सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा प्रयास, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने किया शुभारंभ

दमोह, 9 मई 2026/राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह द्वारा शनिवार 9 मई को वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिले की समस्त न्यायालयों में किया गया। जिले भर में आयोजित इस महत्वपूर्ण न्यायिक आयोजन के लिए कुल 20 खंडपीठों का गठन किया गया है, जहां विभिन्न राजीनामा योग्य प्रकरणों का आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर निराकरण किया जा रहा है।
जिला मुख्यालय स्थित जिला न्यायालय परिसर में प्रातः 10:30 बजे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने मां वीणापाणि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर, पुष्प अर्पित करते हुए राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायालय परिसर में गरिमामय वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम में जिले के समस्त न्यायाधीशगण, अधिवक्ता संघ के जिला अध्यक्ष कमलेश भारद्वाज, वरिष्ठ अधिवक्तागण, न्यायालय परिवार के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में पक्षकार एवं आमजन उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत के शुभारंभ अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने कहा कि लोक अदालत आमजन को सस्ता, सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों का शीघ्र निराकरण होने से न केवल लोगों का समय और धन बचता है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द एवं भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने विवादों का निराकरण आपसी समझौते एवं सहमति के माध्यम से कर न्यायिक प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने में सहयोग करें।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में धनादेश अनादरण प्रकरण, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, विद्युत चोरी एवं बिजली संबंधी विवाद, भरण-पोषण से जुड़े प्रकरण, बैंक वसूली प्रकरण, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, दीवानी मामले तथा अन्य राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरणों को रखा गया है। इन मामलों में दोनों पक्षों की सहमति से त्वरित निराकरण किया जा रहा है, जिससे वर्षों से लंबित प्रकरणों का समाधान संभव हो पा रहा है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने यह भी कहा कि लोक अदालत केवल न्याय दिलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने और सामाजिक समरसता स्थापित करने का भी महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बार पिछली लोक अदालतों की तुलना में अधिक पारिवारिक विवादों का समाधान होगा और कई बिछड़े परिवार पुनः एक हो सकेंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधान न्यायाधीश सुभाष सोलंकी के नेतृत्व में सभी न्यायाधीशों ने जिला न्यायालय परिसर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए शिविरों का निरीक्षण किया। शिविरों में बैंक, विद्युत विभाग, बीमा संस्थान तथा अन्य विभागों से जुड़े अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने संबंधित मामलों के त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही की। न्यायाधीशों ने न्यायालय परिसर का भ्रमण कर लोक अदालत में पहुंचे पक्षकारों से सीधे संवाद भी किया तथा उन्हें समझाइश देकर आपसी सहमति से प्रकरण समाप्त करने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में पहुंचे कई पक्षकारों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वर्षों से लंबित मामलों का समाधान एक ही दिन में संभव होना उनके लिए राहत की बात है। लोक अदालत के माध्यम से उन्हें बिना अतिरिक्त खर्च एवं लंबी न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित न्याय प्राप्त हो रहा है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों, विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्यों एवं न्यायालय कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न्यायपालिका और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम है।
