत्ति के बीच मीडिया को अब केवल घटनाओं का द्रष्टा नहीं, बल्कि जनजागरण का सक्रिय वाहक बनना होगा। वर्तमान समय बौद्धिक संग्राम का है और इस संग्राम में पत्रकारिता की भूमिका निर्णायक है। मीडिया को समाज की सोई हुई चेतना को झकझोर कर उसके भीतर छिपी शक्ति, आत्मगौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान का पुनर्स्मरण कराना होगा।
यह विचार वरिष्ठ राष्ट्रीय पत्रकार, राष्ट्रवाणी चैनल के एडिटर-इन-चीफ एवं एडिटर्स क्लब ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने रविवार को इंदौर में आयोजित देवर्षि नारद जयंती समारोह में व्यक्त किए। कार्यक्रम में उन्होंने “भारतीय मीडिया में स्व का जागरण” विषय पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए कहा कि यदि समाज अपने स्व की पहचान खो देता है तो उसकी दिशा, दृष्टि और निर्णय क्षमता तीनों क्षीण हो जाती हैं। ऐसे समाज को बाहरी आक्रमण से पहले वैचारिक रूप से परास्त किया जाता है। इस आयोजन का समाचार स्थानीय मीडिया में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ।
विश्व संवाद केन्द्र मालवा, इंदौर प्रेस क्लब तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एसजीएसआईटीएस के गोल्डन जुबली सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, लेखक, संपादक, सोशल मीडिया प्रतिनिधि, शिक्षाविद् एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

राष्ट्र की पराजय का कारण सैन्य कमजोरी नहीं, स्वबोध का क्षरण
अपने संबोधन में श्री अग्निहोत्री ने कहा कि किसी भी सभ्यता की वास्तविक शक्ति उसके हथियारों में नहीं, बल्कि उसके आत्मबोध में निहित होती है। भारत ने विगत अनेक शताब्दियों में जितनी भी ऐतिहासिक विघटनकारी स्थितियां देखीं, उनका मूल कारण बाहरी शक्तियां कम और आंतरिक स्वचेतना का ह्रास अधिक था। हम अपने मित्र और शत्रु की पहचान करने में चूके, अपनी सांस्कृतिक जड़ों का महत्व भूल गए और धीरे-धीरे आत्मविश्वास खोते चले गए।
उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध ढंग से भारतीय इतिहास, धर्मग्रंथों और परंपराओं को काल्पनिक या मिथकीय बताकर नई पीढ़ी के मन में हीनता का बीजारोपण किया गया। परिणामस्वरूप समाज अपने गौरवशाली अतीत से विमुख होता चला गया। जब समाज अपनी जड़ों से कट जाता है, तब उसका मनोबल स्वतः कमजोर हो जाता है और वही पराजय का मार्ग प्रशस्त करता है।
मीडिया को केवल सूचना माध्यम नहीं, समाज का वैचारिक उत्प्रेरक बनना होगा
श्री अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता यदि केवल राजनीतिक बयान, दुर्घटनाएं और घटनाएं परोसने तक सीमित रह जाएगी तो वह अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी से विमुख हो जाएगी। मीडिया का दायित्व समाज के भीतर आत्मबल का संचार करना, भ्रम की धुंध हटाना और जनमानस को उसकी सभ्यतागत चेतना से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति का स्मरण कराया, उसी प्रकार पत्रकारिता को समाज को उसकी सामर्थ्य, उसके दायित्व और उसके सांस्कृतिक मूल्यों का स्मरण कराना चाहिए। समाज के मन पर पराधीनता, पराजय और आत्मसंशय की जो राख जम गई है, उसे हटाना आज मीडिया का सबसे बड़ा धर्म है।
अयोध्या, काशी, मथुरा पर हुए प्रहार भारतीय आत्मा पर हमले थे
अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि आक्रमणकारियों ने भारत के आर्थिक केन्द्रों से अधिक उसके सांस्कृतिक प्रतीकों को निशाना बनाया। अयोध्या, काशी और मथुरा पर हुए हमले किसी स्थापत्य विनाश भर की घटनाएं नहीं थीं, बल्कि भारतीय मानस को तोड़ने के प्रयास थे।
उन्होंने कहा कि यदि भारतीय समाज में स्वाभिमान और स्वबोध का ज्वार निरंतर बना रहता तो अपनी अस्मिता की पुनर्स्थापना में सदियां नहीं लगतीं। राम मंदिर का पुनर्निर्माण केवल धार्मिक घटना नहीं, बल्कि आत्मबल के पुनर्जागरण का प्रतीक है।
सनातन भारत की आत्मा है, इसे बौद्धिक रूप से समझना होगा

उन्होंने कहा कि भारत का मूल स्व सनातन है, जिसे किसी एक कालखंड, किसी एक ग्रंथ अथवा किसी एक प्रवर्तक से नहीं बांधा जा सकता। यह जीवनदृष्टि, ज्ञान परंपरा और आत्मोन्नयन का निरंतर प्रवाह है। दुर्भाग्य यह रहा कि हमने अपने नायकों, अपने ग्रंथों और अपने दार्शनिक आधारों को नई पीढ़ी के सामने उस प्रभाव के साथ प्रस्तुत नहीं किया, जिससे उनमें प्रेरणा और राष्ट्रीय गर्व का भाव पैदा हो।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज स्वयं अपने भीतर झांके, अपनी कमजोरियों को पहचाने, अतीत की भूलों से सीखे और राष्ट्र निर्माण के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आने वाला समय वैचारिक युद्ध का है और इसमें शिथिलता राष्ट्र के लिए घातक सिद्ध होगी।
देवर्षि नारद संवाद, आत्ममंथन और चेतना के प्रतीक : जयंत भिसे
कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए समाजसेवी जयंत भिसे ने कहा कि देवर्षि नारद केवल संदेशवाहक नहीं, बल्कि लोक और परलोक के बीच संवाद सेतु के रूप में पूज्य हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहर की दुनिया में समाधान खोजता है, जबकि उसके भीतर ही शांति, आत्मविश्वास और दिशा का केंद्र मौजूद है। स्वबोध का जागरण तभी संभव है जब व्यक्ति स्वयं के अंतर में उतरना सीखे।
दीप प्रज्ज्वलन, नारद स्तोत्र पाठ और सम्मानपूर्ण समापन
समारोह का शुभारंभ देवर्षि नारद एवं मां सरस्वती के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। सुश्री जाह्नवी द्वारा वंदेमातरम् की प्रस्तुति दी गई तथा पंडित माधव शर्मा ने नारद स्तोत्र का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अनुभूति निगम ने किया। आभार प्रदर्शन पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर इंदौर प्रेस क्लब के पदाधिकारी, विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि तथा शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।
