जानकारी के अनुसार रविवार देर रात शहपुरा के बाहर नो-एंट्री पॉइंट पर बैरिकेड लगाकर भारी वाहनों की चेकिंग की जा रही थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश थे कि रात एक बजे से पहले भारी वाहनों को प्रवेश नहीं दिया जाए। रात करीब साढ़े बारह बजे तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इसी दौरान भोपाल की ओर जा रहे एक ट्रक चालक ने जल्द आगे जाने की अनुमति देने का आग्रह किया। प्रधान आरक्षक लखन निषाद के अनुसार उन्होंने चालक को थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे का मोबाइल नंबर दिया और कहा कि यदि अधिकारी अनुमति देते हैं तो वाहन को आगे जाने दिया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने जब थाना प्रभारी को फोन किया और बताया कि नंबर हवलदार ने दिया है तो इस बात पर टीआई नाराज हो गए। इसके बाद फोन पर ही थाना प्रभारी और प्रधान आरक्षक के बीच तीखी बहस हो गई। लखन निषाद का आरोप है कि कुछ देर बाद टीआई अपने ड्राइवर राहुल गुप्ता और आरक्षक विकास कुमार के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उनके साथ गाली गलौज की गई और विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी गई। प्रधान आरक्षक का दावा है कि इस दौरान उनके हाथ पकड़े गए और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
लखन निषाद के मुताबिक मारपीट में उनका एक दांत टूट गया चश्मा क्षतिग्रस्त हो गया और सिर तथा नाक पर चोटें आईं। उन्होंने वर्दी फाड़ने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि घटना के बाद जब वे अपनी गाड़ी लेने थाने पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने नहीं दिया गया। गंभीर चोटों और हाथ में फ्रैक्चर की आशंका के चलते उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। सोमवार को वे अपनी शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी पहुंचे।
हालांकि थाना प्रभारी प्रवीण कुमार धुर्वे ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि ग्वालियर में हुए मंदिर हादसे के बाद नो-एंट्री व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के निर्देश थे। उनके अनुसार हवलदार वाहनों को जल्दी छोड़ने की बात कह रहे थे और उन्हें केवल समझाइश दी गई थी। टीआई ने किसी तरह के विवाद या मारपीट से इनकार किया है। इस तरह दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं और घटना की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी के अनुसार अमन ढाबा के पास वाहनों को रोकने के दौरान प्रधान आरक्षक लखन निषाद ने थाना प्रभारी के साथ अनुशासनहीनता की थी। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच एसडीओपी पाटन को सौंपी गई है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नो-एंट्री पॉइंट पर विवाद किस वजह से बढ़ा और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पुलिसकर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों और अधिकारियों के पक्ष को देखते हुए जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम होगी।
