डॉ. रघुवंशी बताते हैं कि हाल ही में उनके पास 70 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पहुंचे, जो करीब 35 वर्षों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। लगभग 20 साल तक उनका इलाज आईबीएस-सी (IBS-C) मानकर किया जाता रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। जब विशेष जांच और एनोरेक्टल मैनोमेट्री की गई तो पता चला कि असली समस्या ऑब्स्ट्रक्टेड डिफिकेशन सिंड्रोम थी। बायोफीडबैक थेरेपी के आठ सत्रों के बाद मरीज की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पहले जहां उन्हें शौचालय में लगभग एक घंटा लग जाता था, वहीं अब यह समय घटकर करीब पांच मिनट रह गया और कब्ज की दवाओं की आवश्यकता भी लगभग समाप्त हो गई।
ऐसा ही एक अन्य मामला 40 वर्षीय महिला का सामने आया, जो दस वर्षों से कब्ज से जूझ रही थीं। लगातार जोर लगाने की आदत के कारण उनके मलाशय का हिस्सा बाहर आने लगा। जांच में पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की कमजोरी और ODS की पुष्टि हुई। समय पर बायोफीडबैक थेरेपी मिलने से बिना सर्जरी ही उनकी स्थिति में 90 से 95 प्रतिशत तक सुधार दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मोबाइल फोन नहीं, बल्कि मोबाइल देखते हुए लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने की आदत है। पहले लोग शौचालय में अखबार पढ़ते थे, अब उसकी जगह मोबाइल ने ले ली है। जब व्यक्ति स्क्रीन पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर लेता है तो मस्तिष्क और आंत के बीच का प्राकृतिक समन्वय प्रभावित होने लगता है। इससे मलत्याग का सामान्य रिफ्लेक्स कमजोर पड़ता है और धीरे-धीरे कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है।
डॉ. रघुवंशी के अनुसार पहले कब्ज को मुख्य रूप से 40 से 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा भी बड़ी संख्या में कब्ज की शिकायत लेकर क्लीनिक पहुंच रहे हैं। उनके क्लीनिकल अनुभव के मुताबिक पिछले दस वर्षों में कब्ज के मरीजों की संख्या में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। वहीं कब्ज के हर दस मरीजों में से तीन से चार ऐसे मिलते हैं, जो टॉयलेट में मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत स्वीकार करते हैं। हालांकि डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि यह उनके चिकित्सकीय अनुभव पर आधारित है और इस विषय पर व्यापक भारतीय वैज्ञानिक अध्ययन अभी उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञ स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। भोजन में पर्याप्त मात्रा में फाइबर, हरी सब्जियां, मौसमी फल और सलाद शामिल करें। दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, 7 से 8 घंटे की नींद लें और रोज सुबह एक निश्चित समय पर शौच जाने की आदत विकसित करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि टॉयलेट में अनावश्यक समय बिताने और मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार साबित हो सकती है।
