समान नाम से सूची में शामिल तीन अधिकारी भी जांच के दायरे में, विभागीय जांच, दंड और कोर्ट केस की होगी पड़ताल; पद खाली हुए तो पात्र निरीक्षकों को मिल सकता है डीएसपी बनने का मौका

( डॉ.एल.एन.वैष्णव)
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे इंतजार के बाद हुई पदोन्नतियों के बाद अब डीएसपी स्तर पर भी पात्रता की दोबारा जांच की तैयारी शुरू हो गई है। निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक यानी डीएसपी बनाए गए अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर अब रिकॉर्ड की दोबारा पड़ताल की जा रही है।सूत्रों के अनुसार, विभागीय पदोन्नति समिति यानी रिव्यू डीपीसी के माध्यम से करीब 250 अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े सेवा अभिलेखों की जांच की जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर सामने आई पात्रता संबंधी आपत्तियों के आधार पर 15 से अधिक डीएसपी की पदोन्नति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी किसी अधिकारी की पदावनति को अंतिम नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय रिव्यू डीपीसी में रिकॉर्ड और नियमों की जांच के बाद ही होगा।
पदोन्नति के बाद खुली पात्रता की फाइल
डीएसपी पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने संबंधित अधिकारियों के बारे में विस्तृत जानकारी विभिन्न पुलिस इकाइयों से मांगी थी। इसमें अधिकारियों के विरुद्ध लंबित विभागीय जांच, विभागीय दंड, न्यायालयीन प्रकरण और पदोन्नति की पात्रता को प्रभावित करने वाले अन्य मामलों की जानकारी शामिल थी।सूत्रों के अनुसार, संबंधित इकाइयों से प्राप्त जानकारी के परीक्षण के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें अधिकारियों की पदोन्नति पात्रता का दोबारा परीक्षण आवश्यक माना गया। इसी के बाद डीएसपी स्तर पर रिव्यू डीपीसी की तैयारी शुरू हुई है।
15 से अधिक डीएसपी की पदोन्नति पर नजर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 15 से अधिक अधिकारियों के मामले ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनमें पदोन्नति के समय निर्धारित पात्रता शर्तों को लेकर पुनः जांच की जरूरत सामने आई है।सूत्रों का कहना है कि इन मामलों में यदि रिव्यू डीपीसी के दौरान संबंधित अधिकारी निर्धारित मापदंडों पर पात्र नहीं पाए जाते हैं, तो उनकी पदोन्नति में बदलाव अथवा पदावनति की स्थिति बन सकती है।हालांकि पुलिस मुख्यालय की समीक्षा पूरी होने से पहले किसी निश्चित संख्या को अंतिम मानना उचित नहीं होगा। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है।
समान नाम वाले तीन अधिकारी भी जांच के घेरे में
रिव्यू डीपीसी की जरूरत सामने आने की एक वजह पदोन्नति सूची में पहचान संबंधी गड़बड़ी भी बताई जा रही है।सूत्रों के अनुसार, तीन ऐसे अधिकारियों के मामले सामने आए हैं, जिनके नाम समान होने के कारण पदोन्नति सूची में शामिल होने की स्थिति बनी। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी की वास्तविक पहचान, सेवा अभिलेख और अन्य विभागीय विवरणों का मिलान किया जाएगा।इसके अलावा कुछ अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित होने की जानकारी भी सामने आई है। कुछ अन्य मामलों में पदोन्नति के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करने को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित इकाइयों से मिली रिपोर्ट के आधार पर इन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
410 डीएसपी पदों का ढांचा, 113 पद पदोन्नति कोटे में रिक्त
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस विभाग में डीएसपी स्तर पर कुल 410 पद निर्धारित हैं। जुलाई में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से पहले करीब 297 पदों पर कार्यवाहक डीएसपी पदस्थ बताए गए थे, जबकि करीब 113 पद पदोन्नति कोटे में रिक्त थे।अब यदि रिव्यू डीपीसी के दौरान कुछ पदोन्नतियां नियमों के तहत निरस्त या प्रभावित होती हैं और डीएसपी के पद रिक्त होते हैं, तो इन रिक्त पदों पर पात्र निरीक्षकों को पदोन्नति का अवसर मिल सकता है।हालांकि यह प्रक्रिया स्वतः नहीं होगी। रिक्त पदों पर पदोन्नति भी वरिष्ठता, पात्रता और विभागीय नियमों के अनुसार ही की जाएगी।
जुलाई में हुई थी बड़े पैमाने पर पदोन्नति
मध्य प्रदेश पुलिस में इस वर्ष पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से प्रतीक्षित थी। जुलाई में निरीक्षकों को डीएसपी पद पर पदोन्नत करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। अलग-अलग रिपोर्टों में पदोन्नति पाने वाले निरीक्षकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए वर्तमान रिव्यू प्रक्रिया के संदर्भ में अंतिम संख्या विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।पदोन्नति के बाद ही पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों की पात्रता से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू की। इसी परीक्षण के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए जिनकी दोबारा समीक्षा की जरूरत महसूस हुई।
पहले भी सैकड़ों पदोन्नतियां हुईं निरस्त
डीएसपी स्तर की मौजूदा समीक्षा को समझने के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि पुलिस मुख्यालय इससे पहले विभिन्न संवर्गों की पदोन्नतियों की समीक्षा कर चुका है।रिपोर्टों के अनुसार, विभागीय जांच, न्यायालयीन प्रकरण, विभागीय दंड और अन्य पात्रता संबंधी कारणों के चलते 150 से अधिक उप निरीक्षकों और निरीक्षकों की पदोन्नतियां निरस्त की गई हैं। एक हालिया रिव्यू प्रक्रिया में 78 निरीक्षकों और 83 उप निरीक्षकों की पदोन्नति निरस्त कर उन्हें पुराने पद पर रिवर्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।इसके अलावा पुलिस विभाग में पदोन्नति सूची को लेकर पहले भी प्रशासनिक और पहचान संबंधी त्रुटियों की खबरें सामने आई हैं। जुलाई में जारी एक डीएसपी पदोन्नति सूची में सेवानिवृत्त निरीक्षक का नाम शामिल होने तथा समान नाम के कारण दूसरे अधिकारी के पदोन्नति से प्रभावित होने की रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी।
रिव्यू डीपीसी में किन बिंदुओं की होगी जांच?
रिव्यू डीपीसी में अधिकारियों की पात्रता से जुड़े कई बिंदुओं पर विचार किया जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से—
- पदोन्नति के समय निर्धारित सेवा पात्रता
- विभागीय जांच की स्थिति
- विभागीय दंड का रिकॉर्ड
- न्यायालयीन प्रकरण
- सेवा अभिलेख एवं अन्य संबंधित दस्तावेज
- पदोन्नति सूची में अधिकारी की सही पहचान
- निर्धारित पदोन्नति शर्तों का पालन
- संबंधित इकाई से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट
इन सभी बिंदुओं के परीक्षण के बाद ही प्रत्येक अधिकारी के मामले में अंतिम निर्णय सामने आएगा।
पदावनति हुई तो निरीक्षकों के लिए खुलेगा रास्ता
यदि रिव्यू डीपीसी में कुछ पदोन्नतियां नियमों के अनुसार निरस्त होती हैं और डीएसपी के पद रिक्त होते हैं, तो पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे पात्र निरीक्षकों के लिए अवसर बन सकता है।सूत्रों के अनुसार, ऐसे रिक्त पदों को पात्र अधिकारियों से भरने की प्रक्रिया वरिष्ठता और निर्धारित पात्रता के आधार पर आगे बढ़ सकती है। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि कितने निरीक्षकों को इसका लाभ मिलेगा।
15 से ज्यादा का आंकड़ा अभी अंतिम नहीं
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 से अधिक डीएसपी की पदावनति की संभावना को अभी अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। यह संख्या प्रारंभिक समीक्षा में सामने आए मामलों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित बताई जा रही है।रिव्यू डीपीसी में अधिकारियों के रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद ही यह तय होगा कि किन अधिकारियों की पदोन्नति बरकरार रहती है और किन मामलों में संशोधन की जरूरत पड़ती है।
अब रिव्यू डीपीसी के फैसले पर नजर
मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी पदोन्नति की मौजूदा समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसके परिणाम से न केवल पहले से पदोन्नत अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि डीएसपी के रिक्त होने वाले संभावित पदों पर आगे की पदोन्नति का रास्ता भी प्रभावित हो सकता है।फिलहाल पुलिस मुख्यालय स्तर पर रिकॉर्ड और पात्रता की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया पर नजर है। रिव्यू डीपीसी में सभी संबंधित दस्तावेजों और नियमों की जांच के बाद ही अंतिम तस्वीर साफ होगी।
