63.9% हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ABP की 63.9% नियंत्रक हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह हिस्सेदारी कनाडा के दो प्रमुख पेंशन फंड—कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज़ रिटायरमेंट सिस्टम (OMERS)—के पास है। दोनों निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के लिए बैंकर नियुक्त किए हैं।
21 बंदरगाहों का संचालन करती है ABP
ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में फैले 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है। इनमें इमिंघम, जो ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है, और साउथेम्प्टन, जो देश का प्रमुख आयात केंद्र माना जाता है, शामिल हैं। कंपनी के पोर्ट ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत संभालते हैं।
वर्ष 2025 में ABP ने 42.5 मिलियन टन बल्क कार्गो और 3.1 मिलियन कंटेनर एवं रोल-ऑन/रोल-ऑफ यूनिट्स का संचालन किया। इस दौरान कंपनी का राजस्व 819.8 मिलियन पाउंड और परिचालन लाभ 586.5 मिलियन पाउंड रहा।
अडानी के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, ABP की आय का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक ग्राहक अनुबंधों और पायलटेज सेवाओं से आता है, जिससे कंपनी को स्थिर राजस्व मिलता है। यही वजह है कि इसे अडानी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।
पहले से कई देशों में मौजूद है अडानी पोर्ट्स
अडानी पोर्ट्स फिलहाल भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन करती है, जिनकी कुल क्षमता 653 मिलियन टन है। इसके अलावा कंपनी इज़रायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी पोर्ट कारोबार से जुड़ी हुई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 501 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया। अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1 अरब टन तक पहुंचाने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ तक निवेश की योजना बनाई गई है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विस्तार पर जोर रहेगा।
कंपनी ने क्या कहा?
अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अपनी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप नए निवेश अवसरों का लगातार मूल्यांकन करती रहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में चल रही अटकलों या संभावित सौदों पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।
