नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के दो भाइयों का एक दुर्लभ चिकित्सीय मामला वर्षों तक दुनियाभर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के लिए रहस्य बना रहा। दिनभर पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय रहने वाले ये दोनों बच्चे सूर्यास्त के बाद अचानक इतनी कमजोरी महसूस करने लगते थे कि न चल पाते थे, न बोल पाते थे और न ही अपने हाथ-पैर हिला पाते थे। इसी असामान्य स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने उन्हें “सोलर किड्स” का नाम दिया।
जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे दिन में अन्य बच्चों की तरह स्कूल जाते, खेलते-कूदते और सामान्य गतिविधियां करते थे। लेकिन जैसे ही शाम होती और अंधेरा बढ़ने लगता, उनके शरीर की शक्ति तेजी से समाप्त होने लगती थी। कुछ ही समय में वे लगभग निष्क्रिय अवस्था में पहुंच जाते थे।
डॉक्टरों के लिए बना चुनौतीपूर्ण मामला
बच्चों को इलाज के लिए इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत जांच शुरू की। प्रारंभिक परीक्षणों में बीमारी का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन में इस प्रकार का मामला पहले कभी नहीं देखा था।
सूरज की रोशनी से नहीं मिला सीधा संबंध
परिवार का मानना था कि बच्चों को ऊर्जा सूर्य की रोशनी से मिलती है और सूर्यास्त के बाद उनकी शक्ति समाप्त हो जाती है। हालांकि चिकित्सकों ने इस संभावना की जांच की। बच्चों को दिन के समय पूरी तरह अंधेरे कमरे में भी रखा गया, लेकिन वे सामान्य रूप से सक्रिय रहे। इससे विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि बीमारी का सीधा संबंध सूर्य की रोशनी से नहीं है।
दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी की आशंका
विशेषज्ञों ने इसे किसी दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) न्यूरोलॉजिकल विकार से जुड़ा मामला माना। जांच के लिए दोनों बच्चों के रक्त के नमूने विदेश की प्रयोगशालाओं में भेजे गए। साथ ही उनके गांव की मिट्टी और वातावरण के नमूनों का भी परीक्षण कराया गया, ताकि किसी पर्यावरणीय कारण की संभावना का पता लगाया जा सके। इसके बावजूद बीमारी का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।
परिवार की पृष्ठभूमि भी बनी शोध का विषय
दोनों बच्चों के माता-पिता रिश्ते में चचेरे भाई-बहन हैं। परिवार के छह बच्चों में से दो की कम उम्र में मृत्यु हो चुकी थी, जबकि अन्य भाई-बहनों में इस तरह के कोई लक्षण नहीं पाए गए। इस कारण विशेषज्ञों ने आनुवंशिक कारणों की संभावना पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।
आज भी शोध का विषय
इस अनोखे मामले ने दुनिया भर के चिकित्सा वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ मामलों का अध्ययन भविष्य में आनुवंशिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति की है, लेकिन “सोलर किड्स” का मामला आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि “सोलर किड्स” नाम लोकप्रिय जरूर हो गया, लेकिन अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि इस बीमारी का सीधा संबंध सूर्य की रोशनी से था। यही कारण है कि यह मामला आज भी चिकित्सा जगत की सबसे दुर्लभ और रहस्यमयी घटनाओं में शामिल माना जाता है।
