एमपी पुलिस की ताकत बढ़ाएंगे हाईटेक ड्रोन: 100 किलोमीटर तक रखेंगे निगरानी, सिंहस्थ से लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों तक होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

( डॉ.एल.एन.वैष्णव )
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस अब अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रही है। पहली बार पुलिस को ऐसे हाईटेक फिक्स्ड विंग ड्रोन मिले हैं, जो लंबी दूरी तक उड़ान भरते हुए रियल टाइम निगरानी करने में सक्षम हैं। इन ड्रोन के जरिए पुलिस अब शहरों से लेकर दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों तक संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रख सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक से लैस यह व्यवस्था पुलिसिंग के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार राज्य को फिलहाल तीन फिक्स्ड विंग ड्रोन प्राप्त हुए हैं। इनका संचालन भोपाल, इंदौर और उज्जैन में बनाए जा रहे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों से किया जाएगा। प्रत्येक स्टेशन से लगभग 100 किलोमीटर के दायरे तक ड्रोन संचालित किए जा सकेंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसी जिले में यदि अचानक कोई संवेदनशील स्थिति उत्पन्न होती है, तो दूसरे शहर में बैठे ऑपरेटर भी तत्काल ड्रोन के माध्यम से वहां की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सकेंगे।
आंखों से ओझल होने के बाद भी रहेगा नियंत्रण
सामान्य ड्रोन की तुलना में ये फिक्स्ड विंग ड्रोन अधिक दूरी तय करने और लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम हैं। इनमें बियॉन्ड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS) तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक के कारण ड्रोन ऑपरेटर की प्रत्यक्ष दृष्टि से बाहर चले जाने के बाद भी सुरक्षित रूप से नियंत्रित किए जा सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से बड़े क्षेत्र की निगरानी, लंबी दूरी की पेट्रोलिंग और संवेदनशील इलाकों में लगातार सर्विलांस पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी होगा।
छह घंटे तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता
इन ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता इनकी लंबी उड़ान क्षमता है। एक बार उड़ान भरने के बाद ये लगभग छह घंटे तक लगातार हवा में रह सकते हैं। इनमें लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे दिन और रात दोनों समय स्पष्ट वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड करते हैं। प्राप्त होने वाला पूरा डेटा सीधे कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचता रहेगा, जिससे वरिष्ठ अधिकारी वास्तविक समय में घटनास्थल की निगरानी कर सकेंगे।
ड्रोन में अत्याधुनिक सेंसर और ऑटोमैटिक नेविगेशन सिस्टम भी लगाए गए हैं। यदि उड़ान के दौरान बिजली के तार, मोबाइल टॉवर, ऊंचे पेड़ या कोई अन्य अवरोध सामने आता है, तो ड्रोन स्वतः अपना मार्ग बदल लेते हैं। इससे सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित होती है और मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो जाती है।
कई तरह के अभियानों में होगा उपयोग
पुलिस विभाग ने इन ड्रोन के उपयोग को केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रखा है। इन्हें वीआईपी सुरक्षा, बड़े धार्मिक आयोजनों, चुनावी ड्यूटी, भीड़ प्रबंधन, सर्च ऑपरेशन, लापता व्यक्तियों की तलाश, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्य, सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी तथा अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।
विशेष रूप से जंगलों, दुर्गम इलाकों और ऐसे स्थानों पर, जहां पुलिस बल का तत्काल पहुंचना कठिन होता है, वहां यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
सिंहस्थ महापर्व की सुरक्षा में निभाएंगे अहम भूमिका
उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। इतने विशाल आयोजन में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है।
ऐसी स्थिति में फिक्स्ड विंग ड्रोन पूरे मेला क्षेत्र, पार्किंग, प्रमुख मार्गों, घाटों और संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी करेंगे। यदि कहीं भी भीड़ का दबाव बढ़ता है या कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो कंट्रोल रूम को तत्काल सूचना मिल जाएगी, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी।
साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से मिला हाईटेक सिस्टम
जानकारी के अनुसार इन तीनों फिक्स्ड विंग ड्रोन और उनसे जुड़े तकनीकी उपकरणों की लागत लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये है। इनके साथ अत्याधुनिक ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है। पुलिस कर्मियों को इन ड्रोन के संचालन और तकनीकी उपयोग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
एसपी रेडियो अंकित शुक्ला ने बताया कि तीनों ड्रोन पुलिस को प्राप्त हो चुके हैं तथा भोपाल, इंदौर और उज्जैन में कंट्रोल स्टेशन स्थापित करने का कार्य तेजी से चल रहा है। सभी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद इन्हें नियमित पुलिसिंग का हिस्सा बना दिया जाएगा।
अवैध हूटर और बत्तियों पर चलेगा सख्त अभियान
इधर पुलिस मुख्यालय ने निजी वाहनों पर अवैध रूप से लगाए जा रहे हूटर, लाल-पीली-नीली बत्तियों, ब्लैक फिल्म और सरकारी स्टिकरों के दुरुपयोग पर भी सख्ती बढ़ा दी है।
मुख्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी वाहन नियमों के विपरीत हूटर और विशेष पहचान का उपयोग कर रहे हैं। इनमें कुछ प्रभावशाली लोगों और जनप्रतिनिधियों के वाहन भी शामिल होने की शिकायतें सामने आई हैं।
इसी को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि कानून का पालन कराने में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
1 से 10 अगस्त तक चलेगा विशेष अभियान
प्रदेशभर में 1 अगस्त से 10 अगस्त तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान पुलिस निजी वाहनों पर लगे अवैध हूटर, फ्लैशर, लाल-पीली-नीली बत्तियां, ब्लैक फिल्म, सरकारी स्टिकर और अन्य अनधिकृत पहचान चिह्नों की जांच करेगी।
यदि कोई वाहन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम और अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। अभियान की नियमित समीक्षा भी पुलिस मुख्यालय स्तर पर की जाएगी।
जनता से सहयोग की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने निजी वाहनों पर यदि किसी प्रकार का अवैध हूटर, फ्लैशर, सरकारी बोर्ड, ब्लैक फिल्म या प्रतिबंधित पहचान चिह्न लगाए हुए हैं तो उन्हें स्वयं हटा दें। इससे न केवल कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकेगा, बल्कि यातायात व्यवस्था और कानून के प्रति सम्मान भी बना रहेगा।
आधुनिक पुलिसिंग की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश
तकनीक आधारित पुलिसिंग आज समय की आवश्यकता बन चुकी है। आधुनिक ड्रोन, डिजिटल निगरानी प्रणाली और रियल टाइम डेटा विश्लेषण जैसी व्यवस्थाएं पुलिस की कार्यक्षमता को नई दिशा दे रही हैं। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा फिक्स्ड विंग ड्रोन को शामिल किया जाना इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
यदि इनका उपयोग योजनाबद्ध तरीके से किया गया, तो अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य और बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी और त्वरित हो सकेगी। वहीं दूसरी ओर अवैध हूटर और विशेष पहचान के दुरुपयोग के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान यह संदेश देता है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से अनिवार्य है।
