33 वर्षीय सारांश जैन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए टीम की ओर से दूसरे चार दिवसीय मुकाबले में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाने के साथ छह विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। यही प्रदर्शन उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खोलने में निर्णायक साबित हुआ।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सारांश का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 2223 रन बनाए हैं और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में लगातार योगदान देने की उनकी क्षमता उन्हें एक उपयोगी ऑलराउंडर बनाती है। यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने श्रीलंका दौरे के लिए उन पर भरोसा जताया है।
सारांश जैन का क्रिकेट सफर इंदौर के विजय क्लब से शुरू हुआ था। इसी मैदान पर उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और अपने खेल को निखारा। इसी क्लब में भारतीय बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी उन्होंने अभ्यास किया। वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद अब उन्हें देश की सर्वोच्च क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।
सारांश के चयन के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी प्रेरणादायक है। उनके पिता सुबोध जैन मध्यप्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। उनका सपना भारत के लिए खेलना था लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। अब बेटे सारांश के जरिए उनका सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी पिता ने बेटे का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। वहीं बड़े भाई ने अपना क्रिकेट करियर छोड़कर सारांश के सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।
भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। इस दौरे पर सारांश के पास टेस्ट कैप हासिल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने करियर की शानदार शुरुआत करने का सुनहरा अवसर होगा।
भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे जबकि केएल राहुल उपकप्तान होंगे। बल्लेबाजी में यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। वहीं स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार और सारांश जैन पर बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो यह उनके करियर का सबसे यादगार क्षण होगा और भारतीय क्रिकेट में एक नई शुरुआत भी।
