( डॉ. एल.एन. वैष्णव)

दमोह। दमोह जिले के पंचायत और ग्रामीण निर्माण कार्यों में लंबे समय से चर्चा, शिकायतों, आरोपों और राजनीतिक संरक्षण की फुसफुसाहटों के बीच घूमता एक नाम आखिरकार शासन की सख्त कार्रवाई की जद में आ गया। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के विवादित अधिकारी मनोज कुमार गुप्ता को मध्यप्रदेश शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वल्लभ भवन भोपाल से 24 अप्रैल 2026 को जारी आदेश ने न सिर्फ विभागीय गलियारों में सनसनी फैला दी है, बल्कि उन तमाम शिकायतों को भी एक बार फिर जीवित कर दिया है जो वर्षों से मनोज गुप्ता के पीछे चलती रही थीं।
शासन के आदेश क्रमांक I/967626/2026 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मुख्यमंत्री अवसंरचना मद 6084 के अंतर्गत दमोह जिले में कराए गए ग्रेवल प्रोफाइल सुधार कार्यों में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री एवं वर्तमान सहायक यंत्री मनोज कुमार गुप्ता को म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय ग्रामीण यांत्रिकी सेवा परिक्षेत्र जबलपुर निर्धारित किया गया है।
लेकिन यह सिर्फ एक निलंबन आदेश नहीं…यह उस लंबे विवादित अध्याय का पहला आधिकारिक पन्ना है, जिसकी फाइलें वर्षों से दबती-उठती रही थीं।
प्रहलाद पटेल ने दिया था साफ संदेश – “भ्रष्टाचार और लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं”
मध्यप्रदेश शासन के पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल पिछले कुछ महीनों से विभागीय बैठकों में लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। मंत्री पटेल ने साफ निर्देश दिए थे कि ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, पंचायत कार्यों, जल संरचनाओं और तकनीकी स्वीकृतियों में गड़बड़ी करने वाले अधिकारी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। मंत्री की नाराजगी कई बैठकों में स्पष्ट दिखाई दी थी और दमोह सहित कुछ जिलों की फाइलें विशेष निगरानी में रखी गई थीं।सूत्र बताते हैं कि मनोज गुप्ता का मामला भी इन्हीं संवेदनशील फाइलों में शामिल था, जिस पर लगातार शिकायतें और तकनीकी रिपोर्टें शासन स्तर तक पहुंच रही थीं। आखिरकार मंत्री की सख्ती और विभागीय परीक्षण के बाद यह कार्रवाई सामने आई।
तेंदूखेड़ा से शुरू हुआ विवादों का सिलसिला, सरपंच-सचिवों ने लगाए थे लेनदेन के आरोप
मनोज गुप्ता का नाम विभाग में अचानक चर्चा में नहीं आया। उनकी प्रारंभिक सेवा काल से ही उन पर लेनदेन, कार्य स्वीकृतियों में मनमानी और तकनीकी अनुमोदन के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। तेंदूखेड़ा क्षेत्र में पदस्थ रहते समय बड़ी संख्या में सरपंचों और सचिवों ने खुलकर आरोप लगाए थे कि बिना आर्थिक लेनदेन के कार्य स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। शिकायतें इतनी बढ़ीं कि विभाग को जांच बैठानी पड़ी और तत्काल प्रभाव से उन्हें वहां से हटाया गया।उस समय भी यह चर्चा रही थी कि कार्रवाई तो हुई, लेकिन मामला दबा दिया गया।
पथरिया जनपद में भी रहे सुर्खियों में, अनियमितताओं ने नहीं छोड़ा पीछा
तेंदूखेड़ा से हटने के बाद जब मनोज गुप्ता पथरिया जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पद पर पहुंचे, तब उम्मीद थी कि पिछली शिकायतों से सबक लिया जाएगा। लेकिन यहां भी भुगतान, निर्माण कार्यों और पंचायत योजनाओं में अनियमितताओं की चर्चा ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कई जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए, शिकायतें पहुंचीं और अंततः उन्हें वहां से भी हटना पड़ा। यानी जहां-जहां पदस्थापना हुई, वहां-वहां विवादों की फाइल भी साथ चलती रही।
दमोह में कार्यपालन यंत्री बनकर आए, फिर वही कहानी…
कुछ समय बाद मनोज गुप्ता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग दमोह में कार्यपालन यंत्री के रूप में पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री अवसंरचना मद, पंचायत स्तरीय निर्माण, ग्रामीण सड़कों, पुल-पुलियों, ग्रेवल प्रोफाइल सुधार और तकनीकी परीक्षणों से जुड़े कई अहम काम उनके हाथ में आए। लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि यहीं से शिकायतों का नया दौर शुरू हुआ।ग्रेवल सड़कों के नाम पर कागजी मजबूती, फील्ड में कमजोर निर्माण, भुगतान में तेजी और गुणवत्ता में ढिलाई की चर्चाएं लगातार उठती रहीं। कई ठेकेदारों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच अंदरखाने असंतोष बढ़ता गया। आरोप यह भी लगे कि तकनीकी मानकों की जगह फाइलों में औपचारिकता निभाई जाती रही।स्थिति इतनी बिगड़ी कि अंततः कार्यपालन यंत्री का प्रभार उनसे लेकर अदिति हुंडैत को सौंप दिया गया और मनोज गुप्ता को कार्यालय में अटैच कर दिया गया। यह कदम अपने आप में संकेत था कि विभागीय भरोसा डगमगा चुका है।
वाटरशेड की जिम्मेदारी मिली, लेकिन जांच ने खोल दी पूरी परत
हाल ही में जिला पंचायत स्तर पर उन्हें वाटरशेड संबंधी जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री अवसंरचना मद 6084 के अंतर्गत स्वीकृत ग्रेवल प्रोफाइल सुधार कार्यों की फाइलें दोबारा खुलीं। माप पुस्तिकाएं, भुगतान दस्तावेज, तकनीकी स्वीकृतियां और स्थल निरीक्षण रिपोर्टों के परीक्षण में वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच में मनोज गुप्ता दोषी पाए गए और शासन ने बिना देर किए निलंबन आदेश जारी कर दिया।
राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं भी रहीं, इसलिए देर से हुई कार्रवाई?
दमोह और पथरिया के राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा बनी रही कि मनोज गुप्ता को प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। खासतौर पर पथरिया विधायक और मध्यप्रदेश सरकार की पशुपालन डेयरी राज्य मंत्री के वरदहस्त की बातें अंदरखाने कही जाती रहीं। यही वजह बताई जाती रही कि शिकायतों का अंबार लगने के बावजूद निर्णायक कार्रवाई टलती रही। हालांकि अब जब सीधे शासन ने निलंबन किया है, तो जिले में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक संरक्षण की दीवार आखिरकार ढह गई?
निलंबन से विभाग में हड़कंप, अब खुल सकती हैं और फाइलें
मनोज गुप्ता के निलंबन के बाद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जिला पंचायत और जनपद पंचायतों में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रह सकती। ग्रेवल प्रोफाइल सुधार कार्यों से जुड़ी अन्य तकनीकी फाइलें, भुगतान स्वीकृतियां और संबंधित ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है।
दमोह में अब चर्चाओं का बाजार गर्म है —
क्या मनोज गुप्ता सिर्फ शुरुआत हैं?
क्या वर्षों से कागजों में बनती रही ग्रामीण सड़कें अब कई और चेहरों को बेनकाब करेंगी?
क्या मंत्री प्रहलाद पटेल की सख्ती दमोह के पूरे पंचायत निर्माण तंत्र की परतें खोलने वाली है?
फिलहाल इतना तय है कि वर्षों तक आरोपों के बीच बचते रहे मनोज गुप्ता अब शासन की सीधी कार्रवाई का चेहरा बन चुके हैं।
