बैठक के बाद संयुक्त कलेक्टर भवन के सभाकक्ष में दिया गया सम्मान, जनसंपर्क विभाग की विज्ञप्ति और तस्वीरें जारी होने के बाद सामने आई जानकारी
(डॉ.एल.एन.वैष्णव)
दमोह। सड़क दुर्घटना में घायल दो लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर उनकी जिंदगी बचाने में मदद करने वाले रत्नेश सुमन और योगेश सुमन को दमोह जिले के पहले ‘राहवीर’ के रूप में सम्मानित किया गया। दोनों भाइयों को शासन की गुड सेमेरिटन योजना के तहत 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। हालांकि यह सम्मान किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या मंच पर नहीं हुआ, बल्कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के बाद स्थानीय संयुक्त कलेक्टर भवन के सभाकक्ष में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में दोनों राहवीरों को सम्मानित किया गया।
सम्मान के दौरान कलेक्टर प्रताप नारायण यादव, पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी सहित संबंधित विभागों के कुछ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मान के फोटोग्राफ और इसकी जानकारी बाद में जनसंपर्क विभाग के माध्यम से समाचार के रूप में जारी की गई। इसके बाद ही व्यापक रूप से यह जानकारी सामने आई कि दमोह जिले में पहली बार दो नागरिकों को राहवीर के रूप में सम्मानित किया गया है।

सड़क पर घायल मिले, दोनों भाइयों ने नहीं गंवाया समय
मामला 12 अक्टूबर 2025 की दोपहर करीब 12:30 बजे का है। योगेश सुमन परसोरिया पेट्रोल पंप के आगे मुख्य मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक सड़क दुर्घटना में दो बाइक सवारों को घायल अवस्था में सड़क पर पड़ा देखा।दुर्घटना में ग्राम जोरतला, पथरिया निवासी भारत प्रजापति पिता मोहन प्रजापति और विजय लोधी पिता भगवान सिंह लोधी घायल हुए थे। योगेश ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपने भाई रत्नेश सुमन को साथ लिया और दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया।समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद दोनों घायलों का उपचार किया गया। वर्तमान में दोनों के स्वस्थ होने की जानकारी दी गई है। इसी मानवीय पहल के आधार पर दोनों भाइयों के नाम राहवीर योजना के तहत प्रोत्साहन राशि के लिए जिला प्रशासन द्वारा परिवहन आयुक्त, मध्यप्रदेश शासन भोपाल को भेजे गए थे।
दमोह के पहले राहवीर बने रत्नेश और योगेश
प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद 22 सितंबर 2026 को दोनों भाइयों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इस तरह रत्नेश सुमन और योगेश सुमन दमोह जिले में राहवीर योजना के तहत सम्मानित होने वाले पहले राहवीर बने।
सम्मान से जुड़ी प्रमुख बातें :
- दोनों भाई सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद के लिए आगे आए।
- घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
- जिला प्रशासन ने दोनों के नाम का प्रस्ताव परिवहन आयुक्त को भेजा।
- प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली।
- दोनों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
- उन्हें दमोह जिले के पहले राहवीर के रूप में सम्मान मिला।
सम्मान हुआ, लेकिन सार्वजनिक मंच क्यों नहीं?
दो नागरिकों द्वारा सड़क हादसे में घायलों की मदद कर उनकी जान बचाने जैसे मानवीय कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए शासन की ओर से पुरस्कार दिया गया। ऐसे में यह सवाल भी सामने आता है कि जिले के पहले राहवीरों को यह सम्मान किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में क्यों नहीं दिया गया?सम्मान सड़क सुरक्षा समिति की बैठक के बाद संयुक्त कलेक्टर भवन के सभाकक्ष में हुआ। मौके पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, लेकिन सम्मान का कोई अलग सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। बाद में जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी समाचार और तस्वीरों के माध्यम से इसकी जानकारी सामने आई।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद के लिए आम नागरिकों को प्रेरित करने में ऐसे सम्मान सार्वजनिक रूप से सामने आना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि किसी नागरिक ने संकट की घड़ी में आगे बढ़कर किसी की जिंदगी बचाने में योगदान दिया है तो उसकी कहानी अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है।
सड़क हादसे में मदद से जुड़ा बड़ा संदेश
सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय घायल व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे समय में आसपास मौजूद लोग यदि बिना देरी किए मदद के लिए आगे आएं और घायल को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करें तो स्थिति गंभीर होने से बचाई जा सकती है।रत्नेश और योगेश सुमन ने भी हादसे के समय यही किया। उन्होंने घायल व्यक्तियों को सड़क पर पड़े देखकर वहां से गुजरने के बजाय उनकी मदद करने का फैसला लिया और उन्हें अस्पताल पहुंचाने में भूमिका निभाई।
पुरस्कार से ज्यादा जरूरी है संदेश
25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति पत्र दोनों भाइयों के मानवीय कार्य का सम्मान है, लेकिन इस सम्मान से जुड़ा सबसे बड़ा संदेश यही है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने के लिए आम नागरिकों को आगे आना चाहिए।दमोह में पहली बार दो राहवीरों को सम्मान मिलने के बाद अब यह उम्मीद की जा सकती है कि सड़क सुरक्षा और गुड सेमेरिटन योजना को लेकर आम लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे सम्मान और उनके पीछे की मानवीय कहानियां अधिक व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचें, ताकि एक व्यक्ति की पहल अनेक लोगों को संकट के समय मदद के लिए प्रेरित कर सके।
