मंदिरों के सरकारीकरण, भूमि नीलामी, समितिकरण और पुजारियों के अधिकारों को लेकर उठी बुलंद आवाज
उज्जैन, 10 जुलाई। मध्य प्रदेश के मठ-मंदिरों की सनातन परंपरा, पुजारियों के अधिकारों और मंदिर संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को महाकाल की नगरी उज्जैन में श्री वैष्णव वैरागी समाज चतुः संप्रदाय के नेतृत्व में हजारों पुजारियों और सनातन धर्मावलंबियों ने विशाल न्याय यात्रा निकाली। यात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर सरिता लाल को सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।
रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पुजारियों, महंतों और समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि मध्य प्रदेश के लगभग 60 हजार मंदिरों से जुड़े करीब 3 लाख पुजारी परिवार तथा लगभग 12 लाख सनातन धर्मावलंबी लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों और नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की परंपरागत व्यवस्था और पुजारियों के अधिकारों को लेकर लगातार शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
ज्ञापन में कहा गया कि मंदिरों की भूमि की नीलामी, मंदिरों के सरकारीकरण, मंदिर समितियों के गठन, भूमि को निस्तारी घोषित किए जाने, फसल हानि राहत एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से वंचित रहने सहित कई प्रशासनिक मुद्दों के कारण पुजारी समाज में व्यापक असंतोष है। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकारियों द्वारा शासन के निर्देशों का भी प्रभावी पालन नहीं किया जा रहा है।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सनातन परंपरा को सदियों से संरक्षित करने वाले पुजारी परिवार आज अपने अधिकारों और मंदिरों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की।
ज्ञापन में रखी गई सात प्रमुख मांगें
- गौ माता को राज्य संरक्षित एवं विशेष संरक्षण प्राप्त दर्जा दिया जाए।
- मंदिरों के सरकारीकरण की व्यवस्था समाप्त की जाए तथा राजस्व अभिलेखों में कलेक्टर को प्रबंधक बनाए जाने की व्यवस्था खत्म हो।
- मंदिरों की भूमि की नीलामी पर रोक लगाई जाए।
- मंदिरों में समितिकरण की व्यवस्था समाप्त की जाए।
- मंदिर भूमि को निस्तारी घोषित करने की प्रक्रिया समाप्त की जाए।
- पुजारियों को नामांतरण, कृषक का दर्जा, भू-माफियाओं से सुरक्षा तथा अन्य पात्र सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- मंदिर की मूर्तियों (ज्यूरिस्टिक पर्सन) के स्वामित्व वाली जिन भूमियों पर शासन का कब्जा है, उन्हें पूर्व रियासती अनुबंधों के अनुसार पुनः मंदिरों को उपलब्ध कराया जाए।
रैली में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर आगे भी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुधीर शास्त्री, वीरेंद्र बैरागी, मनोज शास्त्री, पंकज रामानुज (गुजरात), जितेन पाठक, ओम बैरागी, दीपक बैरागी, अजय बैरागी, सुनील बैरागी (मंदसौर), सत्यनारायण महंत, संदीप महंत, कैलाश बैरागी (देवास), पारस बैरागी (भोपाल), रमेश खंजरपुर, राजेश महंत (गौतमपुरा), वीरेन बैरागी, सुनीता बैरागी, हेमलता बैरागी, रेखा बैरागी, कल्पना बैरागी, पूजा बैरागी, निरंजन बैरागी, कान्हा बैरागी, गब्बू दास जी बैरागी सहित बड़ी संख्या में संत, महंत एवं समाजजन उपस्थित रहे।
