
भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।
दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।
हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।
इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।
