इंदौर/भोपाल। इंदौर नगर निगम की बजट बैठक में कांग्रेस की महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर किए गए कथित अपमान का मामला अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। दो दिनों से प्रदेश कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे कांग्रेस का “दोहरे चरित्र” का उदाहरण बताते हुए तीखा हमला बोला है।
बताया जा रहा है कि बैठक के बाद इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा कार्रवाई का प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद प्रदेश संगठन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाया है। इससे पार्टी के भीतर इंदौर से लेकर भोपाल तक असमंजस और खींचतान की स्थिति बन गई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने अपने प्रवक्ताओं और नेताओं को इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से भी रोक दिया है।
विवाद के केंद्र में रहीं पार्षद रुबीना खान और फौजिया शेख अपने बयान पर अब भी कायम बताई जा रही हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
संगठन ने माना भाषा अक्षम्य
प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले ने पार्षदों की भाषा को “दुर्भाग्यपूर्ण और अक्षम्य” बताया है। हालांकि, अंतिम कार्रवाई को लेकर निर्णय दिल्ली स्तर पर होना बताया जा रहा है, जिससे प्रदेश नेतृत्व की स्थिति और दुविधापूर्ण हो गई है।
बीजेपी ने खोला मोर्चा, एफआईआर की तैयारी
वहीं भाजपा ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए दोनों पार्षदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा के इंदौर शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्षदों के निष्कासन की मांग की है। साथ ही भाजपा विधायक और हिंदू संगठनों ने भी विरोध तेज कर दिया है।
सीएम का तीखा बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “महिला पार्षदों ने बेशर्मी की हद पार कर दी है। कांग्रेस को अपने दोहरे चरित्र से बाहर आना चाहिए। यदि कार्रवाई नहीं होती तो कांग्रेस नेतृत्व को इस्तीफा दे देना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि देशभक्तों ने भारत माता की जय कहते हुए अपने प्राण न्योछावर किए हैं और इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं।
पटवारी का बचाव और जवाब
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का महत्व किसी से सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के हर अधिवेशन में इनका सम्मान किया जाता है और इस पर “सर्टिफिकेट” लेने की आवश्यकता नहीं है।
पटवारी ने यह भी कहा कि संबंधित बयान पार्टी के संज्ञान में है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में माहौल गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
