दमोह, 11 मई 2026/बच्चों की एक छोटी सी अनदेखी कई बार परिवारों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन जाती है। रविवार को दमोह शहर में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब शहर के मागंज वार्ड-3 से एक भाई-बहन अचानक लापता हो गए। मासूम बच्चों के घर से गायब होने की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार और बेचैनी का माहौल बन गया। लेकिन सिटी कोतवाली पुलिस की तत्परता, संवेदनशील कार्यशैली और लगातार की गई सर्चिंग ने कुछ ही घंटों में बच्चों को सुरक्षित खोज निकालकर परिजनों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटा दी।
जानकारी के अनुसार मागंज वार्ड-3 निवासी परिवार के 10 वर्षीय पुत्र और 7 वर्षीय पुत्री रविवार शाम अचानक घर से कहीं चले गए थे। काफी देर तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर परिजनों ने आसपास के क्षेत्रों में उनकी तलाश शुरू की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर घबराए परिजन तत्काल सिटी कोतवाली पहुंचे और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
बच्चों के लापता होने की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी मनीष कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल गुमशुदगी दर्ज कर पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी को अवगत कराया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश मिलते ही कोतवाली पुलिस पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर गई।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया। पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर एक साथ अभियान शुरू किया। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र, जिला अस्पताल, सार्वजनिक उद्यानों तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पुलिस लगातार सर्चिंग करती रही। वहीं बच्चों के घर के आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष निगरानी रखी गई।
पुलिस टीमों ने स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और राहगीरों से पूछताछ कर बच्चों के संबंध में जानकारी जुटाई। कई स्थानों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए ताकि बच्चों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके। पुलिस की सक्रियता का असर यह रहा कि कुछ ही घंटों के भीतर दोनों बच्चों को सुरक्षित खोज लिया गया।
बच्चों के सुरक्षित मिलने की सूचना मिलते ही परिजनों की आंखों में खुशी और राहत के आंसू छलक पड़े। परिवार के सदस्यों ने कोतवाली पहुंचकर दमोह पुलिस का आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि पुलिस समय पर सक्रिय नहीं होती तो स्थिति और अधिक चिंताजनक हो सकती थी।
थाना प्रभारी मनीष कुमार ने बताया कि दोनों बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं। आवश्यक पूछताछ और समझाइश के बाद बच्चों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि छोटे बच्चों पर विशेष निगरानी रखना बेहद जरूरी है। बच्चों को घर का पता, माता-पिता का मोबाइल नंबर और आपात स्थिति में सहायता लेने के तरीके जरूर सिखाए जाने चाहिए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आज के समय में बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। किसी भी संदिग्ध परिस्थिति या बच्चे के अकेले भटकते दिखाई देने पर तुरंत पुलिस को सूचना देना चाहिए, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जब पुलिस और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाते हैं, तब बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव हो जाता है। दमोह पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता ने न केवल दो मासूम बच्चों को सुरक्षित परिवार तक पहुंचाया, बल्कि आमजन के बीच पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत किया है।
स्थानीय नागरिकों ने भी कोतवाली पुलिस की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की त्वरित कार्रवाई से लोगों में सुरक्षा का भाव मजबूत होता है और समाज में सकारात्मक संदेश जाता है कि संकट की घड़ी में पुलिस हर समय आमजन के साथ खड़ी है।
