दमोह में मद्य निषेध सप्ताह का गरिमामय समापन, नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

महिलाओं और युवतियों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंतन आवश्यक, बेटा हो या बेटी, दोनों को संस्कार के साथ संवाद और विश्वास की जरूरत
सप्ताहभर आयोजित प्रतियोगिताओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित, नाटक और लोकगीतों के माध्यम से दिया नशामुक्ति का संदेश
दमोह, 09 अक्टूबर 2026 नशा केवल किसी एक व्यक्ति की बुरी आदत नहीं, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित करने वाली गंभीर सामाजिक चुनौती है। शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब समाज का प्रत्येक वर्ग इसके दुष्परिणामों को समझेगा और नशामुक्त वातावरण के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा। इसी संदेश और सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से दमोह जिले में सप्ताहभर आयोजित मद्य निषेध सप्ताह का समापन स्थानीय शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय के सभाकक्ष में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।
सामाजिक न्याय विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, पत्रकारों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने नशे के शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए युवा पीढ़ी को नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनने का आह्वान किया।
दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

समापन समारोह का शुभारंभ दमोह जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति ठाकुर, शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय के प्राचार्य जी.पी. अहिरवार, वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी एवं रंगकर्मी डॉ. एल.एन. वैष्णव, भारतीय जनता पार्टी की नेत्री नर्मदा एकता, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों तथा अन्य मंचासीन अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर एवं पूजन-अर्चन के साथ किया।
इसके पश्चात सामाजिक न्याय विभाग के रवि राज ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए मद्य निषेध सप्ताह के आयोजन के उद्देश्य, सप्ताहभर संचालित गतिविधियों तथा नशामुक्ति के लिए सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित अतिथियों का शब्दों के माध्यम से स्वागत किया। आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया गया।
नशे को आधुनिकता और प्रतिष्ठा का प्रतीक बनाना चिंताजनक — डॉ. एल.एन. वैष्णव
समारोह को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी एवं रंगकर्मी डॉ. एल.एन. वैष्णव ने नशे के बदलते सामाजिक स्वरूप पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मद्य निषेध सप्ताह का समापन केवल औपचारिक आयोजन बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इस अवसर पर समाज को आत्ममंथन करना होगा कि आखिर तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद युवा पीढ़ी नशे की ओर क्यों आकर्षित हो रही है।
उन्होंने कहा कि एक समय शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या को मुख्यतः पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में कुछ महिलाएं और विशेष रूप से युवा वर्ग की कुछ युवतियां भी नशे की ओर आकर्षित होती दिखाई दे रही हैं। यह किसी महिला की आलोचना करने का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंतन का प्रश्न है।
डॉ. वैष्णव ने कहा कि आधुनिकता का अर्थ नशा करना नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता, विवेक, आत्मविश्वास और अपने निर्णयों के प्रति जिम्मेदार होना है। आज बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, कला और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्धियां अर्जित कर रही हैं। ऐसे में नशे को फैशन, स्वतंत्रता अथवा सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ना चिंताजनक प्रवृत्ति है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को बेटों और बेटियों के लिए अलग-अलग नैतिक मापदंड नहीं बनाने चाहिए। नशा किसी भी व्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकता है और इससे बचाव की जिम्मेदारी भी सभी के प्रति समान होनी चाहिए।
बच्चों को केवल सुविधाएं नहीं, संवाद और विश्वास भी चाहिए
डॉ. वैष्णव ने परिवार की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर भविष्य देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कई बार परिवारों में आपसी संवाद की कमी दिखाई देती है।उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या हम अपने बच्चों की मानसिक परेशानियों, मित्रों के प्रभाव, तनाव और सामाजिक दबाव को समझने का प्रयास कर रहे हैं? क्या बच्चों को घर में ऐसा वातावरण मिल रहा है, जहां वे बिना भय के अपनी समस्याएं साझा कर सकें?उन्होंने कहा कि नशे की शुरुआत कभी मित्रों के दबाव, कभी मनोरंजन, कभी तनाव से मुक्ति पाने की गलत धारणा और कभी फैशन के प्रभाव में हो सकती है। धीरे-धीरे यही आदत व्यक्ति की निर्णय क्षमता, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संबंधों और भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने प्रभावशाली शब्दों में कहा—
“बच्चों को केवल सुविधाएं नहीं, संवाद चाहिए। केवल अनुशासन नहीं, विश्वास चाहिए और केवल सलाह नहीं, माता-पिता का समय भी चाहिए।”उन्होंने कहा कि परिवारों में संस्कारों के साथ संवेदनशीलता और विश्वास का वातावरण तैयार करना नशामुक्त समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति को तिरस्कार नहीं, उपचार और सहयोग की जरूरतडॉ. वैष्णव ने अपने उद्बोधन में नशामुक्ति के मानवीय पक्ष को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को केवल अपमानित करना, सामाजिक रूप से अलग-थलग कर देना या उसके प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखना समस्या का समाधान नहीं है।
ऐसे व्यक्तियों को परिवार का सहयोग, चिकित्सकीय उपचार, उचित परामर्श और समाज का सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है।उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनके सामने शिक्षा, खेल, कला, तकनीक, रोजगार, उद्यमिता और समाजसेवा के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। युवा अपनी प्रतिभा, परिश्रम और उपलब्धियों से पहचान बनाएं, न कि ऐसी आदतों से जो उनकी क्षमताओं को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा—”शराब या नशा आपको आधुनिक नहीं बनाता, आपकी क्षमता आपको आधुनिक बनाती है। नशा आपको मजबूत नहीं बनाता, नशे से दूर रहने का निर्णय आपको मजबूत बनाता है। नशा स्वतंत्रता नहीं है, अपने ऊपर नियंत्रण रखना ही वास्तविक स्वतंत्रता है।”
डॉ. वैष्णव ने उपस्थित छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें, अपने मित्रों को भी जागरूक करें और अपने आसपास नशे के विरुद्ध सकारात्मक वातावरण तैयार करने में सहयोग दें।उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केवल शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें परिवार, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों की समान भागीदारी आवश्यक है।
समाज में जागरूकता लाने के लिए महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण — प्रीति ठाकुर

दमोह जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति ठाकुर ने अपने संबोधन में नशामुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं और परिवारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नशे के कारण केवल उसका सेवन करने वाला व्यक्ति ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार को अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों सहित समाज के सभी वर्गों में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही विद्यार्थियों से शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने का आह्वान किया।
युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने में शिक्षण संस्थानों की अहम जिम्मेदारी — जी.पी. अहिरवार
शासकीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय के प्राचार्य जी.पी. अहिरवार ने विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन, शिक्षा और अच्छे संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि महाविद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान प्राप्त करने का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान है। नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से बचने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक होना चाहिए।उन्होंने कहा कि युवा अपनी ऊर्जा का उपयोग शिक्षा, खेलकूद, साहित्य, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाजहित के कार्यों में करें। शिक्षण संस्थानों में आयोजित ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करने में सहायक होते हैं।
नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक — नर्मदा एकता
भारतीय जनता पार्टी की नेत्री नर्मदा एकता ने नशे के कारण परिवारों और सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए कहा कि नशामुक्ति के लिए जनजागरूकता का विस्तार आवश्यक है।उन्होंने महिलाओं और युवाओं से सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि नशे से दूर रहने का संदेश केवल आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाना होगा।
आध्यात्मिक चिंतन और आत्मसंयम से मिलती है सकारात्मक जीवन की दिशा
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में आत्मसंयम, सकारात्मक चिंतन, मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि व्यक्ति के विचार और जीवनशैली उसके व्यक्तित्व को प्रभावित करते हैं। सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन तथा आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति अपनी आदतों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं को नशामुक्त, स्वस्थ और संतुलित जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया।
नाटक और लोकगीतों ने दिया नशे से दूर रहने का प्रभावशाली संदेश
समापन समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। मुक्ति मंच एवं लोकगायन कलाकारों ने नाटक और गीतों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार की खुशियों, आर्थिक स्थिति और सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है।लोकगीतों और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे से दूर रहने, परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इन प्रस्तुतियों ने सामाजिक जागरूकता के संदेश को सरल और प्रभावी रूप में विद्यार्थियों तक पहुंचाया।
सप्ताहभर की गतिविधियों में सहभागी विद्यार्थियों का सम्मान
मद्य निषेध सप्ताह के अंतर्गत जिले के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता से संबंधित विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता कर नशामुक्ति का संदेश प्रसारित किया।समापन समारोह में सप्ताहभर आयोजित गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी की सक्रिय सहभागिता किसी भी सामाजिक जागरूकता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।इस अवसर पर महाविद्यालय की बड़ी संख्या में छात्राएं, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं, सामाजिक न्याय विभाग से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
केवल एक सप्ताह का आयोजन नहीं, निरंतर चलने वाला सामाजिक अभियान बने नशामुक्ति

समारोह में व्यक्त विचारों का प्रमुख संदेश यही रहा कि मद्य निषेध सप्ताह की सार्थकता तभी है, जब इसके माध्यम से प्राप्त जागरूकता समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।नशे के विरुद्ध अभियान केवल भाषणों, प्रतियोगिताओं, रैलियों अथवा औपचारिक संकल्पों तक सीमित न रहकर परिवारों और समाज के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बने। इसके लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को निरंतर प्रयास करने होंगे।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि नशे का अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।समापन समारोह ने यह विचार प्रमुखता से स्थापित किया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार, संवाद, आत्मसंयम, जागरूकता और सामूहिक सामाजिक संकल्प से संभव है।
