प्रेम शुक्ला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की रणनीति और राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, राहुल गांधी को आगे बढ़ाने की कोशिश में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि जनता लगातार चुनावों में कांग्रेस को नकार रही है और पार्टी अब तक 60 विधानसभा चुनाव हार चुकी है।
संसद में बहस करने की चुनौती पर उठाए सवाल
राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती देने के मुद्दे पर भी प्रेम शुक्ला ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में बहस करने के बजाय सड़क पर बहस की चुनौती देते हैं। शुक्ला के अनुसार, राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने और चर्चा में हिस्सा लेने के चार अवसर मिले, लेकिन कांग्रेस के सांसद सदन छोड़कर चले जाते हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि संसद लोकतांत्रिक चर्चा का प्रमुख मंच है और वहां विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलता है। ऐसे में राहुल गांधी को सदन के भीतर बहस करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद में चर्चा का अवसर उपलब्ध है, तो उसका इस्तेमाल करने के बजाय बाहर बहस की चुनौती क्यों दी जाती है।
SIR के विरोध पर कांग्रेस को दिया जवाब
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस के विरोध पर भी शुक्ला ने अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि देश में अब तक 12 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है और इनमें से 10 बार यह प्रक्रिया कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में हुई थी। उनके अनुसार, वर्ष 2004 के बाद पहली बार यह प्रक्रिया कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य ऐसे नामों को हटाना है, जिनकी स्थिति बदल चुकी है। इसमें स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके मतदाता, मृत मतदाता, डुप्लीकेट नाम और अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम शामिल हैं।
शुक्ला ने यह भी दावा किया कि SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर 18 याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। उन्होंने कांग्रेस के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
चुनावी आंकड़े रखकर कांग्रेस के कमजोर होने का दावा
प्रेम शुक्ला ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन की तुलना करते हुए अलग-अलग वर्षों के विधानसभा सदस्यों के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के कांग्रेस महासचिव रहने के दौरान वर्ष 2008 में कांग्रेस के 1,182 विधायक थे, जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 889 थी।
उनके मुताबिक, वर्ष 2014 में कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 883 रह गई, जबकि भाजपा के 1,035 विधायक थे। वर्ष 2017 में कांग्रेस के 807 और भाजपा के 1,365 विधायक बताए गए। इसी तरह वर्ष 2024 के आंकड़ों में कांग्रेस के 654 और भाजपा के 1,588 विधायक होने का दावा किया गया।
शुक्ला ने वर्तमान स्थिति के आंकड़े बताते हुए कहा कि कांग्रेस के 663 विधायक हैं, जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 1,819 है। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर कांग्रेस के लगातार कमजोर होने का दावा किया।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति का असर उसके चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पार्टी को लगातार चुनावी पराजय का सामना करना पड़ा है और जनता ने उसे 60 विधानसभा चुनावों में नकार दिया है।
