ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश जैसे साइबर अपराधों से बचाव के लिए जन-जागरूकता मैराथन का आयोजन, 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत करने की अपील

दमोह | 06 जुलाई 2026/ डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और आम नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा संचालित ‘सेफ क्लिक 2.0′ अभियान का सोमवार को दमोह में भव्य शुभारंभ किया गया। अभियान के अंतर्गत आयोजित विशाल साइबर जन-जागरूकता मैराथन में जनप्रतिनिधियों, पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर साइबर अपराधों के विरुद्ध सामूहिक जन-जागरण का संदेश दिया।
यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में बढ़ते खतरों के प्रति समाज को सतर्क करने की व्यापक पहल है। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, सोशल मीडिया और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस का उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध होने से पहले लोगों को जागरूक करना है।
तहसील ग्राउंड से शुरू हुई जागरूकता की दौड़

साइबर जागरूकता मैराथन का शुभारंभ दमोह के तहसील ग्राउंड से किया गया। सांसद राहुल सिंह लोधी, विधायक जयंत कुमार मलैया, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे तथा पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने हरी झंडी दिखाकर मैराथन को रवाना किया।
मैराथन तहसील ग्राउंड से प्रारंभ होकर बेलाताल, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, कलेक्ट्रेट, स्टेडियम, किल्लाई नाका, बस स्टैंड एवं कीर्ति स्तंभ होते हुए पुनः तहसील ग्राउंड पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े संदेशों वाले बैनर और तख्तियां लेकर लोगों को जागरूक किया। राहगीरों और व्यापारियों को भी साइबर ठगी से बचाव के उपाय बताए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रहा प्रदेशव्यापी अभियान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद राहुल सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश पुलिस साइबर अपराधों की रोकथाम और डिजिटल सुरक्षा को लेकर लगातार नवाचार कर रही है। राज्यभर में चलाया जा रहा ‘सेफ क्लिक 2.0′ अभियान उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि पहले अपराधी हथियारों के बल पर वारदात करते थे, लेकिन अब मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से घर बैठे लोगों की मेहनत की कमाई चंद मिनटों में हड़प ली जाती है। इसलिए तकनीक का उपयोग जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक उसका सुरक्षित उपयोग भी है।
1930 हेल्पलाइन पर तुरंत करें शिकायत
सांसद राहुल सिंह लोधी ने नागरिकों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल शिकायत करें। समय पर सूचना मिलने पर कई मामलों में बैंकिंग लेन-देन को रोककर ठगी गई राशि को वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम में आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश, लिंक या सोशल मीडिया गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और दूसरों को भी जागरूक करें।
हर परिवार तक पहुंचाना है साइबर सुरक्षा का संदेश
भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध समाज के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। अनेक परिवार अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी ऑनलाइन ठगी में गंवा चुके हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में देश एवं प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराधियों के षड्यंत्र से बचाना है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि—
- किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक संबंधी जानकारी कभी न दें।
- सोशल मीडिया पर आने वाले आकर्षक ऑफर, नौकरी, लॉटरी या निवेश संबंधी संदेशों से सावधान रहें।
- किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
अपराधियों का नया हथियार बना इंटरनेट : एसपी आनंद कलादगी
पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने कहा कि समय के साथ अपराधों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। पहले चोरी, लूट और नकबजनी जैसे पारंपरिक अपराध अधिक होते थे, जबकि अब साइबर अपराधी हजारों किलोमीटर दूर बैठकर मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। वे बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सीबीआई अधिकारी, आयकर विभाग, कूरियर कंपनी, बिजली विभाग, मोबाइल कंपनी अथवा सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बनकर लोगों को फोन करते हैं और डराकर या लालच देकर उनकी गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं।
डिजिटल अरेस्ट से रहें सतर्क
एसपी ने विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसी नई साइबर ठगी के बारे में लोगों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि अपराधी वीडियो कॉल कर स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को घंटों तक वीडियो कॉल पर रखते हैं और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। यदि इस प्रकार की कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काटें और पुलिस को सूचना दें।
ऑनलाइन ठगी के प्रमुख तरीके
कार्यक्रम में नागरिकों को बताया गया कि वर्तमान समय में निम्न प्रकार के साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं—
- डिजिटल अरेस्ट
- फर्जी निवेश (Investment Scam)
- शेयर ट्रेडिंग और क्रिप्टो फ्रॉड
- ओएलएक्स एवं ऑनलाइन खरीद-बिक्री ठगी
- केवाईसी अपडेट के नाम पर बैंक फ्रॉड
- फर्जी कस्टमर केयर नंबर
- क्यूआर कोड स्कैम
- फिशिंग लिंक
- सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग
- व्हाट्सएप और टेलीग्राम फ्रॉड
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पुलिस ने नागरिकों को साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए—
- बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी और यूपीआई पिन किसी से साझा न करें।
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- मोबाइल में केवल अधिकृत ऐप ही डाउनलोड करें।
- सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखें।
- किसी भी संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।
- साइबर ठगी होने पर एक मिनट भी देर न करें और तुरंत 1930 पर कॉल करें।
जनभागीदारी से ही सफल होगा अभियान
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने साइबर अपराधों से स्वयं सुरक्षित रहने तथा दूसरों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ‘सेफ क्लिक 2.0′ के तहत आगामी दिनों में जिले के स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों, बाजारों, शासकीय कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि प्रत्येक नागरिक साइबर अपराधियों के नए-नए तरीकों को समझ सके और समय रहते स्वयं को सुरक्षित रख सके।
