25 हजार से अधिक युवाओं, छात्र-छात्राओं, माताओं-बहनों और समाजजनों ने हाथों में तिरंगा लेकर निकाली भव्य राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से शुरू हुई यात्रा भंवरकुआ और राजीव गांधी चौराहे से होते हुए पुनः भंवरकुआ पहुंची, वंदे मातरम के सामूहिक गान के साथ हुआ समापन
( रिपोर्ट : आचार्य नारायण वैष्णव)
इंदौर। देश की आन, बान और शान तिरंगे के सम्मान तथा युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करने के उद्देश्य से इंदौर में 13 अगस्त 2026 को भव्य राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से शाम 3 बजे प्रारंभ हुई इस यात्रा में इंदौर के हजारों युवाओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ सहभागिता की। देखते ही देखते यात्रा में शामिल लोगों की संख्या हजारों में पहुंच गई और पूरा मार्ग तिरंगों से पट गया।
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा में 25 हजार से अधिक युवा छात्र-छात्राएं, माताएं-बहनें तथा विभिन्न समाजों और संगठनों से जुड़े नागरिक शामिल हुए। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। कोई तिरंगा लहराते हुए आगे बढ़ रहा था तो कोई देशभक्ति के नारों के साथ यात्रा में अपनी सहभागिता दर्ज करा रहा था। यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम सहित विभिन्न देशभक्ति नारों से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नजर आया।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से शुरू हुआ राष्ट्रभक्ति का कारवां
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा का शुभारंभ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से किया गया। निर्धारित समय शाम 3 बजे से बड़ी संख्या में युवा विश्वविद्यालय परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में एकत्रित होना शुरू हो गए थे। जैसे-जैसे यात्रा का समय नजदीक आया, युवाओं और नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।तिरंगा हाथों में लिए युवाओं की कतार जब सड़क पर आगे बढ़ी तो पूरा वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया। युवाओं के चेहरे पर उत्साह और हाथों में लहराता राष्ट्रीय ध्वज इस यात्रा की विशेष पहचान बना रहा। यात्रा में शामिल लोगों ने अनुशासन के साथ कदम से कदम मिलाकर राष्ट्रपथ पर आगे बढ़ते हुए देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और सम्मान का संदेश दिया।
विश्वविद्यालय से प्रारंभ हुई यह यात्रा भंवरकुआ की ओर आगे बढ़ी। यात्रा के दौरान सड़क के दोनों ओर मौजूद लोगों ने भी तिरंगा यात्रा का उत्साह बढ़ाया। जगह-जगह नागरिकों ने यात्रा में शामिल युवाओं का स्वागत किया और देशभक्ति के इस आयोजन को अपना समर्थन दिया।
राजीव गांधी चौराहे तक पहुंचा तिरंगा कारवां
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से प्रारंभ होकर राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा भंवरकुआ पहुंची। इसके बाद यात्रा राजीव गांधी चौराहे की ओर आगे बढ़ी। इस दौरान हजारों की संख्या में शामिल युवाओं की मौजूदगी के कारण पूरा मार्ग देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा।यात्रा के दौरान युवाओं के हाथों में तिरंगा और जुबान पर वंदे मातरम के नारे दिखाई दिए। कई युवा देशभक्ति के गीतों और नारों के साथ आगे बढ़ते नजर आए। यात्रा में शामिल छात्र-छात्राओं के साथ बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और समाजजन भी मौजूद रहे।राजीव गांधी चौराहे से यात्रा पुनः भंवरकुआ की ओर लौटी। इस पूरे मार्ग में जगह-जगह नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से स्वागत की व्यवस्था की गई थी।
पुष्प वर्षा से हुआ युवाओं का स्वागत
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा में शामिल युवाओं के स्वागत के लिए विभिन्न समाजों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से मार्ग में स्वागत मंच लगाए गए थे। कई स्थानों पर यात्रा में शामिल लोगों के लिए अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई।तिरंगा यात्रा जैसे-जैसे स्वागत मंचों के सामने से गुजरती गई, समाजजनों ने पुष्प वर्षा कर युवाओं का स्वागत किया। पुष्प वर्षा और देशभक्ति नारों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़ते युवाओं का उत्साह और भी बढ़ता दिखाई दिया।इस दौरान स्वागत करने वाले नागरिकों ने भी देशभक्ति के नारों में सहभागिता की। पूरा वातावरण ऐसा नजर आया मानो इंदौर की सड़कें राष्ट्रभक्ति के उत्सव का मंच बन गई हों।
हर वर्ग की रही सहभागिता
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें समाज के अलग-अलग वर्गों और समुदायों के लोगों ने सहभागिता की। यात्रा में युवा छात्र-छात्राओं के साथ माताएं, बहनें, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हुए।आयोजकों के अनुसार यह यात्रा किसी एक समाज या वर्ग की यात्रा न होकर इंदौर के युवाओं और नागरिकों की सामूहिक राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रही। विभिन्न जाति, वर्ग, धर्म और समाज के लोगों ने इसमें स्वस्फूर्त भाव से हिस्सा लिया।यात्रा में शामिल युवाओं ने अपने हाथों में तिरंगा लेकर देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि राष्ट्रीय पर्व और राष्ट्रभक्ति से जुड़े आयोजनों में समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा हो सकता है।
अनुशासन और सौहार्द रहा यात्रा का आधार
हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा अनुशासित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। युवाओं ने यात्रा के दौरान अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग पर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ते रहे।यात्रा के दौरान देशभक्ति का उत्साह लगातार बना रहा, लेकिन इसके साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की भावना भी दिखाई दी। यही कारण रहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता वाला यह आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
वंदे मातरम के सामूहिक गान से हुआ समापन
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा भंवरकुआ पहुंचने के बाद अपने अंतिम चरण में पहुंची। यहां वंदे मातरम गीत के सामूहिक गायन के साथ यात्रा का समापन किया गया। जैसे ही हजारों लोगों ने एक साथ वंदे मातरम का गान किया, पूरा वातावरण देशभक्ति की भावना से भर उठा।हाथों में तिरंगा और सामूहिक रूप से गूंजता वंदे मातरम का स्वर इस यात्रा का सबसे भावुक और यादगार क्षण रहा। युवाओं के साथ मौजूद माताएं, बहनें और समाजजन भी इस सामूहिक गान में शामिल हुए।
युवाओं की नई परंपरा बनने की उम्मीद
इंदौर के युवाओं द्वारा आयोजित इस राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा ने शहर में राष्ट्रभक्ति का एक अलग वातावरण निर्मित किया। हजारों युवाओं की सक्रिय सहभागिता ने यह संकेत दिया कि युवा पीढ़ी देश और राष्ट्रध्वज के सम्मान को लेकर पूरी तरह जागरूक और उत्साहित है।यात्रा में शामिल लोगों का मानना रहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से आपसी एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।
राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा को लेकर आयोजकों का कहना है कि इंदौर के युवाओं द्वारा तय की गई यह यात्रा आने वाले वर्षों में एक नई परंपरा के रूप में स्थापित हो सकती है। जिस प्रकार इस वर्ष हजारों की संख्या में युवाओं और नागरिकों ने इसमें सहभागिता की, उससे भविष्य में इस आयोजन के और व्यापक स्वरूप लेने की उम्मीद है।13 अगस्त की शाम इंदौर की सड़कों पर लहराता तिरंगा, देशभक्ति के नारे, युवाओं का जोश, समाजजनों का स्वागत और अंत में सामूहिक वंदे मातरम का गान इस राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा को लंबे समय तक याद रखने वाला आयोजन बना गया। यह यात्रा केवल तिरंगा लेकर सड़कों पर चलने का आयोजन नहीं रही, बल्कि इंदौर के युवाओं और नागरिकों की सामूहिक राष्ट्रभक्ति, सामाजिक एकता और देश के प्रति सम्मान की भावना का जीवंत प्रदर्शन बनकर सामने आई।
