(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह/जिले में शासकीय कार्यालयों की कार्यप्रणाली में अनुशासन लाने और जनता को समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दमोह जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। जिला कलेक्टर द्वारा सार्थक ऐप (Sarthak App) की उपस्थिति रिपोर्ट, क्षेत्रीय निरीक्षणों और लगातार मिल रही जन शिकायतों के आधार पर 141 अधिकारी एवं कर्मचारियों का अनुपस्थिति अवधि का वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे सरकारी तंत्र में हड़कंप की स्थिति है और विभिन्न विभागों में कर्मचारी अब समय पर कार्यालय पहुंचने और ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने लगे हैं।
यह कार्रवाई केवल वेतन कटौती तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जिले में सरकारी कार्य संस्कृति में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब सरकारी सेवा केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक के माध्यम से प्रत्येक कर्मचारी की जवाबदेही तय होगी।
क्षेत्र भ्रमण में खुली लापरवाही की परतें
सूत्रों के अनुसार, कलेक्टर पिछले कई सप्ताह से जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों का लगातार दौरा कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तहसील कार्यालय, राजस्व कार्यालय और अन्य शासकीय संस्थानों में अधिकारी एवं कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं मिले। कई स्थानों पर आम नागरिक घंटों तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों से यह शिकायत भी सामने आई कि मरीज सुबह अस्पताल पहुंच जाते हैं, लेकिन डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी देर से आते हैं। कई मामलों में महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांग नागरिकों को केवल अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा।
सार्थक ऐप से सामने आई वास्तविक तस्वीर
मध्यप्रदेश शासन द्वारा सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति पारदर्शी बनाने के लिए सार्थक ऐप लागू किया गया है। इस ऐप के माध्यम से प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर चेक-इन तथा कार्यालय छोड़ते समय चेक-आउट करना अनिवार्य है।
प्रशासन ने जब ऐप के रिकॉर्ड का मिलान वास्तविक उपस्थिति और निरीक्षण रिपोर्ट से किया तो कई कर्मचारियों द्वारा नियमों का पालन नहीं करने की पुष्टि हुई। इसके बाद विभागवार समीक्षा कर कुल 141 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध वेतन कटौती की कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य विभाग सबसे अधिक निगरानी में
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कार्रवाई का दायरा केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहा। स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग सहित अनेक शासकीय विभागों के अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई की जद में आए हैं। विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं में समय पर उपस्थिति को लेकर प्रशासन ने गंभीर रुख अपनाया है क्योंकि अस्पतालों में देरी का सीधा असर मरीजों के जीवन और उपचार पर पड़ता है।
जनता को राहत देने की कोशिश
जिला प्रशासन का मानना है कि सरकारी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचेंगे तो आम नागरिकों को अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को परिवहन पर अतिरिक्त खर्च, समय की बर्बादी और मानसिक परेशानी से राहत मिलेगी।
प्रशासन का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें प्रत्येक सरकारी कार्यालय निर्धारित समय पर खुले और सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी के साथ करें।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश
कलेक्टर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को दो टूक शब्दों में कहा—
“जनता की सेवा के लिए ही आपको इन पदों पर रखा गया है। आपके विलंब से आने या अनुपस्थित रहने के कारण दूर-दराज से आने वाले मरीजों, माताओं, बहनों और आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी-कर्मचारी समय पर सार्थक ऐप में चेक-इन और चेक-आउट करें तथा अपनी पूरी सेवा अवधि का ईमानदारी से पालन करें।”
क्या है सार्थक ऐप?-
सार्थक ऐप मध्यप्रदेश शासन की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली है, जिसके माध्यम से सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इसका उद्देश्य कार्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। ऐप के जरिए यह पता चलता है कि कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचे या नहीं तथा उन्होंने पूरा कार्यकाल कार्यालय में बिताया या नहीं।
विश्लेषण: केवल वेतन कटौती नहीं, प्रशासनिक संदेश भी-
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल 141 कर्मचारियों का वेतन काटने तक सीमित नहीं है। यह पूरे सरकारी तंत्र के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि अब तकनीक आधारित निगरानी के दौर में लापरवाही छिपाना आसान नहीं होगा। यदि इसी प्रकार नियमित समीक्षा जारी रही तो सरकारी कार्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति और कार्य संस्कृति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अनुशासन के साथ-साथ कर्मचारियों को तकनीकी समस्याओं, नेटवर्क संबंधी दिक्कतों और ऐप संचालन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों का समाधान भी प्रशासन को सुनिश्चित करना होगा, ताकि व्यवस्था प्रभावी और न्यायसंगत बनी रहे।
