भगवान धन्वंतरी के पूजन, वैदिक मंत्रोच्चारण और शंखनाद से हुआ शुभारंभ, संगठन की एकता, चिकित्सा चुनौतियों, आयुर्वेद और योग पर हुआ गहन मंथन
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। चिकित्सा सेवा केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश के दमोह मुख्यालय स्थित एक निजी होटल में नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) द्वारा भव्य वार्षिक सम्मेलन, सम्मान समारोह एवं चिकित्सक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ एवं युवा चिकित्सकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। समारोह के दौरान चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ चिकित्सकों का सम्मान किया गया तथा चिकित्सा सेवा से जुड़े अनुभव, चुनौतियां और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धन्वंतरी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, वैदिक मंत्रोच्चारण एवं शंखनाद के साथ हुआ। जैसे ही पूजन-अर्चन प्रारंभ हुआ, पूरा सभागार भगवान धन्वंतरी के जयघोष से गूंज उठा। उपस्थित सभी चिकित्सकों ने खड़े होकर भगवान धन्वंतरी का आशीर्वाद लिया और समाज के प्रति अपनी सेवा भावना को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प दोहराया।समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भरत शिवहरे थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता नीमा के जिलाध्यक्ष डॉ. सी.एल. नेमा ने की। मंच पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनीषा सिंघई सहित अनेक गणमान्य चिकित्सक उपस्थित रहे। मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ, माल्यार्पण एवं सम्मान पत्रों के साथ स्वागत किया गया।
50 वर्षों की चिकित्सा साधना का सम्मान
कार्यक्रम का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह रहा जब चिकित्सा क्षेत्र में 50 वर्षों की उल्लेखनीय एवं सतत सेवाएं देने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अशोक मिश्रा को विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया।नीमा संगठन की परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष ऐसे चिकित्सक का सम्मान किया जाता है जिसने अपने जीवन के पांच दशक चिकित्सा सेवा को समर्पित किए हों। इस वर्ष यह सम्मान डॉ. अशोक मिश्रा को शाल, श्रीफल और अभिनंदन पत्र प्रदान कर दिया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. मिश्रा भावुक नजर आए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में सफलता का आधार केवल ज्ञान नहीं, बल्कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता और समर्पण भी है। उन्होंने युवा चिकित्सकों को सलाह दी कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार को कभी नहीं भूलना चाहिए।उन्होंने कहा कि सम्मान तभी सार्थक होता है जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करता रहे। उन्होंने अपने पांच दशक लंबे चिकित्सकीय जीवन के कई संस्मरण भी साझा किए।
संगठन की मजबूती ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता
मुख्य अतिथि डॉ. भरत शिवहरे ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि चिकित्सा क्षेत्र आज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, बदलती जीवनशैली, नई बीमारियां और मरीजों की बढ़ती अपेक्षाएं चिकित्सकों के सामने नई परिस्थितियां उत्पन्न कर रही हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे समय में संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। चिकित्सकों को आपसी संवाद, सहयोग और एकजुटता बनाए रखनी चाहिए।
अपने लंबे अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब उन्होंने चिकित्सा सेवा प्रारंभ की थी तब सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन मरीजों और चिकित्सकों के बीच विश्वास का संबंध अत्यंत मजबूत था। उन्होंने हिमालया कंपनी के प्रसिद्ध उत्पाद लिव-52 का उल्लेख करते हुए कहा कि अपने शुरुआती चिकित्सकीय जीवन में वे नियमित रूप से इसे मरीजों को लिखते थे और इसके सकारात्मक परिणाम देखते आए हैं।
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का संतुलन समय की मांग
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नीमा जिलाध्यक्ष डॉ. सी.एल. नेमा ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान लगातार विकसित हो रहा है, लेकिन भारतीय चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की संपूर्ण पद्धति है। वर्तमान समय में लोग फिर से प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद की ओर लौट रहे हैं।डॉ. नेमा ने संगठन की एकता पर बल देते हुए कहा कि यदि चिकित्सक संगठित रहेंगे तो समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा। उन्होंने युवा चिकित्सकों को संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की प्रेरणा दी।
हिमालया कंपनी ने साझा किया गुणवत्ता और अनुसंधान का सफर
कार्यक्रम में हिमालया कंपनी की ओर से आयोजित विशेष तकनीकी सत्र भी आकर्षण का केंद्र रहा। कंपनी के प्रतिनिधि निशांत मिश्रा ने हिमालया के इतिहास, अनुसंधान कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि भारतीय जड़ी-बूटियों पर आधारित उत्पादों ने वैश्विक स्तर पर अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई है। उन्होंने विभिन्न उत्पादों की उपयोगिता और गुणवत्ता मानकों की जानकारी भी चिकित्सकों को प्रदान की।
योग दिवस को लेकर दिया विशेष संदेश
आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनंत राम पटेल ने आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 14 जून से 21 जून तक विशेष योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 45 मिनट का योग प्रशिक्षण मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने सभी चिकित्सकों एवं आम नागरिकों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।डॉ. पटेल ने कहा कि योग आज केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में स्वास्थ्य संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन चुका है। नियमित योग से अनेक बीमारियों से बचाव संभव है और मानसिक तनाव भी कम होता है।
नवोदित चिकित्सकों का हुआ अभिनंदन
समारोह में संगठन के नए सदस्यों डॉ. मयंक असाटी, डॉ. हर्ष दुबे एवं डॉ. श्रुति दुबे का भी सम्मान किया गया। वरिष्ठ चिकित्सकों ने उनका स्वागत करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने की शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर युवा चिकित्सकों ने संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने का संकल्प लिया।
अनुभवों की पाठशाला बना सम्मेलन
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपने दशकों पुराने अनुभवों को युवा पीढ़ी के साथ साझा किया। चिकित्सकों ने बताया कि किस प्रकार बदलते समय के साथ चिकित्सा पद्धतियां विकसित हुईं और नई चुनौतियां सामने आईं।वरिष्ठ चिकित्सकों ने चिकित्सा नैतिकता, मरीजों के प्रति व्यवहार, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी महत्वपूर्ण विचार रखे। इन अनुभवों ने युवा चिकित्सकों को सीखने और प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया।
गीत-संगीत ने बांधा समां
गंभीर विषयों पर चर्चा के साथ-साथ कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी समां बांध दिया। युवा चिकित्सकों द्वारा प्रस्तुत गीत-संगीत और मनोरंजक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्साहपूर्ण बना दिया।चिकित्सकों ने भी इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों का तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साहवर्धन किया।
जिले भर के चिकित्सकों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति

कार्यक्रम में डॉ. अनिल चौधरी, डॉ. आर.पी. श्रीवास्तव, डॉ. तौफीक खान, डॉ. सोनी, डॉ. श्रीपद शिंदे, डॉ. शिव मिश्रा, डॉ. राहुल जैन, डॉ. प्रद्युम्न नेमाड़े, डॉ. नवनीत जैन, डॉ. सत्यम पटेल, डॉ. आशीष खरे, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. रामनारायण असाटी, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. नीरज विश्वास, डॉ. योगेश पटेल, डॉ. एस.सी. सिंघई सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने सहभागिता की।
सफल संचालन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का कुशल संचालन संगठन के मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ चौधरी ने किया। उन्होंने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और रोचक ढंग से संचालित किया। अंत में डॉ. आर.के. जैन ने उपस्थित सभी अतिथियों, चिकित्सकों, प्रायोजकों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
चिकित्सा सेवा, संगठन और संस्कारों का अनूठा संगम
नीमा का यह वार्षिक सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह चिकित्सा सेवा, संगठनात्मक एकता, अनुभवों के आदान-प्रदान, आयुर्वेद, योग और मानवीय मूल्यों का जीवंत मंच बन गया। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभवों और युवा चिकित्सकों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा केवल रोजगार नहीं बल्कि समाज और मानवता की सेवा का पवित्र दायित्व है।
