गांव-गांव लगेंगे कैंप, बिना शुल्क होगी ई-केवाईसी, एक माह में पेंशन शुरू कराने का लक्ष्य

दमोह, 18 मई / मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक अनूठे और संवेदनशील प्रशासनिक अभियान “सेवा और आशीर्वाद अभियान” की शुरुआत की गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में इस प्रकार का यह पहला अभियान है, जिसका उद्देश्य ऐसे वृद्धजनों को दोबारा पेंशन योजना से जोड़ना है, जिनकी पेंशन केवल ई-केवाईसी लंबित होने के कारण बंद हो गई है।
सोमवार 18 मई को संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के सभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में अभियान की कार्ययोजना, संचालन व्यवस्था और मैदानी अमले की जिम्मेदारियों को लेकर विस्तृत कार्यशाला आयोजित की गई।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे, सामाजिक न्याय विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकाय, आधार केंद्र प्रभारियों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
ग्रामीण भ्रमण के दौरान मिली प्रेरणा
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने अभियान की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि जनसुनवाई, वृद्धाश्रम भ्रमण, रात्रि चौपाल और ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान लगातार ऐसे मामले सामने आए, जहां वृद्धजन पात्र होने के बावजूद पेंशन से वंचित थे।
उन्होंने बताया कि कई बुजुर्ग महीनों से कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन ई-केवाईसी नहीं हो पाने के कारण उनकी पेंशन बंद पड़ी थी। इन परिस्थितियों ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया और उन्होंने इस समस्या के स्थायी समाधान का निर्णय लिया।
कलेक्टर ने कहा कि,
“वृद्धजन हमारे माता-पिता के समान हैं। शासन की योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह अभियान केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास है।”
1664 वृद्धजन पेंशन से वंचित मिले
जिले के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर प्रशासन को पता चला कि लगभग 1664 वृद्धजन ऐसे हैं, जो पात्र होने के बावजूद पिछले 8 से 9 महीनों से केवल ई-केवाईसी नहीं होने के कारण पेंशन प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।
इनमें बड़ी संख्या ऐसे बुजुर्गों की है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, बीमार हैं या तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के कारण योजना से बाहर हो गए हैं।
प्रशासन ने निर्णय लिया कि अब ऐसे सभी पात्र वृद्धजनों को अभियान चलाकर पुनः योजना से जोड़ा जाएगा और उनकी पेंशन जल्द शुरू कराई जाएगी।
ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर लगेंगे विशेष कैंप
अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तथा नगरीय क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे।
इन शिविरों में आधार केंद्र प्रभारी, बायोमेट्रिक डिवाइस ऑपरेटर, आइरिस स्कैन मशीन और तकनीकी टीम मौजूद रहेगी। इसके साथ ही ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, सरपंच, सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी तथा नगरीय क्षेत्रों में वार्ड प्रभारी और नगर निकाय अधिकारी भी तैनात रहेंगे।
अभियान के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों की सूची ग्राम पंचायतों और वार्डों में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी ताकि लोगों को जानकारी मिल सके और कोई पात्र व्यक्ति छूट न जाए।
घर-घर पहुंचकर होगी ई-केवाईसी
प्रशासन ने यह भी तय किया है कि जो वृद्धजन बीमारी, अस्वस्थता या चलने-फिरने में असमर्थता के कारण शिविरों तक नहीं पहुंच पाएंगे, उनके घर जाकर ई-केवाईसी की जाएगी।
इसके लिए आधार केंद्र प्रभारियों और मैदानी कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। रोजगार सहायक, सचिव और वार्ड प्रभारी ऐसे बुजुर्गों की पहचान कर उन्हें अभियान से जोड़ेंगे।
फिंगरप्रिंट नहीं मिलने की स्थिति में आइरिस स्कैन के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं जिन वृद्धजनों के मोबाइल नंबर आधार से लिंक हैं, वहां ओटीपी आधारित ई-केवाईसी भी कराई जाएगी।
वृद्धजनों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान किसी भी वृद्धजन से ई-केवाईसी के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा एनजीओ और सीएसआर फंड के माध्यम से आधार केंद्र संचालकों को भुगतान किया जाएगा ताकि आर्थिक अभाव के कारण कोई भी बुजुर्ग योजना के लाभ से वंचित न रहे।
गांवों में मुनादी और व्यक्तिगत सूचना
अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगरीय वार्ड में कैंप से तीन दिन पहले मुनादी कराई जाएगी। कोटवारों और नगरीय कर्मचारियों के माध्यम से लाउडस्पीकर से शिविर की तारीख और स्थान की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा रोजगार सहायक, सचिव और वार्ड प्रभारी सूची में दर्ज प्रत्येक वृद्धजन से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें शिविर तक लाने की व्यवस्था भी करेंगे।
एक माह में पेंशन शुरू कराने का लक्ष्य
प्रशासन ने अभियान के अंतर्गत पात्र वृद्धजनों की पेंशन एक माह के भीतर पुनः प्रारंभ कराने का लक्ष्य रखा है। ई-केवाईसी पूर्ण होने के बाद ग्राम पंचायत सचिव, जनपद पंचायत और नगरीय निकाय अधिकारियों के माध्यम से पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
कलेक्टर ने बताया कि अभियान के संचालन और दिशा-निर्देशों की समीक्षा के लिए सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारियों, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और रोजगार सहायकों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की जाएंगी।
“सेवा और समर्पण का अभियान बने”
कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील करते हुए कहा कि इस अभियान को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज सेवा के भाव से संचालित किया जाए।
उन्होंने आम नागरिकों से भी आग्रह किया कि वे अपने आसपास रहने वाले वृद्धजनों की जानकारी प्रशासन को दें और उन्हें शिविरों तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि कोई भी पात्र बुजुर्ग शासन की पेंशन योजना से वंचित न रह जाए।
