दमोह, 28 अप्रैल/दमोह जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत सीतानगर जलाशय में मत्स्य संपदा को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीण रायकवार माझी समाज एवं संगम मत्स्य उद्योग सहकारी समिति सीतानगर ने आरोप लगाया है कि असामाजिक तत्वों ने जलाशय में जहरीला पदार्थ घोल दिया, जिससे लाखों रुपये मूल्य की मछलियां मर गईं। इस घटना से गरीब मछुआरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। मामले को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि सीतानगर जलाशय क्षेत्र में मत्स्य पालन नीति 2008 के अंतर्गत विधिवत रूप से संगम मत्स्य उद्योग सहकारी समिति, सीतानगर का पंजीयन किया गया है। यह पंजीयन सिंचाई विभाग, सहायक पंजीयक कार्यालय दमोह तथा मत्स्य उद्योग विभाग की प्रक्रिया के बाद कलेक्टर की अनुशंसा से हुआ है। समिति में वंशानुगत रायकवार समाज के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के सदस्य भी शामिल हैं, जो वर्षों से मत्स्य पालन को आजीविका का आधार बनाए हुए हैं।
समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि दिनांक 27 अप्रैल की रात जलाशय में सुनियोजित तरीके से जहरीला पदार्थ डाला गया, जिससे बड़ी संख्या में मछलियां मरकर पानी की सतह पर तैरने लगीं। इससे समिति को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। समाज के लोगों का कहना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि पंजीकृत समिति को नुकसान पहुंचाने की साजिश है।
अवैध मछली शिकार और लगातार विवाद के आरोप
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीतानगर जलाशय में कुछ ऐसे लोग लगातार सक्रिय हैं, जो समिति के सदस्य नहीं हैं, इसके बावजूद चोरी-छिपे मछलियां पकड़ने का काम कर रहे हैं। आरोप है कि ये लोग जलाशय में करंट और डायनामाइट जैसे खतरनाक तरीकों का इस्तेमाल कर मछलियों का अवैध शिकार करते हैं, जिससे न केवल मत्स्य संपदा को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि जलाशय की पारिस्थितिकी भी प्रभावित हो रही है।
समिति सदस्यों ने बताया कि जब भी उन्हें इस तरह की अवैध गतिविधियों से रोका जाता है तो आरोपित लोग गाली-गलौज करते हैं और जान से मारने की धमकी देते हैं। इसके कारण आए दिन तनावपूर्ण स्थिति बनती है और गरीब मछुआरे भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
फर्जी समिति के नाम पर भ्रम फैलाने का आरोप
रायकवार माझी समाज ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि सहायक पंजीयक कार्यालय दमोह द्वारा लिखित रूप से बताया गया है कि मडकोलेश्वर मछुआ सहकारी समिति सीतानगर नाम से कोई समिति पंजीकृत नहीं है। न ही आईसीएमआईएस पोर्टल पर इस नाम से कोई वैधानिक गठन दर्ज है। इसके बावजूद कुछ लोग इसी नाम का सहारा लेकर सीतानगर जलाशय में अधिकार जताने और वैध पंजीकृत समिति के कार्य में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं।
समाज का कहना है कि भोपाल रजिस्ट्रार स्तर से भी इस मामले में स्टे ऑर्डर जारी किया जा चुका है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सीतानगर जलाशय में मत्स्य पालन और मछली पकड़ने का अधिकार केवल संगम मत्स्य उद्योग सहकारी समिति सीतानगर, विकासखंड पथरिया, जिला दमोह को है। इसके बावजूद अवैध रूप से हस्तक्षेप कर समिति को लगातार परेशान किया जा रहा है।
गरीब मछुआरों की आजीविका पर संकट
समिति अध्यक्ष लखनलाल रैकवार के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि जलाशय में जहरीला पदार्थ डालकर मछलियों को मारना केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि दर्जनों गरीब परिवारों के पेट पर लात मारने जैसा है। समिति से जुड़े मछुआरे पूरी तरह इसी मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर हैं। लाखों रुपये की मछलियां नष्ट होने से उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीण माझी समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जलाशय में जहरीला पदार्थ डालने वालों, अवैध रूप से करंट और डायनामाइट से मछली पकड़ने वालों तथा समिति के वैध अधिकार में हस्तक्षेप करने वालों की तत्काल पहचान कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही जलाशय क्षेत्र में पुलिस निगरानी बढ़ाने और मत्स्य विभाग द्वारा स्थायी नियंत्रण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र प्रदर्शन की चेतावनी
समाज ने साफ कहा है कि यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण रायकवार माझी समाज उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला अध्यक्ष मोंटी रैकवार, डालचंद रायकवार, लक्खू रायकवार, अशोक पटेल, अंकित माझी, लच्छू रैकवार सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
मामले ने प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है—एक ओर गरीब मछुआरों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई और दूसरी ओर सीतानगर जलाशय में लगातार बढ़ रही अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
