सीसीटीवी में कैद हुआ घटनाक्रम, कार्यालीन समय में मौजूद थे कई कर्मचारी; आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज
दमोह। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग में करोड़ों रुपये के कथित सड़क निर्माण एवं भुगतान मामलों की जांच के बीच सामने आई मारपीट की घटना अब प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गई है। विभागीय कर्मचारी राजीव लोचन चौबे के साथ कार्यालय परिसर में हुई कथित मारपीट के बाद कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं घटना के बाद एकजुट हुए कर्मचारियों ने पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने फिलहाल आवेदन लेकर जांच शुरू करने की बात कही है।
सरकारी कार्यालय में घुसकर हंगामे का आरोप
जानकारी के अनुसार, आरईएस कार्यालय में नियमित कार्य के दौरान अमरदीप अग्रवाल नामक व्यक्ति पहुंचा और वहां मौजूद कर्मचारी राजीव लोचन चौबे के साथ विवाद करने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद तेजी से बढ़ा और मामला कथित मारपीट तक पहुंच गया। कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया।
घटना के बाद कार्यालय में तनावपूर्ण माहौल बन गया और कर्मचारियों ने इसे केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने तथा कर्मचारियों को भयभीत करने का प्रयास बताया।
सभी कर्मचारी पहुंचे सिटी कोतवाली
घटना के बाद विभाग के कर्मचारी एकत्रित होकर सीधे सिटी कोतवाली थाना पहुंचे। कर्मचारियों ने आरोपी के खिलाफ तत्काल प्रकरण दर्ज करने की मांग करते हुए लिखित शिकायत सौंपी। हालांकि पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय आवेदन प्राप्त कर जांच करने की प्रक्रिया शुरू की है।
पुलिस का कहना है कि आवेदन के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी, उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण होगा और उसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज बन सकती है सबसे बड़ा साक्ष्य
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे माने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पूरा घटनाक्रम कैमरों में रिकॉर्ड हुआ है। यदि फुटेज में घटना स्पष्ट रूप से दर्ज पाई जाती है तो यह जांच का अहम आधार बन सकती है।
इसके अलावा घटना कार्यालीन समय में हुई, इसलिए कार्यालय में कई अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे। ऐसे में पुलिस के पास प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की भी कमी नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि घटना को अनेक लोगों ने अपनी आंखों से देखा है और आवश्यकता पड़ने पर वे अपने बयान देने को तैयार हैं।
करोड़ों के सड़क भुगतान प्रकरण से जोड़कर देखी जा रही घटना
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से आरईएस में पूर्व वर्षों में स्वीकृत सड़क निर्माण कार्यों और उनके भुगतानों की समीक्षा की जा रही है। कई मामलों में भुगतान प्रक्रिया, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर प्रश्न उठे हैं।
इसी कारण कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी बनी हुई है कि कहीं यह घटना उन संवेदनशील मामलों से जुड़ी जांचों के कारण उत्पन्न दबाव का परिणाम तो नहीं है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व प्रभारी मनोज गुप्ता का नाम फिर चर्चाओं में
सूत्रों और विभागीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि जिन परियोजनाओं को लेकर विवाद और जांच की स्थिति बनी हुई है, उनका संबंध पूर्व प्रभारी अधिकारी मनोज गुप्ता के कार्यकाल से रहा है। मनोज गुप्ता पहले से ही विभिन्न मामलों में चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं तथा उनके विरुद्ध विभागीय जांच जारी होने की जानकारी सामने आती रही है।
विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी चल रही है कि आरोपी अमरदीप अग्रवाल के संबंध पूर्व प्रभारी मनोज गुप्ता से घनिष्ठ रहे हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही पुलिस या प्रशासन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।
कर्मचारियों का सवाल: कार्रवाई में देरी क्यों?
घटना के बाद कर्मचारियों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि सरकारी कार्यालय में कार्यालीन समय के दौरान हुई कथित मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा के आरोपों के बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। कर्मचारियों का कहना है कि जब घटना के गवाह मौजूद हैं और सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है, तो दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।
अब निगाहें पुलिस जांच पर
फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच के अधीन है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और शिकायत आवेदन के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं विभागीय कर्मचारी भी इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं।
यदि जांच में सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और दबाव बनाने के आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि शासकीय कार्यप्रणाली को प्रभावित करने के गंभीर प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है।
क्या कार्यालय के भीतर से लीक हो रही है जानकारी? पुलिस की जांच में खुल सकते हैं नए राज
घटना के बाद विभागीय गलियारों में एक और गंभीर चर्चा तेजी से फैल रही है। सूत्रों का दावा है कि पूर्व प्रभारी मनोज गुप्ता के कार्यकाल के दौरान प्रभावशाली भूमिका निभाने वाले कुछ कर्मचारी आज भी कार्यालय में सक्रिय हैं और विभागीय गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, विभाग में चल रही जांच, दस्तावेजों की स्थिति और प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां कथित रूप से बाहरी स्तर तक पहुंचाई जा रही हैं। चर्चाएं यह भी हैं कि कुछ कर्मचारी आज भी पूर्व प्रभारी मनोज गुप्ता के संपर्क में हैं और विभिन्न माध्यमों से कार्यालय की सूचनाएं साझा किए जाने की आशंकाएं जताई जा रही हैं।
विभागीय सूत्रों का यहां तक कहना है कि सड़क निर्माण, भुगतान और अन्य विवादित मामलों में जिन दस्तावेजों और सूचनाओं की जांच चल रही है, उनमें कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। हालांकि इन दावों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
‘घर का भेदी लंका ढाए‘ वाली स्थिति?
विभाग के भीतर चर्चा है कि यदि जांच से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं वास्तव में बाहर पहुंच रही हैं, तो यह मामला केवल मारपीट या दबाव बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने और साक्ष्यों को प्रभावित करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। कर्मचारियों के बीच “घर का भेदी लंका ढाए” वाली कहावत की चर्चा भी सुनाई दे रही है।
पुलिस और जांच एजेंसियां खंगाल सकती हैं यह एंगल
सूत्रों का मानना है कि पुलिस यदि पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच करती है तो केवल मारपीट की घटना ही नहीं, बल्कि आरोपी के संपर्क, विभागीय कर्मचारियों से उसके संबंध, मोबाइल कॉल डिटेल, कार्यालय में मौजूद लोगों की भूमिका और जांच संबंधी सूचनाओं के संभावित लीक होने जैसे पहलुओं की भी पड़ताल कर सकती है।
यदि ऐसा होता है तो आरईएस कार्यालय में हुई यह घटना केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के कथित सड़क निर्माण और भुगतान विवादों से जुड़े व्यापक नेटवर्क की जांच का आधार भी बन सकती है।
(नोट: आरोपी एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं एवं विभागीय सूत्रों के कथनों पर आधारित हैं। अंतिम सत्यता पुलिस जांच और सक्षम प्राधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।)
