दरअसल कोरोना काल के बाद ग्वालियर के बाजारों में ठेले और अस्थायी दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ी है। महाराज बाड़ा दौलतगंज सराफा और आसपास के बाजारों में अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। दिवाली की खरीदारी के लिए मंगलवार को महाराज बाड़ा और सराफा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस दौरान बार-बार जाम की स्थिति बनी और वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी काफी परेशानी हुई। बताया गया कि लगभग हर 20 मिनट में इन इलाकों में यातायात बाधित हो रहा था। इसी समस्या को लेकर ट्रैफिक पुलिस और व्यापारियों के बीच बैठक भी हुई थी। व्यापारियों ने हाथ ठेलों को जाम की बड़ी वजह बताते हुए नगर निगम कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
शहर में अतिक्रमण की समस्या के बीच नगर निगम की ओर से बनाए गए 11 हॉकर्स जोन भी चर्चा में हैं। नगर निगम ने नेहरू पार्क पिंटो पार्क लक्ष्मण तलैया इंटक मैदान हजीरा और विनय नगर सहित अलग-अलग स्थानों पर करोड़ों रुपए खर्च कर हॉकर्स जोन तैयार किए हैं। इन स्थानों पर करीब 1470 वेंडर्स को व्यवस्थित तरीके से बैठाने की व्यवस्था है। इसके बावजूद आरोप है कि निर्धारित स्थानों पर वेंडर्स नहीं पहुंच रहे हैं और मुख्य सड़कों पर ठेले लगाकर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में हॉकर्स जोन बनाने के उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दौलतगंज निवासी व्यापारी पुरुषोत्तम जैन ने अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में नगर निगम पुलिस और जिला प्रशासन पर अतिक्रमण के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि शहर के प्रमुख बाजारों में अव्यवस्थित तरीके से ठेले लगाए जाने के कारण आम नागरिकों व्यापारियों और वाहन चालकों को लगातार परेशानी हो रही है।
याचिका में महाराज बाड़ा दौलतगंज टोपी बाजार नजरबाग सराफा मुरार हजीरा शिंदे की छावनी कंपू रोड पड़ाव और लक्ष्मीगंज सब्जी मंडी से गोल पहाड़िया तक अतिक्रमण का मुद्दा उठाया गया है। आरोप है कि इन इलाकों में पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण के कारण आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को भी परेशानी होती है। याचिका में अधिकारियों की कथित मिलीभगत और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए गए हैं।
मामले में मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 और स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से हॉकर्स की सूची और रसीदों का रिकॉर्ड मांगा है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों पर नजर रहेगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि इस कानूनी पहल के बाद अतिक्रमण और यातायात की समस्या के समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
