जागेश्वरनाथ धाम में अतिक्रमण के मुद्दे पर गरमाई बहस, शंकर गौतम और सरपंच सुनील डबलुया के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप
पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को करना पड़ा हस्तक्षेप, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की समझाइश के बाद शांत हुआ मामला
दमोह, 30 मई 2026विश्व प्रसिद्ध जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में शनिवार को आयोजित कॉरिडोर विकास परियोजना की समीक्षा बैठक उस समय विवादों के घेरे में आ गई, जब बैठक के दौरान दो पक्षों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को बीच-बचाव कर माहौल नियंत्रित करना पड़ा। बाद में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ और बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश सरकार बांदकपुर धाम को उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर कार्य कर रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे कॉरिडोर प्रोजेक्ट को दमोह जिले की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
क्या था बैठक का उद्देश्य?
शनिवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव बांदकपुर पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले कॉरिडोर निर्माण कार्यों का स्थल निरीक्षण किया और निर्माण एजेंसी की प्रगति का जायजा लिया। इसके बाद मंदिर कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर ट्रस्ट समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था—
- कॉरिडोर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा
- निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण
- समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने की रणनीति
- श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े सुझावों पर चर्चा
- स्थानीय समस्याओं और आपत्तियों का समाधान
लेकिन बैठक का फोकस जल्द ही विकास कार्यों से हटकर विवाद की ओर मुड़ गया।
अतिक्रमण के मुद्दे पर आमने-सामने आए दो पक्ष
बैठक के दौरान मंदिर परिसर और उसके आसपास कथित अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान शिवभक्त शंकर गौतम और ग्राम पंचायत सरपंच सुनील डबलुया के बीच तीखी बहस छिड़ गई।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए। शुरुआत में मामला केवल तर्क-वितर्क तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में माहौल इतना गर्म हो गया कि बैठक में मौजूद लोगों को हस्तक्षेप करना पड़ा।बैठक में मौजूद लोगों के अनुसार दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और किसी भी पक्ष ने पीछे हटने की कोशिश नहीं की। परिणामस्वरूप बैठक का मूल उद्देश्य पीछे छूट गया और आरोप-प्रत्यारोप का दौर केंद्र में आ गया।
कलेक्टर और अधिकारियों के सामने हुआ विवाद
घटना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह पूरा विवाद जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर प्रताप नारायण यादव की मौजूदगी में हुआ।बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। इसके बावजूद माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया।
मौजूद लोगों का कहना है कि विकास कार्यों पर चर्चा के लिए बुलाए गए मंच पर जिस तरह की बहस और तीखी भाषा का प्रयोग हुआ, उसने कई लोगों को असहज कर दिया।
पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को करना पड़ा हस्तक्षेप
जब विवाद बढ़ने लगा तो मौके पर मौजूद पुलिस बल और अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने सक्रियता दिखाई।उन्होंने दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा, लेकिन समय रहते हस्तक्षेप होने से कोई बड़ी अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई।पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की तत्परता के कारण बैठक को पुनः सामान्य स्थिति में लाया जा सका।
कलेक्टर ने संभाली स्थिति
माहौल बिगड़ता देख कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्वयं हस्तक्षेप किया।उन्होंने दोनों पक्षों को शांत रहने की समझाइश देते हुए कहा कि बांदकपुर धाम का विकास किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरे जिले और प्रदेश की आस्था का विषय है।कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को किसी विषय पर आपत्ति या सुझाव है तो उसे लोकतांत्रिक और वैधानिक तरीके से प्रशासन के समक्ष रखा जाना चाहिए।उनकी समझाइश के बाद दोनों पक्ष शांत हुए और बैठक की कार्यवाही पुनः शुरू की जा सकी।
बैठक का विवाद छोड़ गया कई अनुत्तरित सवाल
शनिवार की यह घटना केवल कुछ मिनटों का विवाद नहीं थी, बल्कि इसने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्रमुख सवाल
- विकास परियोजना की समीक्षा बैठक विवाद का मंच क्यों बन गई?
- क्या स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मतभेद मौजूद हैं जो अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं?
- बैठक विकास के एजेंडे से हटकर व्यक्तिगत आरोपों तक कैसे पहुंच गई?
- क्या सभी पक्ष वास्तव में बांदकपुर धाम के विकास को लेकर एकमत हैं?
- विकास कार्यों को लेकर असहमति है या केवल प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां हैं?
- सार्वजनिक मंच पर मर्यादा और संवाद की सीमाएं क्यों टूटीं?
विकास बनाम विवाद
स्थानीय लोगों का मानना है कि बांदकपुर धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में विकास कार्यों पर मतभेद होना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन संवाद की जगह टकराव का माहौल बनना चिंता का विषय है।लोगों का कहना है कि यदि सभी पक्ष वास्तव में धाम के विकास के पक्षधर हैं तो विवादों के बजाय समाधान खोजने की दिशा में प्रयास होने चाहिए।
निर्माण एजेंसी पर भी जताई नाराजगी
बैठक के दौरान कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी व्यक्त की।उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के बावजूद कई कार्य अधूरे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा हो सकती है। कलेक्टर ने संबंधित एजेंसी को नोटिस जारी करने और गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश भी दिए।साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के सुझावों को विकास योजनाओं में शामिल करने पर विशेष जोर दिया।
बांदकपुर धाम के विकास को लेकर प्रशासन गंभीर
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने दोहराया कि बांदकपुर धाम देश, प्रदेश और स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।उन्होंने कहा कि धाम को ऐसा स्वरूप दिया जाएगा जहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, सुगम दर्शन व्यवस्था और आकर्षक धार्मिक वातावरण मिल सके।प्रशासन का लक्ष्य बांदकपुर धाम को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में स्थापित करना है।
जनता की निगाहें अब आगे की कार्रवाई पर
फिलहाल विवाद शांत हो चुका है और बैठक में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है। लेकिन शनिवार की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है।लोग अब यह जानना चाहते हैं कि विकास परियोजना से जुड़े विवादों का समाधान किस प्रकार किया जाएगा, स्थानीय मतभेदों को कैसे दूर किया जाएगा और क्या भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।आस्था के केंद्र बांदकपुर धाम में हुई यह घटना फिलहाल पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। जनता की अपेक्षा है कि भविष्य में विकास, संवाद और सौहार्द की भावना के साथ यह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे बढ़ेगी।
