दमोह की सड़कों पर किसका राज?दमोह में यातायात की सख्ती पर सवाल?
(डॉ एल एन वैष्णव)

दमोह। शहर में सड़क सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस द्वारा लगातार सख्ती का दावा किया जा रहा है। जनवरी और फरवरी माह में दो हजार से अधिक चालान काटे गए और 10 लाख रुपये से अधिक की जुर्माना राशि वसूल की गई। विभाग इसे सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि बता रहा है।लेकिन इसी शहर के बीचों-बीच नो एंट्री जोन में भारी वाहनों की निर्बाध आवाजाही प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आमजन में चर्चा है कि क्या कानून का पालन सबके लिए समान है या कार्रवाई चयनात्मक तरीके से की जा रही है।
दो माह का पूरा लेखा-जोखा
यातायात विभाग के अनुसार जनवरी माह में 1 से 31 जनवरी तक कुल 1228 चालान काटे गए, जिनसे 5 लाख 83 हजार 700 रुपये की वसूली हुई। इनमें 974 हेलमेट उल्लंघन के मामले, सीट बेल्ट, ओवरस्पीड, बिना बीमा, ड्रिंक एंड ड्राइव, रॉन्ग साइड और बिना एचएसआरपी के प्रकरण शामिल हैं।वहीं फरवरी माह में 25 फरवरी तक करीब 900 चालान किए गए और लगभग 4 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। हेलमेट उल्लंघन के 700 से अधिक मामले सामने आए, जबकि अन्य उल्लंघनों में भी कार्रवाई की गई।कुल मिलाकर जनवरी से 25 फरवरी तक 2 हजार से अधिक चालान और 10 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली दर्ज की गई है। यातायात थाना प्रभारी का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूली नहीं बल्कि सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता लाना है।
नो एंट्री जोन में खुला उल्लंघन
आंकड़ों की इस सख्ती के बीच शहर का एक दूसरा चेहरा भी सामने आ रहा है। नगर के मध्य जिन मार्गों को नो एंट्री घोषित किया गया है, वहां प्रतिदिन भारी वाहनों की आवाजाही देखी जा रही है।किल्लाई नाका से प्रवेश कर सरस्वती स्कूल क्षेत्र, रेस्ट हाउस के सामने, न्यायालय परिसर, कीर्ति स्तंभ और मानस भवन तक ट्रक और डंपर गुजरते देखे जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ये वाहन नियमित रूप से प्रतिबंधित मार्गों का उपयोग कर रहे हैं, जबकि नियम स्पष्ट रूप से भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाते हैं।

यातायात पुलिस पर सीधे सवाल
इस स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं—
- क्या भारी वाहनों को विशेष छूट दी गई है?
- यदि अनुमति है तो उसका आधार क्या है?
- अब तक कितने भारी वाहनों पर कार्रवाई हुई?
- क्या सख्ती केवल दोपहिया चालकों तक सीमित है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
चयनात्मक कार्रवाई का आरोप

शहरवासियों का आरोप है कि बाहर से आने वाले वाहन यदि अनजाने में नो एंट्री में प्रवेश कर जाएं तो तत्काल चालान किया जाता है, लेकिन नियमित रूप से गुजरने वाले भारी वाहनों पर कार्रवाई नजर नहीं आती।यदि यह स्थिति सही है तो “कानून सबके लिए समान” का सिद्धांत कमजोर पड़ता दिखाई देता है।
सड़क सुरक्षा या राजस्व वसूली?
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कार्रवाई केवल हेलमेट और सीट बेल्ट तक सीमित रह जाए और गंभीर उल्लंघनों पर अनदेखी हो, तो सड़क सुरक्षा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। नो एंट्री जोन में भारी वाहनों की आवाजाही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकती है।

पारदर्शिता की मांग
शहर में बढ़ते सवालों के बीच अब मांग उठ रही है कि
- नो एंट्री में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए
- उन पर हुई कार्रवाई के आंकड़े जारी किए जाएं
- यदि विशेष अनुमति दी गई है तो उसकी जानकारी स्पष्ट की जाए
निष्कर्ष
दमोह में यातायात व्यवस्था को लेकर सख्ती के दावों के बीच नो एंट्री जोन में भारी वाहनों की आवाजाही व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। नियमों का पालन बिना भेदभाव के कराया जाए तभी सख्ती प्रभावी मानी जाएगी।अब देखना यह है कि प्रशासन इन सवालों पर क्या रुख अपनाता है — सख्त और समान कार्रवाई, या फिर आंकड़ों के सहारे संतुष्टि। दमोह की सड़कों पर कानून की असली परीक्षा अब शुरू होती है।
