दमोह, 18 अप्रैल 2026/कुंडलपुर स्थित रुक्मणी माता परिसर आज एक नए स्वरूप में प्रदेश के सामने है—और इस बदलाव के केंद्र में हैं प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल। उनके नेतृत्व, संकल्प और सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप ₹4 करोड़ 70 लाख की लागत से विकसित इस भव्य परिसर का लोकार्पण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम शनिवार को गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ।यह आयोजन केवल विकास कार्यों के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण, आस्था के पुनर्स्थापन और क्षेत्रीय गौरव के पुनर्निर्माण का प्रतीक बनकर उभरा।
इतिहास, आस्था और परंपरा को जोड़ने वाला दृष्टिकोण
अपने उद्बोधन में मंत्री प्रहलाद पटेल ने गहरी बात रखते हुए कहा कि इतिहास को केवल प्रमाणों से नहीं, बल्कि लोककथाओं, शास्त्रों और परंपराओं के माध्यम से भी समझा जाना चाहिए। उन्होंने रुक्मणी मठ और “बड़े बाबा” मंदिर को सदियों पुरानी आस्था का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि इन स्थलों की गरिमा बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।उन्होंने विशेष रूप से उस ऐतिहासिक पहल का उल्लेख किया, जिसके तहत वर्षों पूर्व चोरी हुई प्राचीन मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर पुनः स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने बताया कि पहले इन मूर्तियों की पहचान को लेकर भ्रम था, लेकिन उन्होंने विवाद से ऊपर उठकर मूल धरोहर को वापस लाने को प्राथमिकता दी। इस दिशा में केंद्र सरकार की नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को उन्होंने निर्णायक बताया।
संकल्प से साकार हुआ विकास का मॉडल
कभी उपेक्षा का शिकार रहा कुंडलपुर क्षेत्र आज आधुनिकता और परंपरा का संतुलित उदाहरण बन गया है। मंत्री पटेल के प्रयासों से यहां—
- भव्य मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण
- सरोवर एवं रुक्मणी कुंड का जीर्णोद्धार
- मुख्य मार्ग से मंदिर तक सीसी रोड
- जल निकासी के लिए सुदृढ़ नाली व्यवस्था
- स्कूल परिसर की बाउंड्री वॉल और मुक्तिधाम निर्माण
जैसे अनेक आधारभूत कार्य पूर्ण किए गए हैं। लगभग 35 फीट गहरे रुक्मणी कुंड को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है, जहां जलधारा का प्रकट होना माँ गंगा की कृपा का प्रतीक माना जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
कार्यक्रम में संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने परिसर के नवनिर्माण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह स्थल आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने घोषणा की कि यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले मेले के लिए संस्कृति विभाग की ओर से ₹10 लाख तक का अनुदान दिया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
गौसंवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री ने इस अवसर पर क्षेत्र में आधुनिक गौशाला स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न देशी नस्लों की गायों के संरक्षण से न केवल सांस्कृतिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
“विकास अभी अधूरा, सहयोग जरूरी”
मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि क्षेत्र में विकास की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन अभी कई कार्य शेष हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की कि धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार में सक्रिय सहयोग दें।
जनप्रतिनिधियों ने सराहा नेतृत्व और कार्यशैली
दमोह विधायक जयंत कुमार मलैया ने कहा कि रुक्मणी माता परिसर का वर्तमान स्वरूप अत्यंत आकर्षक और प्रेरणादायक है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वहीं हटा विधायक उमा देवी खटीक ने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में सांसद बनने के बाद प्रहलाद पटेल ने इस क्षेत्र की जर्जर स्थिति देखकर इसके कायाकल्प का संकल्प लिया था। आज जो भव्यता दिखाई दे रही है, वह उसी संकल्प का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री पटेल ने न केवल विकास कार्यों को गति दी, बल्कि सैकड़ों वर्षों से चोरी हुई मूर्तियों की पुनर्स्थापना के लिए भी निरंतर प्रयास किए।
“श्रेय सबका, संकल्प सामूहिक” – प्रहलाद पटेल
अपने संबोधन के अंत में मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि इस परिवर्तन का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि सभी के संयुक्त प्रयास को जाता है। उन्होंने कहा कि जो भव्यता आज दिखाई दे रही है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह स्थल आने वाले समय में आस्था और विकास का आदर्श केंद्र बनेगा।
श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति, छात्रों का सम्मान
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया, जिससे सामाजिक विकास के साथ शिक्षा को भी बढ़ावा मिला।
