15 अगस्त के ध्वजारोहण के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, झंडे की स्थिति और उसे दोबारा लगाने के तरीके पर गंभीर सवाल; आपत्ति करने वाले से बहस का वीडियो भी सामने आया, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
दमोह/हटा। जिस तिरंगे को 15 अगस्त के दिन पूरा देश सम्मान के साथ सलाम कर रहा था, उसी राष्ट्रध्वज की गरिमा को लेकर दमोह जिले के हटा क्षेत्र के रजपुरा स्थित कस्तूरबा गांधी छात्रावास का एक वायरल वीडियो अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्वतंत्रता दिवस पर हुए ध्वजारोहण से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में राष्ट्रध्वज की स्थिति, उसके नीचे गिरने और बाद में उसे दोबारा लगाए जाने के तरीके को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के अनुसार ध्वजारोहण के दौरान झंडा नीचे गिरने के बाद उसे दोबारा लगाया जाता दिखाई दे रहा है। सवाल यह है कि जब बात राष्ट्रध्वज की हो, तो क्या उसे किसी सामान्य झंडे की तरह दोबारा स्थापित किया जाना उचित है? क्या राष्ट्रीय ध्वज को संभालने और पुनः स्थापित करने के दौरान उसकी गरिमा और निर्धारित मर्यादाओं का ध्यान नहीं रखा जाना चाहिए था?
एक अन्य वीडियो में झंडे पर गंदगी होने का दावा करते हुए ध्वजारोहण की व्यवस्था पर आपत्ति जताई जा रही है। इसी दौरान एक व्यक्ति से बहस का वीडियो भी सामने आया है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बहस करते दिखाई दे रहा व्यक्ति छात्रावास अधीक्षक का पति है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सवाल सिर्फ झंडा गिरने का नहीं, उसे संभालने के तरीके का भी है
यहां सवाल यह नहीं है कि झंडा किसी तकनीकी कारण से गिरा या किसी अन्य वजह से। सवाल यह है कि झंडा गिरने के बाद उसे किस सम्मान और सावधानी के साथ संभाला गया?
ध्वज चाहे किसी राजनीतिक दल का हो, किसी सामाजिक संगठन का हो या किसी धार्मिक आयोजन का—वह अपने संदर्भ में पहचान और सम्मान का प्रतीक होता है। लेकिन जब बात भारत के राष्ट्रध्वज की आती है तो जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। तिरंगा किसी संस्था, व्यक्ति या राजनीतिक विचारधारा का नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है।
तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण से पहले राष्ट्रध्वज की स्थिति और पूरी व्यवस्था की जांच की गई थी? अगर झंडे पर गंदगी थी तो जिम्मेदारों ने उसे पहले क्यों नहीं देखा? अगर ध्वजारोहण के दौरान झंडा गिरा तो उसे संभालने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं? और अगर उसे दोबारा लगाया गया तो क्या उस समय राष्ट्रध्वज की गरिमा का पूरा ध्यान रखा गया?
कानून में भी राष्ट्रध्वज के सम्मान को लेकर प्रावधान
भारत में राष्ट्रध्वज के प्रदर्शन और सम्मान से संबंधित नियम Flag Code of India, 2002 में निर्धारित हैं। वहीं Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत राष्ट्रध्वज के अपमान से संबंधित प्रावधान हैं। कानून के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान हो सकता है।
हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को कानूनन दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह जांच का विषय है कि वीडियो में दिखाई दे रहा घटनाक्रम किन परिस्थितियों में हुआ और क्या किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है।
क्या प्रशासन लेगा वायरल वीडियो का संज्ञान?
रजपुरा के कस्तूरबा गांधी छात्रावास का मामला अब केवल सोशल मीडिया की चर्चा बनकर नहीं रहना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रध्वज से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
कार्यक्रम में मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से जानकारी ली जाए, उपलब्ध वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि झंडा किन परिस्थितियों में गिरा तथा बाद में उसे किस तरीके से पुनः स्थापित किया गया।
यदि यह सामान्य तकनीकी चूक थी तो उसकी वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए। यदि लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि जांच में राष्ट्रध्वज के सम्मान से संबंधित कानून का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आखिर तिरंगे के सम्मान की जिम्मेदारी किसकी?
15 अगस्त को हर बच्चा, हर नागरिक और हर संस्था तिरंगे को सम्मान देने की बात करता है। स्कूलों और छात्रावासों में बच्चों को राष्ट्रध्वज के सम्मान का पाठ पढ़ाया जाता है।
लेकिन जब उसी छात्रावास में ध्वजारोहण के दौरान ऐसी तस्वीरें सामने आएं तो सवाल उठना जरूरी है।
क्या राष्ट्रध्वज को केवल फहरा देना ही जिम्मेदारी है?
क्या झंडे की स्थिति और ध्वजारोहण की पूरी प्रक्रिया की पहले से जांच करना जिम्मेदारों का कर्तव्य नहीं?
क्या झंडा नीचे गिरने के बाद उसे उसी सम्मान और मर्यादा के साथ संभालना जरूरी नहीं?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर तिरंगे की गरिमा के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले ही सावधानी नहीं बरतेंगे, तो बच्चों और समाज को राष्ट्रध्वज के सम्मान का संदेश कौन देगा?
फिलहाल वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की भूमिका भी आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। लेकिन सवाल गंभीर है और जवाब प्रशासनिक जांच से ही मिलना चाहिए। राष्ट्रध्वज के सम्मान का विषय किसी राजनीति, व्यक्तिगत विवाद या बहस से ऊपर है—यह पूरे देश के सम्मान से जुड़ा विषय है।
