गुरुग्राम। देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों के समर्थन में पिछले 25 दिनों से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मिलने बुधवार शाम को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ 15 विपक्षी सांसद वांगचुक से मिलने मेदांता पहुंचे। पुलिस ने उन्हें अस्पताल गेट पर ही रोक लिया।
सांसद संजय सिंह की पुलिस से इसको लेकर तीखी बहस हुई। अंदर प्रवेश न मिलने पर सभी सांसद अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान वांगचुक की पत्नी गीतांजलि भी वहां पहुंचीं। गीतांजलि ने कहा कि सोनम ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें अपनी शर्तें और मांगें बताई हैं। सरकार को ये मांगें मान लेनी चाहिए।
करीब एक घंटे तक हंगामा चलने के बाद वांगचुक की निगरानी कर रही मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने हेल्थ अपडेट दिया और मेडिकल कारणों का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ ब्लड रिलेशन वाले ही मरीज से मिल सकते हैं। इसके बाद सांसद वहां से चले गए। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है।
वांगचुक ने सरकार के सामने रखीं ये शर्तें
वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने सरकार की पहल का आभार जताया और कहा कि उनकी तीन मुख्य मांगें हैं। पहली यह कि पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। दूसरी मांग जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। तीसरी मांग है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार किया जाए।
वांगचुक ने अनशन तोड़ने की शर्त भी रखी। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई 2026 को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।
मेदांता ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन
मेदांता अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार शाम हेल्थ बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि वांगचुक को आईसीयू में रखा गया है।
उनका इलाज मल्टी-डिसिप्लिनरी विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और वे पूरी तरह होश में हैं। उनका हर इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है।
