सतना/सतना-चित्रकूट फोरलेन सड़क निर्माण के बीच चितहरा मोड़ पर खड़ा दुर्लभ पीले फूलों वाला पलाश का पेड़ खतरे में पड़ गया है। प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण में इस अनोखे वृक्ष को हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ गई है।बताया जा रहा है कि यह पीले फूलों वाला पलाश प्रदेश में अपनी तरह का अत्यंत दुर्लभ पेड़ माना जाता है। सामान्यतः पलाश के फूल लाल या नारंगी रंग के होते हैं, जबकि पीले रंग का पलाश बहुत कम देखने को मिलता है। यही वजह है कि इसे जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस वृक्ष को बचाने के लिए दीनदयाल शोध संस्थान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने सुझाव दिया है कि सड़क का डिजाइन थोड़ा बदलकर इस पेड़ को सुरक्षित रखा जा सकता है, ताकि विकास कार्य भी प्रभावित न हो और प्राकृतिक धरोहर भी बची रहे।संस्थान ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि इस प्रजाति को संरक्षित करने के लिए टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग किया जाए। जानकारी के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां और आरोग्यधाम चित्रकूट में इसके बीजों से पौधे तैयार किए गए हैं, लेकिन अभी उनमें फूल नहीं आए हैं। इससे इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ गई है।स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह पेड़ न केवल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्र की पहचान भी बन चुका है। इसलिए इसे प्राकृतिक धरोहर घोषित कर सुरक्षित रखने की मांग तेज हो गई है।
