निरीक्षण के दौरान मेंडोरा बरखेड़ी बाज्याफ्त कुशलपुरा मुल्ला जी की टेकरी फतेहपुर डोगरा महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित अलग-अलग क्षेत्रों में निर्माण और जमीन के भराव से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। टीम ने GPS लोकेशन और समय के साथ तस्वीरें लीं। निरीक्षण में जलाशय के किनारे मिट्टी और पत्थरों का भराव पानी की ओर जाती रिटेनिंग वॉल सीमेंट कंक्रीट के पिलर और निर्माणाधीन परिसरों जैसी स्थितियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ जगहों पर डैम की सीमा दर्शाने वाली मुनारें गायब मिलीं जबकि एक स्थान पर सीमा चिह्न खिसकाए जाने की बात दर्ज की गई है। इससे FTL की वास्तविक सीमा निर्धारित करने को लेकर सवाल उठते हैं।
रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में सबसे अधिक 12 अतिक्रमण दर्ज होने की बात कही गई है। इनमें मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग का केरवा रेस्ट हाउस भी शामिल बताए गए हैं। पर्यटन निगम के परिसर में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण होने का उल्लेख है। वहीं जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस के पास FTL क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट के पिलर बनाए जाने और बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने की बात भी निरीक्षण विवरण में दर्ज है। इन मामलों में संबंधित विभागों की स्थिति और निर्माणों की अनुमति से जुड़े दस्तावेज अहम होंगे।
निजी निर्माणों के संबंध में रिपोर्ट में अजय सिंह से जुड़ी भूमि पर FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख किया गया है। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा की पत्नी निशा डागा से जुड़ी जमीन पर लगभग 0.93 हेक्टेयर क्षेत्र में मिट्टी और पत्थरों का भराव तथा निर्माण कार्य जारी होने की बात कही गई है। इसके अलावा कई अन्य लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं जिन पर FTL में रिटेनिंग वॉल बनाने या ग्रीन बेल्ट में निर्माण करने के आरोप दर्ज हैं। बरखेड़ी बाज्याफ्त क्षेत्र में प्रकाश झा से जुड़े PJP एस्टेट के संबंध में भी आरक्षित भूमि पर रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने का उल्लेख है। इन सभी विवरणों को निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कुशलपुरा क्षेत्र में डैम की सीमा बताने वाली मुनार खिसकाए जाने और FTL के भीतर बाउंड्री बनाकर पानी के बहाव को प्रभावित करने का आरोप भी दर्ज है। कुछ स्थानों पर निजी तालाब और व्यावसायिक गतिविधियां होने की बात कही गई है। मुल्ला जी की टेकरी में FTL के भीतर कई परतों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगले का निर्माण दर्ज किया गया है। फतेहपुर डोगरा में जमीन के भराव और RCC दीवार के निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने इन गतिविधियों को तस्वीरों और ड्रोन के माध्यम से दर्ज करने की बात कही है।
महुआखेड़ा में भी अतिक्रमण का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार एनजीटी ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में वहां का कोपरा यानी मिट्टी और पत्थरों का भराव हटाने का निर्देश दिया था लेकिन निरीक्षण के समय यह मौजूद मिला। वहीं मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बिना अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन के सीमेंट कंक्रीट का पुल बनाए जाने की बात दर्ज की गई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ सकता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है।
वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम 2017 का नियम 4 आर्द्रभूमि में अतिक्रमण भराव और स्थायी निर्माण जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध से संबंधित है। जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 भी जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। अब निरीक्षण रिपोर्ट एनजीटी के सामने रखे जाने के बाद संबंधित निर्माणों की अनुमति नियमों के पालन और कथित अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
