एसडीएम कार्यालय, तहसील और जनपद पंचायत का औचक निरीक्षण, 24 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित मिले
सार्थक ऐप से होगी मॉनिटरिंग, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई के संकेत

दमोह, 21 मई 2026/जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और आमजन केंद्रित बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति, जनता के कार्यों का त्वरित निराकरण और अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव लगातार मैदानी स्तर पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को उन्होंने दमोह शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक अमले में हलचल पैदा कर दी।
निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी अपने निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम नागरिकों के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि शासन की मंशा है कि लोगों को शासकीय सेवाएं समय पर और बिना अनावश्यक परेशानी के उपलब्ध हों तथा इसके लिए अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एसडीएम कार्यालय दमोह, तहसील कार्यालय दमोह, तहसील कार्यालय दमयंती नगर तथा जनपद पंचायत कार्यालय दमोह का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एसडीएम, तहसीलदार दमोह, तहसीलदार दमयंती नगर और नायब तहसीलदार सहित कई अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में अनुपस्थित पाए गए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अनुपस्थित पाए गए चार वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र (शोकॉज नोटिस) जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त छह अन्य कर्मचारियों से भी जवाब-तलब किया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति अनुपस्थिति या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
जनपद पंचायत कार्यालय में सबसे अधिक अनुपस्थिति
निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत कार्यालय दमोह की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। यहां कुल 14 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से सभी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और निर्धारित समय सीमा में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा।
कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही या आमजन के कार्यों में अनावश्यक विलंब को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आमजन को नहीं होनी चाहिए परेशानी

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यालयों में आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आमजन के राजस्व, प्रमाण पत्र, नामांतरण, सीमांकन, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचेंगे, तो इसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा, जिसे प्रशासन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा।
‘सार्थक ऐप’ से होगी उपस्थिति की निगरानी
जिले में शासकीय कार्यालयों में उपस्थिति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तकनीकी निगरानी प्रणाली को भी लागू किया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि जिले की सभी तहसीलों और अनुभाग स्तर के कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है।
अब अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन डिजिटल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे। इससे प्रशासन को वास्तविक समय में मॉनिटरिंग करने में सुविधा होगी और अनुपस्थिति या समय पालन में लापरवाही के मामलों पर तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी।
कलेक्टर ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना, जवाबदेही बढ़ाना और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
प्रशासनिक सख्ती से बढ़ी हलचल
कलेक्टर के लगातार औचक निरीक्षणों और सख्त कार्यशैली से प्रशासनिक अमले में हलचल देखी जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों और कार्यालयों में भी इसी प्रकार निरीक्षण अभियान जारी रहेगा। जिला प्रशासन का संदेश साफ है कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, समयपालन और जनता के कार्यों के प्रति संवेदनशीलता सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को आमजन की सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
