झुग्गी में पहुंचा प्रशासन, फूल बाई ने कलेक्टर के सिर पर हाथ फेरकर दिया आशीर्वाद, भावुक हुआ पूरा माहौल
(डॉ. एल.एन.वैष्णव)
दमोह में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासन और आमजन के बीच संबंधों को नई संवेदनशीलता के साथ सामने ला दिया। सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा सुनने के बाद प्रताप नारायण यादव स्वयं झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली वृद्ध महिला फूल बाई के घर पहुंचे और उन्हें वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृति पत्र सौंपते हुए 8 माह की लंबित राशि खाते में जमा होने की जानकारी दी।
इस दौरान वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे। बुजुर्ग महिला फूल बाई ने कलेक्टर को बेटे की तरह स्नेह देते हुए उनके सिर और चेहरे पर हाथ फेरकर बुंदेलखंडी अंदाज में आशीर्वाद दिया। माहौल इतना भावुक था कि आसपास मौजूद महिलाओं और अधिकारियों की आंखें भी नम हो गईं।इस अवसर पर जनपद पंचायत दमोह के सीईओ हलधर मिश्रा, जनसंपर्क अधिकारी वाय.ए. कुरैशी,स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कलेक्टर ने मौके पर बस्ती के लोगों से भी सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
जनसुनवाई में पहुंची थी फूल बाई
जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व फूल बाई अपने लगभग 10-11 वर्षीय नाती के साथ जनसुनवाई में पहुंची थीं। नाती के हाथ में प्लास्टर बंधा हुआ था। वृद्ध महिला ने कांपती आवाज में बताया था कि उनकी वृद्धावस्था पेंशन पिछले 8 महीनों से बंद है। कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई।उन्होंने बताया कि पेंशन बंद होने के कारण दवाई, राशन और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया था। गरीबी और असहाय स्थिति के बीच वह लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर थीं।जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी बताया कि महिला कई बार संबंधित विभाग में जा चुकी थीं, लेकिन हर बार तकनीकी कारण बताकर उन्हें लौटा दिया जाता था।
“फिंगरप्रिंट नहीं मिल रहे” कहकर कर दिया गया था मामला बंद
मामले की जांच में सामने आया कि सामाजिक न्याय विभाग के स्तर पर महिला की e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। अधिकारियों ने यह कहते हुए मामला लगभग बंद कर दिया था कि वृद्ध महिला के फिंगरप्रिंट मशीन में मैच नहीं हो रहे हैं।यहां तक कि पोर्टल पर पंचनामा अपलोड कर दिया गया था कि तकनीकी कारणों से प्रक्रिया संभव नहीं है।जब यह जानकारी कलेक्टर प्रताप नारायण यादव तक पहुंची, तो उन्होंने इसे केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही माना।उन्होंने तत्काल ई-गवर्नेंस मैनेजर और आधार केंद्र प्रभारी को मौके पर बुलाकर निर्देश दिए कि हर संभव प्रयास किया जाए और किसी भी पात्र हितग्राही को केवल तकनीकी कारणों से योजनाओं से वंचित न रहने दिया जाए।
हाथ धुलवाए, सभी उंगलियों से कराया मिलान
कलेक्टर के निर्देश पर महिला के हाथ साफ करवाए गए और एक-एक कर सभी दस उंगलियों से फिंगरप्रिंट मिलाने का प्रयास किया गया। लंबे समय तक लगातार प्रयास चलते रहे। अधिकारियों की टीम भी सक्रिय रही।आखिरकार लगातार कोशिशों के बाद महिला की e-KYC सफल हुई और वृद्धावस्था पेंशन पुनः स्वीकृत कर दी गई।कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों से कहा कि यदि संवेदनशीलता और इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए तो अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है। उन्होंने दो टूक कहा कि तकनीकी कारणों का हवाला देकर पात्र हितग्राहियों को परेशान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए 8 माह की पेंशन राशि के बराबर पेनल्टी लगाने के निर्देश दिए।यह राशि संबंधित कर्मचारियों से वसूलकर सीधे फूल बाई के बैंक खाते में जमा कराई गई।कलेक्टर ने कहा कि किसी गरीब और असहाय वृद्ध महिला को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना गंभीर प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से मांगी माफी
फूल बाई को पेंशन स्वीकृति पत्र सौंपते समय कलेक्टर ने बेहद विनम्रता के साथ कहा कि प्रशासनिक तंत्र की गलती के कारण उन्हें जो परेशानी उठानी पड़ी, उसके लिए पूरा प्रशासन उनसे माफी मांगता है।कलेक्टर की यह संवेदनशीलता देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित नजर आए।स्थानीय महिलाओं ने कहा कि आमतौर पर अधिकारी शिकायत सुनते हैं, लेकिन पहली बार किसी कलेक्टर को गरीब की झुग्गी में पहुंचकर माफी मांगते देखा गया।
जब फूल बाई ने दिया मां जैसा आशीर्वाद
जब कलेक्टर ने फूल बाई के पास बैठकर उन्हें पेंशन स्वीकृति पत्र सौंपा और बताया कि 8 महीने की राशि उनके खाते में जमा करा दी गई है, तो महिला भावुक हो उठीं।
आसपास मौजूद महिलाओं ने मुस्कुराते हुए कहा—
“फूल बाई, अब आशीर्वाद देओ अपने साब खों…”
इसके बाद फूल बाई ने बड़े आत्मीय भाव से कलेक्टर के सिर और चेहरे पर हाथ फेरते हुए कहा—
“हे भगवान… हे मोरे भगवान… मोरे साब खुश रहो… तोहका भगवान लंबी उमर देय… तो जइसन बेटवा सबके भाग मा होय…”
वह बार-बार कलेक्टर को दुआएं देती रहीं। ऐसा लग रहा था मानो कोई मां अपने बेटे को स्नेह और आशीर्वाद दे रही हो।
कलेक्टर ने भी झुककर लिया आशीर्वाद
फूल बाई से आशीर्वाद लेते समय कलेक्टर प्रताप नारायण यादव भी बेहद भावुक और विनम्र नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर वृद्ध महिला का अभिवादन स्वीकार किया।
उन्होंने कहा—
“माई, अब तोहका दफ्तरन के चक्कर नई काटना परिहैं। कोई भी परेशानी होय तो सीधे बतायो। प्रशासन तुम सबके साथ है।”
यह सुनकर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं और प्रशासन की इस पहल की सराहना की।
बस्ती के लोगों से भी किया संवाद
कलेक्टर ने मौके पर आसपास रहने वाले लोगों से भी बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या किसी अन्य पात्र व्यक्ति की पेंशन बंद है या कोई शासन की योजनाओं से वंचित है।स्थानीय रहवासियों ने पेयजल, राशन, आवास और पेंशन से जुड़ी कुछ समस्याएं भी बताईं, जिनके निराकरण के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए।कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्यालयों में बैठकर काम करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचकर समाधान देना है।
“सेवा एवं आशीर्वाद” अभियान की घोषणा
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि फूल बाई का मामला केवल एक उदाहरण है। जिले में ऐसे कई पात्र लोग हो सकते हैं जो तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जिलेभर में 1,664 संभावित पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार की है।उन्होंने बताया कि आगामी सोमवार से जिले में विशेष “सेवा एवं आशीर्वाद” अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत गांव-गांव और वार्ड-वार्ड विशेष शिविर लगाए जाएंगे।इन शिविरों में जनपद पंचायत सीईओ, नगरीय निकायों के सीएमओ, ग्राम पंचायत सचिव, सरपंच, रोजगार सहायक, सामाजिक न्याय विभाग के कर्मचारी और आधार केंद्र प्रभारी संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
“एक भी पात्र व्यक्ति वंचित नहीं रहेगा”
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का एक भी पात्र व्यक्ति शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे।उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गरीब, वृद्ध, दिव्यांग और असहाय लोगों के मामलों को प्राथमिकता से लिया जाए और उन्हें सम्मानपूर्वक योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।शुक्रवार को फूल बाई की झुग्गी में जो दृश्य देखने को मिला, उसने यह संदेश दिया कि संवेदनशील प्रशासन केवल आदेशों से नहीं, बल्कि लोगों के बीच पहुंचकर उनकी पीड़ा समझने से बनता है।
