नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजधानी में हुए प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान हुई झड़प और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। इस घटनाक्रम को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। घटना के बाद कई प्रदर्शनकारी मौके से हट गए, जबकि पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो फिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। थरूर ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनहित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का महत्व संवाद से ही मजबूत होता है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस घटनाक्रम पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि परीक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों में लगातार विवाद सामने आ रहे हैं तो सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए इस पूरे मामले पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
इधर, संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्ष ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी विवादों और युवाओं से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि ऐसे विषय सीधे लाखों छात्रों और उनके भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक के एजेंडे या किसी संभावित निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया। आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी अपनी ओर से आंदोलन को लेकर आगे की रूपरेखा साझा की और सरकार के सामने रखी गई मांगों का उल्लेख किया।
संसद सत्र के साथ ही यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस पर तीखी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
