जानकारी के अनुसार, संबंधित यात्री नागपुर में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे। बताया गया है कि ये लोग डॉ. बी.आर. आंबेडकर के अनुयायी हैं और अकोला रेलवे स्टेशन से नांदेड़ जाने के लिए भगत की कोठी-काचेगुड़ा एक्सप्रेस में सवार हुए थे। यह ट्रेन संख्या 17606 है। यात्रा के दौरान वाशिम स्टेशन पार करने के बाद समूह के साथ चल रहा एक युवक गलती से सामान्य श्रेणी के डिब्बे के बजाय आरक्षित डिब्बे में पहुंच गया।
यात्रियों का आरोप है कि युवक के आरक्षित डिब्बे में प्रवेश करने के बाद आरपीएफ कर्मियों और कुछ यात्रियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर युवक के साथ मारपीट की गई। उसके साथ यात्रा कर रही महिलाओं ने बीच-बचाव करते हुए युवक को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनके साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें धक्का देकर पीछे हटाया गया। समूह के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इस घटना के बाद यात्रियों में नाराजगी फैल गई। जब ट्रेन हिंगोली रेलवे स्टेशन पहुंची, तो विरोध कर रहे यात्री नीचे उतर गए और रेलवे ट्रैक पर जाकर इंजन के सामने बैठ गए। उन्होंने रेलवे प्रशासन और आरपीएफ के खिलाफ नारेबाजी की तथा आरोपित कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई। यात्रियों के पटरी पर बैठने के कारण ट्रेन का परिचालन रुक गया। इसके चलते निर्धारित यात्रा में देरी हुई और रेल संचालन भी प्रभावित हुआ।
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर हिंगोली नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने यात्रियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और शिकायत पर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यात्रियों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद रेलवे ट्रैक खाली कराया गया और जोधपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस को आगे नांदेड़ की ओर रवाना किया गया। हालांकि, ट्रेन के रुकने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और अन्य रेल सेवाओं पर भी असर पड़ने की बात सामने आई।
यह पूरा मामला आरक्षित डिब्बे में गलती से प्रवेश करने के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। यात्रियों ने आरपीएफ कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन घटना में शामिल सभी पक्षों के बयान और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यात्रियों की मुख्य मांग संबंधित कर्मियों के व्यवहार की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस की ओर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद स्थिति सामान्य हुई और रेल यातायात बहाल हो सका।
