विद्याराम राठौर बताते हैं कि हादसे वाली रात पवन के कुछ दोस्त पैदल शीतला माता मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। पवन ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई। उसकी मां ने उसे जाने से मना किया लेकिन वह दोस्तों के साथ जाने की जिद करता रहा। आखिरकार परिवार ने उसे जाने की अनुमति दे दी। माता-पिता को जरा भी अंदाजा नहीं था कि दोस्तों के साथ मंदिर जाने का फैसला उनके बेटे की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था उसके बजाय परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।
पवन पढ़ाई में होशियार था और ग्वालियर में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रहा था। पिता का सपना था कि बेटा डॉक्टर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारेगा। इसी उम्मीद में उन्होंने अपना मकान गिरवी रखा और दूसरों की जमीन पर बटाई से खेती करके परिवार का खर्च चलाया। पवन का बड़ा भाई विशाल राठौर भोपाल से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। परिवार को उम्मीद थी कि दोनों बेटे पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होंगे और माता-पिता को मेहनत भरी जिंदगी से राहत मिलेगी। अब पवन की मौत के बाद ये सपने अधूरे रह गए हैं।
परिवार को पवन के दोस्तों ने बताया कि वह धार्मिक स्वभाव का था। मंदिर पहुंचने के बाद वह नहाकर दर्शन करने की बात कह रहा था। इसी दौरान चीनौर की ओर से ढलान वाले रास्ते पर एक तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पवन उछलकर पास की दुकान में जा गिरा और ट्रक उसके ऊपर चढ़ गया। हादसे में कई अन्य श्रद्धालुओं की भी जान चली गई।
पवन की मौत के बाद परिवार में शोक के साथ नाराजगी भी है। परिजनों का आरोप है कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक का मंदिर के पास तक पहुंचना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। बड़े भाई विशाल का कहना है कि रास्ता संकरा है और वहां बड़े ट्रक के प्रवेश पर रोक होनी चाहिए थी। उनके मुताबिक हादसे से पहले एक अन्य ट्रक भी उस रास्ते से गुजरा था। परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। अब विद्याराम सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि उनके बड़े बेटे को नौकरी दिलाने में मदद की जाए ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके और गिरवी रखे मकान का कर्ज चुकाया जा सके। जिस बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी और घर दांव पर लगाया था वह अब उनके बीच नहीं है।
इस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू हो गई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर सीबी प्रसाद को सौंपी है और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक कैसे पहुंचे और उस समय सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी। हादसे से पहले ट्रक को कथित तौर पर 200 रुपये लेकर प्रवेश देने का आरोप भी सामने आया है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब पीड़ित परिवारों को जांच से जवाब और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद है।
