इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार जी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, सह सरकार्यवाह ने साझा किए जीवन के प्रेरक संस्मरण

महाकाल के अनन्य भक्त थे विनोद कुमार जी, जीवनभर संघ कार्य को समर्पित रहे, अंतिम श्वास भी महाकाल की नगरी उज्जैन में ली
इंदौर, बुधवार 14 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे स्वर्गीय श्री विनोद कुमार जी की स्मृति में इंदौर के महावीर बाग में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों, जनप्रतिनिधियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिकों ने उपस्थित होकर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्रकार्य के प्रति समर्पित जीवन का स्मरण किया। इस अवसर पर उनके संगठनात्मक योगदान, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीय व्यवहार, सादगी और आध्यात्मिक आस्था से जुड़े अनेक संस्मरण साझा किए गए।
श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने स्वर्गीय विनोद कुमार जी के साथ बिताए समय और उनसे जुड़े अनेक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रकार्य के प्रति निष्ठा, अनुशासन, आत्मीयता और समर्पण की प्रेरक मिसाल रहा। वे ऐसे प्रचारक थे, जिन्होंने संगठन के दायित्वों का निर्वहन करते हुए कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत संबंधों को भी सदैव महत्व दिया।
कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि संगठनात्मक जीवन में अनेक व्यक्तियों के साथ कार्य करने और उनसे मिलने का अवसर मिलता है, लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी सहजता, स्नेह और आत्मीयता जीवनभर स्मृतियों में बनी रहती है। विनोद कुमार जी का व्यक्तित्व भी ऐसा ही था। उनके व्यवहार में सरलता थी और कार्यकर्ताओं के प्रति विशेष अपनत्व दिखाई देता था।
व्यस्त दिनचर्या के बावजूद प्रत्येक कार्यकर्ता की चिंता करना उनकी विशेषता थी
सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी ने अपने संस्मरणों में बताया कि विनोद कुमार जी प्रचारक जीवन की अत्यंत व्यस्त दिनचर्या के बीच भी कार्यकर्ताओं की चिंता करना नहीं भूलते थे। संगठन के विभिन्न दायित्वों, बैठकों और प्रवासों के कारण उनसे मुलाकात के अवसर सीमित होते थे, लेकिन जब भी भेंट होती, उनकी आत्मीयता और सहृदयता का अनुभव अवश्य होता था।
उन्होंने मेरठ में बिताए आरंभिक संघ जीवन के अनेक प्रसंगों को याद करते हुए कहा कि उस समय की स्मृतियां आज भी मन में ताजा हैं। विनोद जी का कार्यकर्ताओं से जुड़ने का अपना सहज तरीका था। वे केवल संगठनात्मक कार्यों तक सीमित नहीं रहते थे, बल्कि कार्यकर्ताओं के प्रति व्यक्तिगत स्नेह और अपनत्व भी रखते थे।
उनका यह व्यवहार संघ की उस कार्यपद्धति को अभिव्यक्त करता था, जिसमें संगठन के साथ-साथ व्यक्ति निर्माण, पारस्परिक विश्वास और आत्मीय संबंधों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन के इन पहलुओं का स्मरण करते हुए कार्यकर्ताओं के प्रति उनके स्नेह, सहयोग और मार्गदर्शन को विशेष रूप से याद किया गया।
मेरठ से प्रारंभ हुई जीवन यात्रा, संघ के अखिल भारतीय दायित्वों तक पहुंचे
स्वर्गीय श्री विनोद कुमार जी का जन्म 4 दिसंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था। उनके जीवन का आरंभिक काल मेरठ से जुड़ा रहा, जहां संघ कार्य के दौरान अनेक कार्यकर्ताओं से उनके आत्मीय संबंध बने।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में उन्होंने अपना जीवन संगठन और राष्ट्रकार्य को समर्पित किया। संघ की कार्यपद्धति के अनुरूप उन्होंने विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और आगे चलकर अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में भी दायित्व संभाला।
प्रचारक जीवन में व्यक्तिगत सुविधाओं से अधिक संगठनात्मक दायित्वों और समाजकार्य को प्राथमिकता दी जाती है। विनोद कुमार जी के जीवन में भी इसी समर्पण की झलक दिखाई देती थी। उनके साथ कार्य करने वाले स्वयंसेवकों के लिए उनका अनुशासन, व्यवहार और कार्यकर्ताओं के प्रति चिंता विशेष रूप से स्मरणीय रही।
उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी था कि संगठन में दायित्वों के विस्तार के साथ कार्यकर्ताओं के प्रति उनके व्यवहार में आत्मीयता बनी रही। यही कारण रहा कि श्रद्धांजलि सभा में उन्हें केवल एक वरिष्ठ पदाधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि मार्गदर्शन और स्नेह देने वाले प्रचारक के रूप में भी याद किया गया।
भगवान महाकाल के प्रति गहरी आस्था, उज्जैन में हुआ जीवन यात्रा का समापन
श्रद्धांजलि सभा के दौरान सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी ने विनोद कुमार जी के जीवन के आध्यात्मिक पक्ष का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि विनोद कुमार जी भगवान महाकाल के अनन्य भक्त थे। भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और महाकाल की नगरी उज्जैन से उनका आध्यात्मिक लगाव उनके जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष था।
उन्होंने कहा कि यह भी एक विशेष संयोग रहा कि भगवान महाकाल के प्रति गहरी आस्था रखने वाले विनोद कुमार जी ने अपने जीवन की अंतिम श्वास भी महाकाल की नगरी उज्जैन में एकादशी के दिन ली।
विगत 6 अक्टूबर 2026 को उज्जैन में उनका देहावसान हो गया था। उनके निधन से संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और उनसे जुड़े स्वयंसेवकों के बीच शोक की भावना रही। इंदौर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन से जुड़े संस्मरणों के माध्यम से उनके योगदान का स्मरण किया गया।
पद और दायित्व से अधिक आत्मीय व्यवहार ने बनाई अलग पहचान
श्रद्धांजलि सभा में विनोद कुमार जी के व्यक्तित्व का जो पक्ष विशेष रूप से सामने आया, वह था संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ मानवीय संबंधों को महत्व देना।
सामान्यतः बड़े संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन में पदाधिकारियों की दिनचर्या अत्यंत व्यस्त रहती है। लगातार बैठकों, प्रवासों और विभिन्न कार्यक्रमों के कारण कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत संपर्क के अवसर भी सीमित हो जाते हैं। इसके बावजूद विनोद कुमार जी अपने संपर्क में आने वाले कार्यकर्ताओं की चिंता करते थे।
कृष्ण गोपाल जी के संस्मरणों से यह बात सामने आई कि विनोद कुमार जी की पहचान केवल उनके पद अथवा संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं थी। उनका सहज स्वभाव, स्नेहपूर्ण व्यवहार और कार्यकर्ताओं के प्रति संवेदनशीलता भी उनके व्यक्तित्व के महत्वपूर्ण गुण थे।
संघ के प्रचारक जीवन में कार्यकर्ता निर्माण और संगठन विस्तार के साथ पारस्परिक विश्वास की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। विनोद कुमार जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों में इसी कार्यसंस्कृति की झलक दिखाई देती है।
उनकी स्मृतियों को साझा करते हुए इस बात पर विशेष जोर रहा कि संगठन में व्यक्ति का योगदान केवल उसके द्वारा निभाए गए दायित्वों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, संस्कार और कार्यकर्ताओं के जीवन पर पड़े प्रभाव से भी पहचाना जाता है।
महावीर बाग में जुटे संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी, स्वयंसेवक और समाजजन
इंदौर के महावीर बाग में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मालवा प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री, मध्यप्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित संघ के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, स्वयंसेवक और समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सभा में उपस्थितजनों ने स्वर्गीय विनोद कुमार जी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके राष्ट्रकार्य, संगठनात्मक योगदान और जीवन मूल्यों का स्मरण किया।
इस अवसर पर उनके साथ कार्य करने वाले स्वयंसेवकों के लिए उनके मार्गदर्शन, अनुशासन और आत्मीय व्यवहार से जुड़े प्रसंग विशेष महत्व के रहे। श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से उनके जीवन की उन विशेषताओं को याद किया गया, जिनके कारण वे संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच सम्मान और स्नेह के पात्र रहे।
स्मृतियों में जीवंत रहेगा एक समर्पित प्रचारक का जीवन
स्वर्गीय विनोद कुमार जी का जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रचारक परंपरा, संगठनात्मक अनुशासन और राष्ट्रकार्य के प्रति समर्पण से जुड़ा रहा। मेरठ में आरंभिक संघ जीवन से लेकर अखिल भारतीय स्तर पर संगठनात्मक दायित्वों के निर्वहन तक उनकी यात्रा लंबे सार्वजनिक एवं संगठनात्मक जीवन का परिचायक रही।
उनके व्यक्तित्व में संगठन के प्रति निष्ठा के साथ कार्यकर्ताओं के प्रति स्नेह, सरलता और आध्यात्मिक आस्था का समन्वय दिखाई देता था। सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल जी द्वारा साझा किए गए संस्मरणों ने उनके जीवन के इन्हीं पहलुओं को श्रद्धांजलि सभा में पुनः जीवंत कर दिया।
इंदौर की श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित स्वयंसेवकों और समाजजनों ने उनके योगदान का स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन के साथ एक वरिष्ठ प्रचारक की जीवन यात्रा का समापन हुआ, लेकिन संगठनात्मक कार्यों, व्यक्तिगत संबंधों और राष्ट्रकार्य के प्रति समर्पण से जुड़ी उनकी स्मृतियां कार्यकर्ताओं के बीच बनी रहेंगी।
