मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग, एसपी के बयान और वायरल वीडियो के बीच अंतर को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
दमोह। जुआ के फड़ पर पुलिस कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत और इसके बाद पुलिस टीम पर हुए पथराव का मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमाता जा रहा है। दमोह विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र दवे ने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच की मांग करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। दवे ने मध्य प्रदेश सरकार से मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग भी की है।घटना में एसडीएम सौरभ गंधर्व, पथरिया थाना प्रभारी जगेत सहित कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं पुलिस अधीक्षक आनंद कालादगी के घटना को लेकर दिए गए बयान और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बीच कथित अंतर को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
एसपी के बयान और वायरल वीडियो पर दवे ने उठाए सवाल
घटना के संबंध में पुलिस अधीक्षक आनंद कालादगी की ओर से दिए गए बयान में पुलिस पर करीब पांच सेकंड तक कीचड़ फेंके जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर 35 सेकंड से अधिक अवधि का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस टीम की ओर पत्थर फेंके जाते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसी अंतर को लेकर वीरेंद्र दवे ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था।
पुलिस के खुफिया तंत्र पर भी सवाल
वीरेंद्र दवे ने घटना के दौरान पुलिस के खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न खड़े किए हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि यदि घटनास्थल पर स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका थी, तो पुलिस और प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई।उन्होंने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच किए जाने की मांग की है, जिसमें पुलिस कार्रवाई से लेकर व्यक्ति की मौत और इसके बाद पुलिस टीम पर हुए पथराव तक की परिस्थितियां शामिल हैं।
मृतक परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग
वीरेंद्र दवे ने मध्य प्रदेश सरकार से मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिवार के सामने उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।दवे ने कहा कि मामले में केवल आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविकता सामने लाई जानी चाहिए।
न्यायिक जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
वीरेंद्र दवे की मांग है कि पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए, ताकि पुलिस कार्रवाई के दौरान व्यक्ति की मौत की परिस्थितियों, घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल, सुरक्षा व्यवस्था, बाद में हुए पथराव और वायरल वीडियो की वास्तविकता की जांच हो सके।उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना की शुरुआत किस परिस्थिति में हुई और बाद में स्थिति किस प्रकार बिगड़ी।
वायरल वीडियो की भी जांच की मांग
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत बताई जा रही है। वीडियो वास्तव में उसी घटनाक्रम का है या किसी अन्य समय का, इसकी पुष्टि तकनीकी और आधिकारिक जांच से ही हो सकती है। यदि वीडियो उसी घटना का है तो उसमें दिखाई दे रही परिस्थितियों और पुलिस के बयान के बीच अंतर की भी जांच आवश्यक होगी।फिलहाल पुलिस का पक्ष और वीरेंद्र दवे की मांग दोनों सामने हैं। एक ओर पुलिस घटना को लेकर अपना पक्ष रख रही है, वहीं दवे न्यायिक जांच और मृतक परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। अब पूरे मामले में जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
