दमोह, 8 जुलाई। जिले में मानसून की बारिश का सिलसिला जारी है, लेकिन अब तक वर्षा का प्रदर्शन पिछले वर्ष की तुलना में काफी कमजोर बना हुआ है। भू-अभिलेख विभाग द्वारा जारी ताजा वर्षा प्रतिवेदन के अनुसार 1 जून से 8 जुलाई 2026 तक जिले में 246.9 मिलीमीटर (9.7 इंच) औसत वर्षा दर्ज की गई है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में हुई 421.9 मिलीमीटर (16.6 इंच) औसत वर्षा की तुलना में 175 मिलीमीटर (6.9 इंच) कम है। वर्षा में यह बड़ी कमी खरीफ सीजन के बीच किसानों की चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
जिले में अभी तक कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर देखने को मिला है। इसका असर यह है कि अलग-अलग तहसीलों में वर्षा का वितरण भी असमान बना हुआ है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि कई स्थान अभी भी सामान्य से कम बारिश का सामना कर रहे हैं।
पटेरा सबसे आगे, बटियागढ़ सबसे पीछे
भू-अभिलेख विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक पटेरा तहसील जिले में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र रहा है, जहां 385.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके विपरीत बटियागढ़ में सबसे कम 116 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है।
जिले के विभिन्न वर्षामापी केंद्रों पर दर्ज वर्षा इस प्रकार है—
- पटेरा – 385.4 मिमी
- पथरिया – 343.0 मिमी
- हटा – 269.4 मिमी
- जबेरा – 215.0 मिमी
- दमोह – 207.0 मिमी
- तेन्दूखेड़ा – 192.6 मिमी
- बटियागढ़ – 116.0 मिमी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के विभिन्न हिस्सों में वर्षा का वितरण समान नहीं रहा है। जहां कुछ इलाकों में पर्याप्त बारिश हुई है, वहीं कई क्षेत्रों में अभी भी सामान्य वर्षा का इंतजार बना हुआ है।
24 घंटे में औसतन 21.4 मिमी वर्षा
बीते 24 घंटों के दौरान जिले में औसतन 21.4 मिलीमीटर (0.8 इंच) वर्षा दर्ज की गई। इस अवधि में तेन्दूखेड़ा सबसे अधिक भीगा, जहां 42.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अन्य वर्षामापी केंद्रों पर दर्ज वर्षा इस प्रकार रही—
- तेन्दूखेड़ा – 42.4 मिमी
- जबेरा – 26.0 मिमी
- हटा – 19.4 मिमी
- पटेरा – 19.0 मिमी
- पथरिया – 18.0 मिमी
- बटियागढ़ – 13.0 मिमी
- दमोह – 12.0 मिमी
कृषि गतिविधियों पर पड़ सकता है असर
जिले में खरीफ सीजन की बुवाई का अधिकांश कार्य वर्षा पर निर्भर करता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार और अच्छी वर्षा होती है तो सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द तथा अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल सकेगी। वहीं बारिश में लंबा अंतराल रहने की स्थिति में किसानों को सिंचाई और फसल प्रबंधन की अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
जलाशयों और भू-जल स्तर पर भी नजर
बारिश का सीधा प्रभाव जिले के तालाबों, बांधों, स्टॉप डैम और अन्य जल स्रोतों पर पड़ता है। अभी तक हुई वर्षा से कुछ क्षेत्रों में जलस्रोतों में पानी की आवक शुरू हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कम बारिश होने के कारण अधिकांश जलाशयों के पूरी क्षमता तक भरने के लिए आने वाले दिनों की वर्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पर्याप्त वर्षा होने पर पेयजल व्यवस्था, सिंचाई और भू-जल पुनर्भरण की स्थिति में भी सुधार होगा।
आगे की बारिश पर टिकी उम्मीदें
मौसम का मौजूदा रुख बताता है कि मानसून जिले में सक्रिय है, लेकिन अब तक उसका प्रभाव पिछले वर्ष जितना मजबूत नहीं रहा। प्रशासन और कृषि विभाग की नजर आगामी दिनों की वर्षा पर बनी हुई है। यदि जुलाई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो जिले की औसत वर्षा में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है और कृषि सहित जल संसाधनों की स्थिति भी बेहतर होने की उम्मीद है।
भू-अभिलेख विभाग ने नागरिकों और किसानों से अपील की है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों और प्रशासन की सलाह के अनुसार कृषि एवं अन्य गतिविधियों की योजना बनाएं।
