नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने 23 जुलाई को कार्यभार संभाला था। इसके बाद प्रदेश में कलेक्टरों की पदस्थापना में लगातार बदलाव देखने को मिले। कुछ जिलों में गंभीर घटनाओं के बाद अधिकारियों को हटाया गया तो कुछ स्थानों पर प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नई नियुक्तियां की गईं। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार ने कई अधिकारियों को एक जिम्मेदारी से हटाकर दूसरी जगह महत्वपूर्ण पदों पर भी तैनात किया है।
जहरीली शराब से मौतों के मामलों के बाद सागर और देवास में प्रशासनिक बदलाव विशेष रूप से चर्चा में रहे। सागर जिले की बंडा तहसील में सितंबर के दौरान जहरीली शराब पीने से 30 से अधिक लोगों की मौत होने की खबर सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच आयोग गठित किया था और स्वयं भी सागर पहुंचे थे। घटना के समय कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को तत्काल नहीं हटाया गया था लेकिन 27 अक्टूबर को जारी तबादला आदेश में कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया को नई जिम्मेदारियां दे दी गईं। सागर में दिलीप कुमार यादव को कलेक्टर और संजीव कुमार सिन्हा को एसपी बनाया गया।
देवास जिले में भी जहरीली शराब से मौतों के बाद प्रशासनिक बदलाव किए गए। यहां कलेक्टर ऋतुराज और एसपी पुनीत गहलोत को हटाया गया। देवास की नई कलेक्टर नेहा मीना को बनाया गया जो इससे पहले सिवनी जिले की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। सिवनी में अंजू अरुण कुमार को कलेक्टर नियुक्त किया गया जबकि देवास के एसपी पद पर बालाघाट के तत्कालीन एसपी आदित्य मिश्रा को भेजा गया। इन बदलावों के बाद दोनों जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई जिम्मेदारियां तय की गईं।
कलेक्टरों के फेरबदल का एक बड़ा दौर 13 अक्टूबर को देखने को मिला था। उस दिन जारी आदेश में पन्ना मऊगंज जबलपुर नर्मदापुरम हरदा सिंगरौली बालाघाट शाजापुर बुरहानपुर भिंड और रायसेन सहित 11 जिलों के कलेक्टर बदले गए थे। इससे पहले और बाद में भी कई जिलों में अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई। इन बदलावों के जरिए अलग-अलग जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया।
पुलिस विभाग में भी जुलाई से अक्टूबर के बीच लगातार फेरबदल हुए। शाजापुर शहडोल टीकमगढ़ और श्योपुर सहित कई जिलों में एसपी बदले गए। 27 अक्टूबर के आदेश में सागर और देवास के पुलिस अधीक्षकों की पदस्थापना बदली गई जबकि 28 अक्टूबर को नर्मदापुरम अलीराजपुर पन्ना बैतूल और हरदा में नई नियुक्तियां की गईं। इस तरह पुलिस महकमे में भी बड़े स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गईं।
इन तबादलों का एक अहम पहलू यह है कि कुछ अधिकारियों को विवादों या गंभीर घटनाओं के बाद फील्ड पोस्टिंग से हटाया गया लेकिन बाद में उन्हें दूसरी जगह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी मिली। कुमार सत्यम दिलीप कुमार यादव और रोहित सिसोनिया के मामले इसी संदर्भ में चर्चा में रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अधिकारियों को हटाने के बाद सरकार ने कुछ मामलों में उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपीं।
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में पिछले चार महीनों के दौरान हुए प्रशासनिक और पुलिस फेरबदल ने सरकारी व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तस्वीर पेश की है। जहरीली शराब से मौतें किसान आंदोलन और मुआवजे से जुड़े विवाद इस अवधि में चर्चा के प्रमुख विषय रहे। अब इन बदलावों के बाद संबंधित जिलों में प्रशासनिक कामकाज कानून व्यवस्था और जनसमस्याओं के समाधान पर कितना असर पड़ता है यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
