भारत की आर्थिक प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक जटिल और दंडात्मक कानूनी ढांचा रहा है, जिसने दशकों तक उद्योग जगत, उद्यमियों और आम नागरिकों को उलझाए रखा। जन विश्वास (उपबंध संशोधन) विधेयक–2026 इसी जकड़न को ढीला करने का एक बड़ा प्रयास है। 79 केंद्रीय कानूनों में 1000 से अधिक प्रावधानों को संशोधित या गैर-आपराधिक बनाना यानी शासन की मानसिकता में बदलाव का यह शुभ संकेत है। यह विधेयक न्यायिक बोझ को कम करने की उम्मीद जगाता है। यह भी एक सच है कि भारत का उद्योग जगत लंबे समय से ‘ओवर-रेगुलेशन’ और ‘क्रिमिनलाइजेशन ऑफ कंप्लायंस’ की समस्या से जूझता रहा है। छोटे-छोटे प्रशासनिक उल्लंघनों को भी आपराधिक अपराध बना देने की प्रवृत्ति ने व्यापारियों के मन में एक स्थायी भय पैदा करके रखा है। एक साधारण फाइलिंग में देरी, किसी लाइसेंस की तकनीकी कमी या रिपोर्टिंग में मामूली त्रुटि भी कई बार आपराधिक मुकदमे का कारण बन जाती थी। इसका परिणाम प्राय: यही हुआ कि उद्योग चलाने की ऊर्जा का बड़ा हिस्सा नवाचार या विस्तार में न लगकर कानूनी जोखिमों को संभालने में खर्च होता रहा है।
विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इस व्यवस्था के सबसे बड़े शिकार रहे हैं। इनके पास न तो बड़े कॉर्पोरेट घरानों जैसी कानूनी टीमें होती हैं और न ही जटिल नियमों को समझने की पर्याप्त क्षमता। ऐसे में एक छोटी गलती भी इनके लिए भारी आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बन जाती है। कई मामलों में उद्यमी वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाते रहे, जिससे उनका व्यवसाय ठप पड़ गया। यही कारण है कि भारत में ‘इंस्पेक्टर राज’ और ‘रेड टेप’ जैसे शब्द प्रचलित हुए। ऐसे में यह जन विश्वास विधेयक–2026 इस स्थिति को बदलने का दावा करता है। इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में अपराधों को गैर-आपराधिक बनाया गया है, साथ ही इसमें आर्थिक दंड और चेतावनी आधारित प्रणाली पर जोर दिया गया है। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जहां अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएं छोटे उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड की बजाय आर्थिक दंड को प्राथमिकता देती हैं।
वास्तुत: इस विधेयक का एक और महत्वपूर्ण पहलू ‘फेसलेस एडजुडिकेशन’ और ‘डिजिटल कंप्लायंस’ की दिशा में बढ़ता कदम है। यदि इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे भ्रष्टाचार और मनमानी की संभावना कम हो सकती है। साथ ही व्यवसायों को एक पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य वातावरण मिलेगा, जो निवेश के लिए अत्यंत आवश्यक है। न्यायपालिका के संदर्भ में देखें तो यह विधेयक अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि इसके प्रभावी होने से न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में एक दम से कमी आएगी। इसका कारण बिल्कुल साफ है, ज्यादातर प्रकरण गंभीर अपराधों से संबंधित नहीं हैं, वे प्रशासनिक या तकनीकी उल्लंघनों से जुड़े हैं। इन मामलों को गैर-आपराधिक बनाकर अदालतों का बोझ कम किया जाना संभव होगा, वहीं न्याय की गति भी तेज होगी।
इसके अतिरिक्त, उद्योग जगत की एक और बड़ी समस्या ‘मल्टीपल रेगुलेटरी ओवरलैप’ की रही है। एक ही विषय पर कई कानून और अलग-अलग एजेंसियों की निगरानी ने अनुपालन को अत्यंत जटिल बना दिया है। जन विश्वास विधेयक इस दिशा में एक बढ़ता हुआ कदम है। वास्तव में आज यह दर्शाता है कि सरकार अब उद्योगों और नागरिकों को ‘संभावित अपराधी’ के रूप में देखना नहीं चाहती है, केंद्र सरकार का मनोगत है कि वह सभी व्यापारियों, उद्योजकों को ‘विश्वसनीय भागीदार’ के रूप में देखे। कुल मिलाकर जन विश्वास विधेयक–2026 को देश हित में एक व्यापक सुधार प्रक्रिया के हिस्से के रूप में समझना चाहिए। भारत के व्यापारिक जगत के लिए यह एक सकारात्मक शुरुआत है। एक ऐसा कदम, जोकि भारत को दंडात्मक शासन से विश्वास-आधारित शासन की ओर ले जाने की क्षमता रखता है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज सही कह रहे हैं कि “जन विश्वास विधेयक 2026 वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘जीवन जीने की आसानी’ और ‘कारोबार की आसानी’ को बढ़ावा देने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।” इन संशोधनों से अनुपालन (कंप्लायंस) का कम बोझ नागरिकों, एमएसएमई, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा, जिससे एक अधिक सक्षम और पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण होगा। सही भी है, जन विश्वास विधेयक—दो विश्वास-आधारित शासन का एक नया युग है। इस विधेयक में देश भर की अदालतों में लंबित अनुमानित 05 करोड़ मुकदमों का बोझ कम होने की संभावना है। इस विधेयक के जरिए कुल 79 केंद्रीय कानूनों में 1000 उपबंधों को संशोधित, समाप्त या उनमें आपराधिक कार्रवाई के प्रावधानों को समाप्त किया जा रहा है। इनमें से छह कानून अंग्रेजों के जमाने के हैं। जन विश्वास विधेयक-1 में कुल विभिन्न कानूनों के कुल 183 उपबंधों में संशोधन का असर बहुत सकारात्मक रहा है। 12 राज्यों ने अपने कानूनों को लेकर जन विश्वास विधेयक लाने की प्रक्रिया में हैं।
