कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर मानस भवन का बंद कमरा खोला गया, सामग्री पूरी मिलने का दावा; सील टूटने और वर्षों तक सिस्टम के उपयोग न होने पर जिम्मेदारी अभी तय नहीं
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। नगर के स्थानीय मानस भवन में आज 9 सितंबर बुधवार को कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर कई वर्षों से बंद बताए जा रहे एक कमरे को खोला गया। इस कमरे में वर्ष 2015 में लोक निर्माण विभाग द्वारा नगर पालिका को उपलब्ध कराया गया लगभग 15 लाख रुपये कीमत का साउंड सिस्टम रखा होने की शिकायत सामने आई थी।शिकायत के अनुसार वर्ष 2015 में लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग 15 लाख रुपये की लागत से साउंड सिस्टम खरीदा गया था, जिसे नगर पालिका को उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि सिस्टम का उपयोग नहीं किया गया और नगर पालिका अपने विभिन्न कार्यक्रमों में बाहर से किराए पर साउंड सिस्टम लगवाती रही। इसके चलते नगर पालिका द्वारा किराए के साउंड सिस्टम के भुगतान पर भारी राशि खर्च किए जाने की बात शिकायतकर्ताओं ने कही थी।
शिकायत में यह भी बताया गया था कि जिस कमरे में साउंड सिस्टम रखा गया था, उसे सील कर बंद कर दिया गया था। मामले की जानकारी कलेक्टर प्रताप नारायण यादव तक पहुंचने के बाद उन्होंने जांच के लिए एक समिति गठित की और निर्धारित प्रक्रिया के तहत 9 सितंबर को बंद कमरे को खोलने की सूचना जारी की गई।
गंदगी और कबाड़ के बीच मिला साउंड सिस्टम

बुधवार को कमरा खोला गया तो अंदर गंदगी और कबाड़ के बीच साउंड सिस्टम से संबंधित सामग्री रखी मिली। मौके पर नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे, जबकि कुछ पत्रकार भी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। राजस्व विभाग के अधिकारी कमरा खोले जाने के बाद मौके पर पहुंचे।कमरा खुलने के बाद नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राजेंद्र सिंह लोधी ने दावा किया कि साउंड सिस्टम की पूरी सामग्री मौके पर मिली है।
सील कैसे टूटी, जवाब स्पष्ट नहीं

मौके पर सबसे अहम सवाल कमरे के ताले पर लगी सील को लेकर सामने आया। जब सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी से पूछा गया कि कमरे की सील किस तरह टूटी और इसे किसने खोला, तो वे इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।उन्होंने कहा कि यह उनके कार्यकाल का विषय नहीं है। हालांकि उन्होंने सामग्री पूरी मिलने की बात कही। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कमरा सील बंद था तो सील कब और कैसे टूटी तथा इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
बिना मिलान के सामग्री पूरी होने का दावा
लोक निर्माण विभाग की अधिकारी ने भी कमरे के खुलते ही साउंड सिस्टम की सामग्री पूरी होने की बात कही। हालांकि मौके पर उस समय सामग्री का विस्तृत मिलान संबंधित सूची से शुरू नहीं हुआ था।अधिकारी का कहना था कि सामान की कीमत से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि सामान मिला है। अब उपलब्ध सामग्री का सूची से मिलान किया जाएगा, जिसके बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
साउंड सिस्टम का अब क्या होगा?

सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि मानस भवन की समिति के अध्यक्ष कलेक्टर दमोह हैं। समिति के पदाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद यह तय किया जाएगा कि साउंड सिस्टम का उपयोग किस प्रकार और किसके द्वारा किया जाएगा।
10 साल तक बंद रहा सिस्टम, जिम्मेदारी कौन लेगा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2015 में लाखों रुपये की लागत से नगर पालिका को उपलब्ध कराया गया साउंड सिस्टम करीब एक दशक तक बंद कमरे में क्यों पड़ा रहा?यदि नगर पालिका के कार्यक्रमों में लगातार किराए के साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और उसके भुगतान किए गए, तो नगर पालिका के पास उपलब्ध सरकारी साउंड सिस्टम का उपयोग क्यों नहीं किया गया—यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।साथ ही कमरे की सील टूटने, इतने वर्षों तक सरकारी संपत्ति की निगरानी नहीं होने और किराए के साउंड सिस्टम पर हुए भुगतान की भी जांच जरूरी है।कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब साउंड सिस्टम की सामग्री का सूची से मिलान, उसके उपयोग का रिकॉर्ड और वर्षों के दौरान किए गए किराए के भुगतानों की जानकारी सामने आने का इंतजार है।लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति करीब 10 वर्षों तक बंद कमरे में क्यों पड़ी रही और इससे नगर पालिका को हुई संभावित आर्थिक क्षति के लिए जिम्मेदार कौन है—इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
